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देवनागरी में लिखें

Sunday, 30 June 2013

01 - 07 - 2013



आजीवन हो
आह्लादित हृदय
एक साथ तेरा   ......
1-7-13

संतापी मन
बना जा सर्वसह                (सबका क्लेश हरनेवाला या सब सहनेवाला)
सार्वलौकिक                             (सब लोगों से संबंध रखने-वाला )

~~~~~

1 July
Happy Dr's Day    

रोग भगाता
जाँ बचाता हमारा
ख़ुदा बनता

अर्थ का मोह
तोड़ दे मरीज़ से
विश्वासी रिश्ता

 भारत में डाक्टर'स डे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा॰ विधान चन्द्र राय (1 जुलाई 1882 ~~~ 1 जुलाई 1962) के सम्मान में मनाया जाता है !!....

  ~~~~~

कहाँ कृष्ण है
बस यही प्रश्न है
व्याकुल मन ..... (Sowaty)

कहाँ कृष्ण है
बस यही प्रश्न है
अन्तर्मन है ?

कहाँ कृष्ण है
बस यही प्रश्न है
सखी(नारी)चीर में ........

Thursday, 27 June 2013

बड़े भैया





मेरे पिता-तुल्य बड़े भैया ......
माँ के बाद , माँ की सारी जिम्मेदारी इन्हों ने ही पूरी की ......

जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और ढेरों शुभकामनायें .....
आपका साया हमारे सिर पर तब-तक रहे ,
जब तक ये दुनिया रहे ....

 इनकी एक खास बात आज कहने को रोक नहीं सकी .....
अगर आपको बुरा लगे तो क्षमा-प्रार्थी हूँ *बड़े भैया .....
 इन्हें मेरी शादी करने के बाद और लड़की (जैसे :- छोटी साली ,बड़ी साली की लड़कियां , भतीजी-भगिनी , दोस्त की बेटी , आस  -पड़ोस की बेटी यानि समाज सेवा) की शादी करवाना अपनी ही जिम्मेदारी लगती और बहुत कुशलता पूर्वक सम्पन्न भी करवाते ....
लेकिन जैसा हमारा समाज है ..... शादी के बाद लड़का-लड़की तो बहुत खुश होते .... लेकिन लड़के की माँ को कोई ना कोई शिकायत अगुआ से हो ही जाती है ....
अगुआ को बहुत अपशब्द , गाली ,बुरा-भला सुनने को मिल जाता है .....
इन्हें बुरा लगता या ना लगता मुझे बहुत बुरा लगता ....
क्यूँ कि जिन लड़कियों की शादी ,ये करवाते  ,लड़का-पक्ष वाले मेरे परिचित जरूर होते ....
सुनने को मुझे मिल ही जाता .....
मैं अक्सर इनसे बोलती कि आप को बुरा नहीं लगता .... ??

ये हँसते हुये बोलते .... देखअ तअ कहीं हमराअ देहाअ मे कौनो सटलअ बा अपशब्द , गाली ,बुरा-भला ..... पुण्य होला आ लड़की केअ बिहाआ करवावलअ ......
काश !!
ये शिकायते नहीं होते
काश !!
ऐसा हो जाता
इनके जैसा बन पाती
किसी का
कहा-किया खो जाता
असर नहीं हो पाता
दिल पर नहीं ले पाती  ......



Photo: * जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई



Tuesday, 25 June 2013

सज़ा एक ही होनी चाहिए थी .... ??



एक बार .... एक अदालत में तीन खूनी पकड़ कर लाये गये .... उनमें से एक को बरी कर दिया गया .... दूसरे को पाँच साल की सज़ा मिली .... तीसरे को फांसी की सज़ा मिली ....

जिसे बरी किया गया ,वो मकान बनाने वाला एक मजदूर था .... ,छत पर काम करते वक़्त एक बड़ा पत्थर उसके हांथ से अचानक छुट कर गिर गया और वो पत्थर नीचे चलते एक राहगीर के सिर पर लगा और उससे उस राहगीर की मृत्यु हो गई .... हत्या तो हुई लेकिन मजदूर ने वो जान-बुझ कर पत्थर नहीं फेंका था उसकी नियत गलत नहीं थी इसलिए उसे बरी कर दिया गया ....

दूसरा मुजरिम एक किसान था .... उसके खेत में लगे फसल को एक चोर काट रहा था ,उस चोर को किसान ने ऐसी लाठी मारी कि चोर मर गया .... चोरी गलत काम है ,किसान का नुकसान भी हो रहा था .... लेकिन ऐसा अपराध नहीं था कि उसकी हत्या कर दी जाये .... इस लिए उस मुजरिम किसान को 5 साल की सज़ा हुई ....

तीसरा मुजरिम एक मशहूर डाकू था .... एक धनी इंसान के घर में रात को डकैती के नियत से गया और धनी पुरुष की हत्या कर के घर का सारा धन चुरा लिया .... उस डकैत का अपराध जघन्य था ,इसलिए उसे फांसी की सज़ा दी गई ....

तीनों ही अपराधी ने खून किया था .... जुर्म का बाहरी रूप एक सा था .... सतही सोच के आधार पर सज़ा एक ही होनी चाहिए थी .... ??


ऊपर के न्यायलय में भी ऐसा ही न्याय होता होगा ना .... ??

हम सभी को भी अपने अन्तर्मन के सत्यनिष्ठ जज के फैसले के अनुसार न्याय का साथ देना चाहिए .... ??

अन्तर्मन कोई काट -छांट  नहीं करता .... लोभ - लालच ,भय - स्वार्थ उसे प्रभावित नहीं करता .... अन्तर्मन तो बस विश्वास पर निर्णय (जजमेंट) देता है ....


Saturday, 22 June 2013

मैं स्तब्ध हूँ


सैलाब ,प्रलय ,प्रकृति आपदा या दैविक प्रकोप जो रहा हो ....
मैं मूक थी ....
मेरी लेखनी को शब्द नहीं मिल रहे थे ....

कल ये प्रसाद मेरे हांथों  में आया ....

मैं स्तब्ध हूँ ....
इस प्रसाद के लोभ में
आकांक्षा के प्रलोभन में
कितनों की बलि चढ़ गई  ....

मैं अब स्तब्ध हूँ
इस चाँदी के सिक्के को देख कर
जो भोले-भण्डारी
धतूर कनेल भांग से खुश हो जाते हैं
उनके प्रसाद में ..............



खुश कौन ज्यादा होगा
केदार नाथ या
चढ़ा प्रसाद पाने वाला ???




Saturday, 15 June 2013

एक क्षण .......


खिलखिलाने के लिए एक क्षण बहुत है 





Advisory excellerator fy13 q3 jan to mar 2013.pps (6) from Vibha Shrivastava


Mehboob Shrivastava को इस साल 

“Excellerator” is an award that recognizes individuals who 


demonstrate excellence in their field of work and stand out 


as champions.


Please refer page#21.......


Photo

महबूब को उसकी कंपनी अवार्ड देने की घोषणा की है ....

महबूब सफलता की एक एक सीढ़ी चढ़ता जाता है और मैं अपने पिता के आगे नतमस्तक होती हूँ ....
 आज जो भी हो रहा उनके आशीर्वाद से ....

बस एक कसक है .... जो कभी भी मिट नहीं सकती ....
महबूब को जब नौकरी लगी तो तैय किया गया कि उसकी पहली सैलरी को उसके बुजुर्ग(दादा-दादी ,नाना) को दिया जाएगा .... क्यूँ  कि हमारे घर में कोई पूजा-दान नहीं होता है .... सैलरी आते ही दादा-दादी को उनके मन मुताबिक दे दिया गया और नाना के लिए रख दिया गया कि जब उनके पास जाया जाएगा तो दे दिया जायेगा ..... लेकिन ,हम कुछ दिनों तक ना जा सके और नाना की मौत की खबर आ गई .......... कल(16/6) फादर्स डे है और कल(14/6)महबूब को अवार्ड मिलने की घोषणा हुई .... कसक फिर ..........



Tuesday, 11 June 2013

बेवफ़ाई


अदाकारा जिया ख़ान की मौत से स्तब्ध हूँ .... लेकिन .... ज्यादा स्तब्ध हूँ , आत्महत्या के कारणों को जान कर ....

हमने ,दिल-ओ-जान से जिसे चाहा ,
उस बेवफ़ा ने किसी और को चाहा ,
पता नहीं हम क्यू उनके लिए फ़रियाद करते हैं ,
जो प्यार के बहाने हमें बर्बाद करते हैं ....

बेवफ़ाई .... किसे कहें बेवफ़ाई ....??

मर्द को मोह का श्राप
और
स्त्री को धैर्य का वर
मिला हुआ है ....
फिर सब बातों के लिए
किसी एक को दोषी
क्यूँ ठहराते हैं , हम  .........

शादी से पहले हुये शारीरिक संबंध , प्रेम के किस श्रेणी में आते हैं ....?? अगर वो बलात्कार था .... तो दो बार गर्भपात ....
 दो बार बलात्कार हुआ था .... ??
और तब वो क्यूँ चुप रही थी .... ??

अत्यधिक तप से
पाया गया एक शब्द है
प्रेम
यह मित्रता का सगा भाई है
एक रंग-रूप का
हु ब हु
रु ब रु होना हो
तो
कुछ ऐसे कि
जब कभी भी
लिखना हो प्रेम तो
शब्द मित्रता से
 होकर गुजरते हैं .....
प्रेम तो मधुर और कोमल होता है ....

काम-वासना-अश्लीलता .... प्रेम होने का भ्रम हो सकता है .... !!

सत्य थोड़ा रूखा है .... सत्य से निर्भीकता आती है तो प्रेम से निरभिमानता .... सत्य और प्रेम एक दूसरे के पूरक और आधार हैं .... सत्य का आधार मस्तिष्क है और प्रेम का आधार हृदय है .... सत्य जैसे जानने की बात है तो प्रेम ठीक वैसे ही मानने की बात है .... परिवार प्रेम के विकास की पहली सीढ़ी है .... परिवार में जहां परस्पर प्रेम है .... आपस में आत्मीयता है .... वहाँ पर एक व्यक्ति ,अन्य दूसरे व्यक्ति के दुख को समझता है .... ऐसे परिवेश में एक व्यक्ति ,दूसरे अन्य व्यक्ति के दुख को दूर करने के लिए वैसा ही प्रयास करता है , जैसा कि वह अपने दुख को दूर करने के लिए प्रयास करता है .... जिया ख़ान की माँ का किसी मर्द के साथ बिना शादी के रहना .... "कौन सा प्रेम" को सीखाता है ....

फिर वही बात बेवफ़ाई .... बेवफ़ाई का दर्द अवसाद तक पहुंचा सकता है ..... मौत का कारण बन सकता है .... बेवफ़ाई जान लेवा दर्द होता है .... समझ सकती हूँ .... लेकिन .... तब , जब कभी प्रेम मिला हो .......
!!


Saturday, 8 June 2013

एकतीस साल गुजराती गई




एकतीस साल गुजराती गई
कुछ यादें जोड़ती गई
कुछ यादें विछुड़ती गई
एकतीस साल गुजराती गई
जेठ का महिना मिला था
रेगिस्तान के रेत पर
नंगे पैर दौड़ती गई
एकतीस साल गुजराती गई
रास्ते में चट्टान मिला
ठोकर खाती गई
ठोकर मारती गई
एकतीस साल गुजराती गई



समुंदर में सैलाब सा जीवन मिला
नाक तक पानी में
उतरती गई
उबरती गई
उबारती गई
एकतीस साल गुजराती गई
गिला-शिकवा ना रहा
माफ करती गई
माफी मांगती गई
एकतीस साल गुजराती गई
शूल निकाल
फेंकती गई



फूल जुटा
सँजोती गई
सहेजती गई
संभालती गई
एकतीस साल गुजराती गई
मुस्कुराती गई
भार्या-जननी-
धरा बनती गई
एकतीस साल गुजराती गई
दुआ करती गई
फिर नज़र
 ना लगे किसी की
नज़र तो अपनी ही लगती है
एकतीस साल  गुजारती गई
!!








जीत गई
जी गई
जीती गई
एकतीस साल गुजारती गई ....







Wednesday, 5 June 2013

जीवन 80% आनंद है और 20 % दुख है .... The best creation of God ....


Never blame any one in LIFE ,
WORST people give a LESSON
BAD people give EXPEREINSE
GOOD people give HAPPINESS
BEST people give MEMORIES

۞
दुनिया को बदलना है .... पहले खुद को तो बदल लीजिये ....
किसी ने कहा , अपनी शक्ल भी तो आईने में देखो ....
۞
किसी ने कहा दुनिया ही एक आईना है , जिसमें सबका Attitude(मुद्रा-व्यवहार)Reflect (टकराने के बाद वापस मुड़ना .... अर्थात , जैसा जायेगा , वैसा ही मिलेगा) होता है ....
बोये पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय ....
۞
किसी ने कहा एक चम्मच घी हवन में डालो .... अग्नि अपने माध्यम के द्वारा पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित कर शुद्ध कर देगी..
۞
दूसरों को प्यार के दौलत से मालामाल कर खुद प्रेम से लबालब हो सकते हैं ....
۞
जहां में मुस्कान बाँटिए .... हमें मुस्कान खोजनी नहीं पड़ेगी ....
۞
हमेशा दूसरों की प्रशंसा कीजिये आपकी प्रशंसा करने के लिए दूसरे मजबूर हो जायेंगे ....
۞
आभार व्यक्त कीजिये ,लोग आपके आभारी होगें ही
۞
नफरत करेंगे , नफरत ही तो लौट कर आयेगी ....
۞
जिसकी आदत होती है , दूसरों की निंदा-चुगली करने की , उसकी निंदा क्यूँ ना हो भला ....
۞
दूसरों के प्रति गुस्से की भावना रखना अपने लिए उनके मन में गुस्सा पैदा करना होगा ....
۞
दूसरों में अच्छाई देखते हैं तो उन्हें मजबूर करते हैं कि वे भी आपकी अच्छाई ही देखें ....
۞
आप दूसरों में आशा की किरण देखते हैं , यह आपके भीतर की आशा दिखलाई पड़ती है ....
۞
आप में चिल्लाने की आदत है तो सभी आप पर चिल्लायेगें ही ....
۞
जुबान से मधुर होना चाहिए .... नहीं तो अच्छे स्लोगन तो दीवारों पर भी लिखे होते हैं ....
۞
एक अच्छा श्रोता बनिये .... धैर्य पूर्वक दूसरों की बातें सुनिए .... आपकी बात भी जरूर सुनी जाएगी ....
कम बोलने की आदत होगी तो उम्दा बातें बोलियेगा .... नहीं तो सब कहेगें कि बकर-बकर तो करता ही रहता है .... एक चुप्पा सौ वक्ता पर भारी ....
۞
अपने अंदर दूसरों को समझने की शक्ति को पनपने दीजिये .... तभी तो आप को दूसरे समझ पाएंगे ....
۞
किसी की भी मदद के लिए तत्पर रहिए .... कोई जरूरी नहीं कि जब आप को जरूरत हो कोई की मदद की तो वही आपकी मदद करे जिसकी आपने मदद किये थे ....  लेकिन कोई ना कोई आपकी मदद जरूर करेगा .... ऐसा मेरा खुद का अनुभव कहता है ....
۞
जब एक जैसे विचारों और भावनाओं वाले दो लोग आमने-सामने होते हैं तब कम्यूनिकेशन के लिए शब्दो कि जरूरत नहीं होती .... चेहरे के भावों ,आँखों से सबकुछ कहा और सुना जा सकता है .... "न बोले तुम न मैंने कुछ कहा" जैसे हालात होते हैं ....
۞
और
इंसान ही क्या जानवर भी हमारी भावनाओं के सिग्नल पकड़ते हैं .... कई बार गौर की हूँ .... जब किसी कुत्ते के पास से गुजर रही होती हूँ तो या तो वो मुझे घुरना भौंकना चाहता है या पास आकर भी
दुम हिलाने लगता है सिर झुका देता है जैसे कह रहा हो प्यार करो ....
वो इस लिए होता ... कभी या तो मैं कुत्ते को देख कर डर रही होती हूँ या किसी-किसी कुत्ते को देख कर उसके साथ खेलने का मन कर रहा होता है ....
۞
इन फीलिंग्स को मोटा-मोटी तौर पर दो भागो में बांटा जा सकता है .... एक समूह है 'डर' ,
जिसके कारण गुस्सा,शर्म ,ईर्ष्या ,दुख ,आत्मा ,संशय और भी दूसरे नकारात्मक विचार मन मेन आते हैं ....।
दूसरा समूह है 'प्रेम'जो हमारे भीतर शांति ,आशा,पवित्रता का .... सबसे जुड़ कर चलने का भाव
, दया साहस करुणा और जोश जैसे भाव जगाता है ....
۞
हमारी 50% भावनाएं बॉडी लैंग्वेज के जरिये कम्युनिकेट होती हैं .... 40 % भावनाएं लहजे यानि कि तों से और सिर्फ 10% भावनाएं ही शब्दों के जरिये दूसरों तक पहुँचती है .... आनंद सजगता सतर्कता और दया के क्षणों में जीना ,एक बच्चे की तरह रहना ,दिव्यता है .... अपने अंदर के अहम से मुक्त होकर सबके साथ बिना किसी संकोच के सहज रहना सम्मान से रहना सीखा देता है जीवन में किसी तरह का बदलाव हम वर्तमान में ही कर सकते हैं अतीत तो केवल आईना दिखा सकता है ....। वैज्ञानिक आइंस्टीन ने भी कहा है कि "विज्ञान मानुषी को अपरिमित शक्ति तो दे सकता है पर वह उसकी बुद्धि को नियंत्रित करने कि सामर्थ्य नहीं प्रदान कर सकता है ....
۞
जीवन 80% आनंद है और 20 % दुख  है .... लेकिन हम उस 20 % को पकड़ कर बैठ जाते हैं और उसे 200 % बना लेते हैं यह जान-बुझ कर नहीं होता बस हो जाता है ....
विश्वभर के डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास आने वाले 90% मरीज ‘मनोदैहिक’बीमारी से ग्रसित होते हैं .... कुछ मानसिक बीमारियों में से ,बड़ी खतरनाक बीमारियाँ हैं ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या 'पक्षपात’.... हम काम ,क्रोध ,मोह ,लोभ ,अहंकार को त्यागने की सोचते हैं , परंतु हम कभी ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या 'पक्षपात’से निजात पाने का उपाय ढूँढने का कोशिश नहीं कराते .... जो सबसे ज्यादा जरूरी होता है .... मुझे लगता है .... निस्वार्थ प्रेम को अपना कर और अपने मनोदशा(मूड)को समझ कर मनोदशा को नियंत्रित रखने की प्रक्रिया को अपना कर ही ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या ‘पक्षपात’पर नियंत्रण रख सकते हैं ....
۞
जिसने अपने मनोदशा पर नियंत्रण पा लिया .... समझो जग जीत लिया .....

If you see the Moon 
you can see 
the beauty of God 
If you see the Sun 
you can see 
the power of God 
&
If you see the Mirror 
you can see 
the best creation of God 
~~


Saturday, 1 June 2013

ये सही तो नहीं है ना .... ??


ध्यान(योग)की सारी विधियाँ जागरण की विधियाँ ही होती हैं ....
कैसे भी हो बस जाग जाना है ....कोई अलार्म लगा कर जाग जाता है …
 कोई पड़ोसी से कह देता है कि द्वार पर दस्तक दे दे कर जगा दे ….
कोई अपने घर के ही अन्य सदस्य को कह देता है कि आँख पर ठंढे पानी की छीटें मार-मार कर जगा दे ….
और
 जिसे पता है , समझ है थोड़ी ,
वो खुद अपने आप से कह कर सो जाता है ; हे ईश्वर मुझे ठीक समय पर जगा देना ....

 (मैं भी उन्हीं बंदो में से एक हूँ …. इतनी उम्र हो गई मेरी ,कभी भी ,किसी की भी ,सहायता नहीं लेनी पड़ी …. मुझे किस समय ,सुबह उठना है ,बस सोचने की जरूरत पड़ी ....चाहे रात के 2 बजे या 4 बजे सुबह .... ठीक उसी समय मेरी नींद खुल जाती रही है और मैं घड़ी पर नजर डालती हूँ ,तो वही समय हो रहा होता है .... …. जीतने बजे मुझे उठना था .... ऐसा नहीं है कि गहरी नींद  ना आती हो या रात में बार-बार नींद उचटती हो ....आज तक ये मेरे खुद के लिए भी आश्चर्य की बात रही .... लेकिन आज रहस्य का पता चला .... खुदा का तौहफा है)

और आश्चर्य की बात है कि ठीक समय पर कोई उसे उठा देता है ....
 क्यूँ कि सबके शरीर के अंदर ही एक घड़ी है जो काम करती है ....
अब तो वैज्ञानिक भी इस घड़ी से राजी हो गए हैं ....तभी तो सभी को ठीक वक़्त पर भूख लग जाती  है .... ठीक समय पर नींद आ जाती है और ठीक समय पर नींद खुल जाती है .... किसी वजह से थोड़ी देर हो जाए तो पेट कुलबुलाने लगता है .... शरीर की घड़ी कहने लगती है कि अब बहुत देर हो रही है , कुछ खाओ नहीं तो बस गड़बड़ हो जायेगी .....
अगर सोने का समय हो गया है और बिस्तर पर नहीं जा पाएँ तो भी पलकें झपकने लगती है ....शरीर  की घड़ी कहने लगती है , बिस्तर पकड़ो नहीं तो शरीर लुढ़केगा-जकड़ेगा ....
अगर सुबह जगने का समय हो गया हो और जरा आलस की वजह से सोने के थोड़ा लोभ से बिस्तर पर पड़े रहें तो सिर भारी हो जाता है और फिर पूरे दिन सुस्ती पकड़े रहती है .... अत: समय हो जाये  तो शरीर के घड़ी के कहे अनुसार उठ जाना चाहिए .... अगर मन से छिना-झपटी भी करनी पड़े तो करनी चाहिए .... शरीर को खींच कर भी बिस्तर से बाहर निकाल लेना चाहिए .... क्यूँ कि जागना तो होगा ही .... अन्यथा समय के साथ , जीवन भी व्यर्थ चला जाएगा .... प्रतिपल हांथ से गंवा देगें एक परम संपदा ....
और कैसे-कैसे धोखे देते हैं , कोई-कोई अपने आपको .... पहला सबसे बड़ा धोखा तो यही है कि वो सोचने लगता है कि वो जगा हुआ ही तो है .... आँख खुली ही तो है .... दुनिया को देख ही रहें तो हैं .... चल-घूम रहें हैं .... उठ रहें हैं .... बैठ रहे हैं .... सड़क से गुजर रहे हैं .... घर आ-जा रहे हैं .... दफ्तर आ-जा रहें हैं ....
हर किसी से टकरा तो नहीं रहे हैं ....  तो जगे हुये ही तो हैं .... पर ये सबसे बड़ा धोखा है .... क्यूँ कि जिसने यह मान लिया कि वो जगा हुआ है .... अब वह और जागने का .... अंतर-आत्मा को जगाने का कोई प्रयास नहीं करगा ....
ये सही तो नहीं है ना .... ??