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देवनागरी में लिखें

Thursday, 23 February 2017

*न्याय*



कुलबोरन! कौन सी मनहुस घड़ी थी जो तुझे बियाह के लाए इस घर में !मेरे बंश के जान के पीछे पड़ी है । किस जनम का दुश्मनी निकालने के लिए इस जनम में आई । अपनी बहु को शब्दों के नश्तर चुभोती हुई भगमतियाँ अपने बेटे के पीछे पीछे भाग रही थी । बेटे के कमर में रस्सी बाँध पुलिस घसीटते हुए ले जा रही थी ।

मुशहर टोली की भीड़ जमा ! तरह तरह के लोग तरह तरह की बातें चल रही थीं । एक औरत आगे बढ़ कर बहु को झंझकोरते हुए बोली क्यों की तुम ऐसा ? देख अपनी सास की हालत , कई दिनों के बाद तो बेटा घर आया था और तूने पुलिस को ख़बर कर दी । पुलिस जाने कैसा उसके के साथ व्यवहार करेगी?

"क्या इन्होंने उस बच्चे को जान से मार कर ठीक किया था , जो अपने बॉल को लेने हमारे छत पर चढ़ गया था ?

Sunday, 19 February 2017

क्रमशः

Live with happiness not for happiness
जो है जितना है
उतना में ख़ुश होना
सीख लेना समझदारी है

रिसेल आज चिंतित हो गया, कई दिनों से एनी दिखलाई नहीं दे रही थी ।
दो सालों से नित प्रतिदिन दिन सुबह की सैर में भेंट होने से एनी और रिसेल में गहरी दोस्ती होने लगी थी । सुबह की सैर में अनमना रिसेल एनी के घर पहुँच call-bell दबाया । थोड़ी देर प्रतीक्षा के बाद दरवाज़ा खुला । दरवाज़ा खोलने वाला १८-१९ साल का ख़ूबसूरत नौजवान एनी का पुत्र था । आदर के साथ रिसेल को ड्राइंगरूम बैठा दिया। थोड़ी ही देर में एनी आ बताई कि वो अस्वस्थ थी , इसलिए सुबह की सैर में नहीं आ पा रही थी
आस पास से ही खाँसने की आवाज़ आई , रिसेल के प्रश्नवाची निगाहों पर ऐनी रिसेल को बग़ल वाले कमरे में ला अपने पति से मिलवा दी । एनी के पति को देख रिसेल स्तब्ध रह गया । एनी ३८-३९ साल की होगी तो उसका पति ७२-७३ साल वृद्ध बिछावन पकड़े।
क्यूँ की फ़ैसला शादी का इनसे जब उम्र का इतना फ़ासला था .. कमरे से बाहर आते हुए सवाल दाग़ ही दिया रिसेल ने ऐनी से
शादी हो रही है तब समझने की ना तो उम्र थी ना आस पास कोई विरोध करने वाला था .... बहुत अच्छे इंसान हैं मेरे पति!
इतने ही अच्छे इंसान हैं तो तुमसे शादी ही क्यूँ की .... पढ़ा लिखा कर तुम्हारे योग्य लड़के से करते शादी .... क्या कारण था कि ये तब तक शादी नहीं किए थे ये ख़ुद ?
अरे इनकी शादी हो चुकी थी ... मुझसे बड़े बड़े इनके बच्चे थे
तो अपने बेटे से ही शादी करवा देते समय आने पर!
समय की प्रतीक्षा करते और बेटा बड़ा हो पिता की बात मान ही लेता इसकी किस आधार पर उम्मीद की जा सकती थी ?
तुम इन्हें मिली कैसे और कहाँ ?
लड़कियों की तस्करी करने वालों के हत्थे से छूट कर इनके पनाह में पहुँची थी .... ये तब S.P. थे ... घर के कामों में सहायता करने लाए थे मुझे । . सारे घर के काम करने के बाद भी किसी न किसी बात पर इनकी पहली पत्नी और बच्चें मेरी धुनाई अच्छे से करते थे !
अभी सब कहाँ हैं और ये केवल यहीं पड़े रहते हैं ?
एक बार ये बहुत बीमार पड़े घर के किसी सदस्य ने इनकी सहायता नहीं की .. मेरी सेवा करने से ये इतने प्रभावित हुए कि मुझे सबसे दूर किराए के मकान में रखने का फ़ैसला कर डाला तब तक मैं माँ बनने की तैयारी में थी। ..  इनके साथ नहीं होती तो कहाँ होती ?


Thursday, 16 February 2017

मोक्ष



ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन
हेलो
कैसी हैं ?
बिलकुल ठीक ! :) आप सुनाएँ कैसी हैं ?
मेरी तो नींद ही उड़ गई ... मन बहुत खराब हो गया ...अब तो रात भर नींद ही नहीं आएगी
ओह्ह ऐसी क्या बात हो गई ....मुझे भी बतायें चिंता होने लगी है ....
 WhatsApp ग्रुप में एक पेपर का कटिंग आया है जिसमें खबर है कि दास जी लापता हैं। .... 
भला वो कौन है जिनको आज दास जी की खोज खबर चाहिए। ... केवल पैसे के लिए जिनकी जरूरत थी। ... वो रहे या ना रहे क्या फर्क पड़ता .... वो भी आज जबकि वे रिटायर्ड हो गये थे ... केवल पेंशन पर हैं ....आधा उन्हें मिल रहा था ...चौथाई मिलेगा ही ...वर्षों से नौकरों के भरोसे थे ....पत्नी साथ क्यूँ नहीं रहती थी ये उनका निजी मामला था ...समाजिक तौर पर उनकी मुक्ति से मैं खुश हूँ 

Tuesday, 14 February 2017

पुस्तक मेला + वेलेंटाइन डे





चित्र में ये शामिल हो सकता है: 6 लोग, लोग बैठ रहे हैं

पटना (बिहार) में पुस्तक मेला (चार फरवरी से चौदह फरवरी) और वेलेंटाइन डे सप्ताह भर संग संग


कोई भी स्वचालित वैकल्पिक पाठ उपलब्ध नहीं है.चित्र में ये शामिल हो सकता है: 2 लोग, लोग खड़े हैं

ठिठकी भीड़
कुम्हार चाक देख
पुस्तक मेला
रो रहा प्रकाशक
स्व स्टॉल खाली पाया

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 4 लोग, लोग खड़े हैं 

चहूँ ओर सत राग का शोर बड़ा
बता दो किनके गले में छाला पड़ा
हाँ तो गर्म दूध जिनके मीत ने पीया
कड़ा सवाल सुनते क्यूँ लकवा जड़ा

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दिवस प्यार –
उजड़ा बाग़ देख
रोया पड़ोसी
<><>
पुस्तक मेला-
कुम्हार चाक संग
भीड़ ले सेल्फ़ी



Monday, 13 February 2017

छल में भी होता है छिपा हित




कोई भी स्वचालित वैकल्पिक पाठ उपलब्ध नहीं है.


"बहुत परेशान दिख रहे हैं सर क्या बात है ? किस बात की चिंता है आपको " ? अपने पदाधिकारी को चिंताग्रस्त मुद्रा में देख अधीनस्थ कर्मचारी ने पूछा
.
"कोई विशेष बात नहीं है। बहन की शादी करनी है, तैय नहीं हो पा रही है। ... घर में सबसे बड़े होने की जिम्मेदारी निभा नहीं पा रहा हूँ।
.
"अरे बस इतनी सी बात है सर ! समझ लीजिये आपकी चिंता अब खत्म। मेरा भगिना है। आप अपनी बहन की शादी की बात कर सकते हैं मेरी दीदी के घर चल कर। दीदी बहु की खोज में ही है। उनलोगों को , बी.एड की पढ़ाई की हुई लड़की चाहिए।
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बी.एड. मेरी बहन तो स्नातक भी नहीं है। ... मैं तो उसके पढ़ाई पूरी करवाना ही नहीं चाहता था। .. जल्दी से जल्दी केवल शादी कर जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहता था .... 
.
समय गुजरता गया ! चाह कर भी लगातार प्रयास करने के बाद भी भाई अपनी बहन की शादी तैय नहीं कर पाया दो सालों में .. और बहन जब स्नातक कर गई तो बी.एड. में नामांकन करवाने के बाद उसी अधीनस्थ कर्मचारी के भगिने से शादी तैय कर दिया
.
"आपको पता है न ? मैं नौकरी नहीं करूँगा! लड़की का बी.एड. होना इसलिए अनिवार्य था ताकि वो अपने निजी खर्चों के लिए किसी की मोहताज़ ना हो। सौ रूपये में अच्छे सहयोगी मिल जाएंगे, उन्हें घर के कामों के लिए। इतने रुपयों के लिए कोई केवल घर सम्भाले ,ये तो उचित तो नहीं ? अपने घर पर आये अपने होने वाले साले से सवाल किया 
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"हाँ ! हाँ ! आप निश्चिन्त रहें ! मेरी बहन के लिए भी ख़ुशी की बात होगी कि वो अपने पैरों पर खड़ी होगी। ... उड़ेगी खुला आकाश पा कर
.
बहन के शादी के कुछ सालों के बाद बहन की शिक्षिका की नौकरी की बात जब भाई ने चलाई तो बहन के ससुराल वालों साफ़ इंकार कर दिया। .... नौकरी करने कैसे जायेगी? .. बेपर्दा .....
.
.
"मैं नौकरी कर रहा हूँ तो घर पर काम करने के लिए ,मेरे माँ -बाप के सेवा के लिए , बच्चों के लिए किसी क्या जिम्मेदारी होनी चाहिए ये सोच कर न सवाल उठाना चाहिए था साले साहब 
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बहन-भाई सब कुछ समय की धार में ढूँढ़ने लगे 
समय के साथ बहन को बेटा हुआ ,बेटा बड़ा हुआ और माँ को प्रेरित कर पाठन -लेखन की दुनिया में ला व्यस्त कर दिया ..... तब तक सारे रिश्ते नातों की जंजीर बची कहाँ थी ... 
समय का क्या है .. ना ठहरता है ना छलता है ..... सबके लिए कुछ ना कुछ सोच कर रखा रहता है ..... 


देखो न छल में भी होता है छिपा हित
थमो नहीं राह खुद ढूँढ़नी होती है मीत

शिकवा करके ना मारो कुल्हाड़ी पे पैर






Wednesday, 1 February 2017

मुक्तक



उबलते जज्बात पर चुप्पी ख़ामोशी नहीं होती
गमों के जड़ता से सराबोर मदहोशी नहीं होती
तन के दुःख प्रारब्ध मान मकड़जाल में उलझा
खुन्नस में बयां चिंता-ए-हुनर सरगोशी नहीं होती

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वर्ण पिरामिड 

तो 
वैसा
स कर्म
सोच जैसा
गर्व गुरुता
दंभ से दासता
इंसान स्व भोगता
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स्व
भान
सज्ञान
राष्ट्रगान
अव्यवधान
गणतंत्र मान
वीडियोग्राफी भू की