सौंधी खुशबु नयी ताजगी , नया उत्साह जगा जाती ,
जलज पैदा कर जल में चाँद का अक्स गिला दिखलाती ,
थकान से उपजी असजता का एहसास मिटा जाती ,
बिखरे हुए घर को दोबारा व्यवस्थित करने का हिम्मत पैदा कर जाती ,
मीठे - मीठे सपनो की काल्पनिक दुनिया में जाने की उम्मीद दिखा जाती ,
आंधी से ऊपर उड़े धुल को मिट्टी में मिलाती हमारी स्मरण-शक्ति तेज करती ,
....... निरर्थक का कोई वजूद नहीं होता .... कहीं कोई स्थान नहीं मिलता .......
जलज पैदा कर जल में चाँद का अक्स गिला दिखलाती ,
थकान से उपजी असजता का एहसास मिटा जाती ,
बिखरे हुए घर को दोबारा व्यवस्थित करने का हिम्मत पैदा कर जाती ,
मीठे - मीठे सपनो की काल्पनिक दुनिया में जाने की उम्मीद दिखा जाती ,
आंधी से ऊपर उड़े धुल को मिट्टी में मिलाती हमारी स्मरण-शक्ति तेज करती ,
....... निरर्थक का कोई वजूद नहीं होता .... कहीं कोई स्थान नहीं मिलता .......
जब-जब पहली बारिश की बुँदे मिट्टी का हाल-चाल जानने आती ..... !!




शिखर से टकरा फिर नीर बन मिट्टी से मिलती .... !!
मिट्टी अमिट बड़ी अनमोल होती ,
मैं मिट्टी में लोट - पोट कर बड़ी होती ,
बचपन छोड़ जवानी माँगती ,
मिट्टी में घरौंदे बनाकर सच का घर बनाने के सपने सजाती .... !!
पहली बारिश की बुँदे मिट्टी का हाल-चाल जानने आती ,
मिट्टी मिलन से निकली सौंधी खुशबु इत्र को मात देती ,