Friday, 14 August 2015

वन्दे मातरम जय हिन्द



वन्दे मातरम 

India Indian जो कहना है कहो फिरंगियों के कहने का हमें क्या परवाह
 हमें तो हिंद हिंदी का मान अभिमान हमेशा से रहा और हमेशा रहेगा

उड़ाई नींद देश के हालात , जनी चिंता गहराई है
जश्ने आजादी उजड़ी मांग सूनी कोख ने दिलाई है
नहीं सोच पाते मुख पोते स्याही कैसे मिटा पायेंगे
कुछ अपने स्वार्थवश धर्म जाति की राख उड़ाई है

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जश्ने आजादी ने जलेबी याद दिलाई है 
पापा काश आप लौट सकते 


दुष्टान्न त्यागें
हिन्द मिट्टी का नशा
दुश्मनी भूलें
~~ 
टंटा करते 
छिपकली फतिंगा -
पाक हिन्द से 

चाहत-बेड़े में साधिकारजो खड़ी होती
किस्मत ,लकिरों से यूँ ना लड़ी होती
तरसते रह गए एक सालिम मिलते
न तपिश औ न असुअन झड़ी होती

~~
हर हिन्दू विवेकानन्द और हर मुस्लिम हो कलाम
हो जाए न कमाल का हिन्द
खूबसूरत सपना है
स्वप्न ही तो हम हिन्दुस्तानियों की ताकत है

जय हिन्द 

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अंकुर झाँके
जनित्री विहँसती
शिशु दुलारे 

Wednesday, 12 August 2015

संग्रह





चाहत के बेड़े में जो खड़ी होती
हाथ-लकिरों से यूँ ना लड़ी होती
तरसते रह गए एक सालिम मिलते
न तपिश औ न असुअन झड़ी होती
....

बचना ऐसे मेहमाँ से
खुद राजा बन बैठता मेजमाँ पर रजा चलाता है
गुलाम खुद के घर में रंक टुकड़ो में बाँट बनाता है
..
क से कुबेर क से कंगाल कहो है न वश की बात
मेहमाँ न रहे बसे ज्यादा दिन जो बाहर औकात
..
जुबान नहीं होते तो जंग नहीं होते मान ली बात
घुटन से निजात कैसे मिलते सहे जो ना जाए घात
....
छोटे छोटे टांको से 
दर्द की तुरपाई की
खिलखिलाहट पैच
दरके की भरपाई की




Sunday, 2 August 2015

मित्रता दिवस की बधाई

1
बादल बदला के लिए नहीं तरसते
एक समान सरी व मरु में हैं बरसते
मित्रता यूँ होना चाहिए हम समझते
2
अच्छाइयों का कद्र वे नहीं करते जो खुद अच्छे नहीं होते
अहंकार अभिमान स्वाभिमान का अंतर नासमझ नहीं समझते
मोम को आंच पर चढ़ा कर हैं आकार देते 
3
कुंदन फोन की अपनी सहेली पुष्पा को ; फोन पुष्पा के पति उठाये
हेल्लो हाँ आप कौन ?
 कुंदन
कौन कुंदन
कुंदन फोन पटक दी
बाद में पति के बताने पर कि कुंदन का फोन आया था ; पुष्पा कुंदन को फोन की
हेल्लो
मैं पुष्पा
कौन पुष्पा ; आज के बाद कभी मुझसे कोई बात नहीं करना , तुम अपने पति को मेरा परिचय नहीं दी थी 
अरे मेरी बात तो सुनो
फोन कट चुका था फिर कभी कुंदन पुष्पा का फोन नहीं उठाई वो कहाँ है उसका पता पुष्पा कैसे ढूंढे और बताये उसके पति याद नहीं रख सके इसमें उसका क्या कसूर
कुंदन का फोन नम्बर पुष्पा अपने पति के दोस्त की पत्नी के माध्यम से उनकी फुफेरी बहन के द्वारा खोज निकाली थी ...... कुंदन उस गांव में तब टीचर थी ..... बाद में वो उस गांव को छोड़ कर चली गई

Friday, 10 July 2015

समय के साथ साथ सोच बदलता है या अलग अलग मनुज की अलग अलग सोच होती ही है ... समय काल कोई भी हो

                मेरी शादी में एक दूर के रिश्ते की ननद से मेरी मुलाकात दो चार दिनों की हुई वो बहुत सुलझी हुई लगी
एक दो साल बाद उनकी भी शादी हुई ..... मेरी जब उनसे मुलाकात हुई तो मैं उनसे पूछी .... आप सम्बन्ध विच्छेद कर नई जिंदगी क्यों नहीं शुरू करती हैं .... उनका जबाब था जैसी किस्मत मेरी ..... उनमें एक ही कमी है , वैसे वे बहुत अच्छे इंसान हैं .... फिर कौन जानता है, दूसरा कैसा इंसान मिले ... इतने अनाथ बच्चे हैं दुनिया में किसी को गोद ले अपने आँचल भर लुंगी....
करीब 29 - 30 बाद मेरे पड़ोसी की लड़की की शादी हुई ...
फिर एक बार लड़के वालों के धोखे की शिकार एक लड़की हुई
लड़की दो तीन दिन में ही लड़के को तलाक दे अपने नौकरी पर लौट गई

दोनों लड़की के नजरिये से मुझे दोनों का निर्णय मुझे सही लगा .....

किसी ऐसे मनुज के साथ रहना जिंदगी भर ; जो ना स्त्री हो और जो ना पुरुष हो .......


         हमेशा हमें अपने सहनशीलता को खुद के लिए तौलते रहना चाहिए ...... क्षमता के अनुसार ही सहना चाहिए


दवा जानलेवा

डेढ़ साल पहले एस्प्रिन सेवन से मेरे बड़े भैया की बहुत हालत खराब हुई थी ..... खून इतना पतला हो गया था कि शरीर से बाहर बहने लगा था ।
                जिन्हें हाई bp होता है उन्हें ऐसी दवा दी जाती है जिनसे उनका खून पतला रहे ताकि हर्ट प्रॉब्लम ना हो ।
            मेरी सहेली के जेठ की मृत्यु हो गई । उनका खून इतना पतला हो गया कि दिमाग पर असर कर गया , जिसे सम्भाला नहीं जा सका ।
डॉ से नियमित जांच हर के लिए जरूरी है 
          जिंदगी में लापरवाही खुद के लिए हानिकारक होने के साथ आप अपनों को भी चोट पहुंचाते हैं 

Saturday, 20 June 2015

हाइकु








हाइकु के नियम बहुत पहले से थे
मुझे जानने में देरी हुई

विशेषण का प्रयोग ना हो
दो हिस्सों में दो बिम्ब स्पष्ट हो
प्रकृति का मानवीकरण ना हो
पांच इन्द्रियों से जो हु ब हु अनुभव हो उसका ही वर्णन हो


Friday, 8 May 2015

विवाद और बहस

पक्ष विपक्ष हर बात का होता है
नजरिया सबकी अपनी अपनी
सोच समझ जो होती अपनी अपनी
ग्रहण करने की क्षमता जो होती अपनी अपनी
विवाद हो बहस हो लेकिन बात पर हो
लोग बात से हट व्यक्तिगत
आरोप प्रत्यारोप पर उतर
मंदबुद्धी के परिचय देने में
जुझारु हो जाते हैं
 अपने अपने समझ के सिरे से
सोच सार्थक रखना वो भी सच्ची
चलो सही है लेकिन आत्ममुग्ध हो
सामने वाले को सिरे से नाकार देना
सारे आविष्कार एक सोच से ही सम्भव रहा क्या ?
वाद-विवाद बहस हमेशा से जरुरत रही है
100% आप अपने को सही समझे
सामने वाला भी तो अपने को 100% सही समझेगा
आप अगर गलत नहीं हैं तो वो कैसे गलत होगा
+ + मिलकर + ही होता है
सोच तो सकारात्मक हो
हम विवाद और बहस से क्यों भागते हैं। … हमारे पास तर्क नहीं होता है या हम दूसरे की बात को अपनाने में अपनी बेइज्जती समझते हैं। … कहीं हमें कोई अल्पज्ञानी ना समझ बैठे। … डर हमें सही बात को भी अपनाने से रोकता है। …
जब मैं BEd की पढ़ाई कर रही थी तो एक क्लास होता था जिसमें सभी को कुछ सुनाना होता था। …। जब एक लड़के की बारी आई तो वो सुनाया
पत्थर पूजन हरी मिले
तो मैं पूजूं पहाड़
या तो भली चक्की
 पीस खाए संसार
मेरी भी बारी आई। … मैं भी सुना बैठी
कंकड़ पत्थर जोड़ के
दिए मस्जिद बनाये
ता पे मुल्ला बांग दे
बहिरा हुआ खुदाई
पूरी कक्षा पहले तो एन्जॉय किया फिर बहस शुरू हुआ लगा मानो हिन्दू मुस्लिम युद्ध हो जाएगा
मुझे सीख मिला अपने गुस्से पर हमेशा नियंत्रण रखना चाहिए  …।

Monday, 27 April 2015

भूकंप


परसों सुबह सुबह बहुत खुश थी ..... 
चारों ओर हरियाली अपने बगीचे में देख कर ....


उड़ी उदासी
पतझड़ की पाती
ठूंठ गुलाबी।

लेकिन दोपहर होते होते ख़ुशी हवा के संग हवा हो गई। …

ढहे मकान
ताश पत्ते बिखरे
भूडोल चीखी।


नेपाल केंद्र रहा भूकंप का लेकिन हिन्द के आधे भाग भी अछूते नहीं रहे तो ….. मुझे भी अनुभव रहा ….

मौत का खौफ
शोर चीखता जोर
भू डोलती ज्यूँ

या कुछ ऐसा

मौत का खौफ
जीव भोगे यथार्थ
भू कांपती ज्यूँ

सभी भगवान को दोष दे रहे …..

सृष्टि खंजर
क्रूरता का मंजर
खाक गुलिस्ताँ 

तो कुछ ….इंसानी पाप का फल समझ रहे हैं ….. मुझे लगा

भूडोल चीखी
स्त्री कुचली सताई
बिफरी मौन

मेरे एक फेसबुक के मित्र को लगा

Tushar Gandhi जी

tremors
even after earthquake-
Parkinson’s


anuvadit rachana Vibha Shrivastava ji ke sahayog se…..

भूडोल चीखें
तामसी थरथरी/थरहरी
पार्किंसनस।

Sunday, 12 April 2015

बुढ़ापा





पिता जैसा बनना ..... हर लडकी का सपना ..... लक्ष्य निर्धारित किया अपना ....
संयुक्त परिवार विलीन नहीं हो सकते हैं
रफू का गुण सीखो रिश्ते रफ़ू से ही चलते हैं ..
.
बुढापे पर बात चली है ... और मैं उम्र गुजारते उस पडाव पर आने वाली हूँ .... बीच की पीढ़ी हूँ ..... कई सीढ़ी चढ़ चुकी हूँ .... कई घरों को बनते ,बिगड़ते देखने की पूंजी है मेरे पास .... 
घर संस्कारों से बना होना चाहिए .... नई पीढ़ी ,अगर पुरानी पीढ़ी को ,अपने बुजुर्गों का अहमियत देते देखी होगी तो वो जरुर सीखेगी ....
=
कुछ दिनों पहले चंडीगढ़ की यात्रा थी
हम बुजुर्गों के टोली में बैठे
चर्चा कर रहे थे बुढापे पर
मेरा कहना था … बुढ़ापा यानि बिछावन लेटा शरीर
अगर हम दो रोटी सेक कर खिला सकते हैं तो बुढ़ापा कैसा ?
हमसे पहले की पीढ़ी में 10 से 20 साल की उम्र में शादी हुई
40 साल में सारी जिम्मेदारी पूरी और दादी नानी बन गुजर गई जिन्दगी
आज 30 से 35 साल की उम्र में शादी होती है
50 से 55 की उम्र गुजर गई जिम्मेदारी में
अपने लिए अभी तो जीना शुरू किये। ....
बच्चों को पंख मिले उन्हें उड़ने दो। ...
बनाने दो खुद से खुद के लिए नीड़
पालने दो खुद के छौने
मत जिओ केवल बन दादी नानी
जब शरीर बिछावन पर जाएगा
एहसास कहाँ होगी , कहाँ पड़े हैं

अस्पताल या वृद्धाश्रम या गली के सडको पर
=

Friday, 3 April 2015

हाइकु


रोज गार्डन चंडीगढ़

आठ सौ पच्चीस तरह के गुलाबों के बीच हमारी गोष्ठी

विभिन्न विषयों के साथ हाइकु पर भी बातें हुई
कुछ लोग बहुत ही अच्छा लिखना जानते हैं।


मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था
 कि ये कनैल का वृक्ष है ....

कनेर कला
स्वर्ण हँसी बिखरे
हरे घर में।
==


1
नभ को छूते
आओ सखियाँ कूदें
रुढी को तोड़ें।
2
पद्मा बनती
लक्ष्मी आस बांटती
पैसों की पौद ।
3
नव लें साँसें
निशीथ स्त्री जीवन
तरणी आस।
4
आँगन पौधे
दुरुक्ति चटखारे
समय राग।
5
आँख मिचौली
रवि मेघ के संग
चीड बिचौली।
6
कुलाचें , चुस्की
ग्रीन टी मेघ लेता
गिरि खंगाले ।
7
पढते छौने
सुस्ती मिटाये चुस्की
पौ फटते ही। 
8
आकुल सिन्धु
उफने क्रोधी उर्मी
बेवश घन/वाणी।

=

Thursday, 12 March 2015

हाइकु


1
वीर हँसते
जिन्दगी ज्यूँ छेड़ती
भीरु रो लेते ।

2
वसंत शोर
रवि-स्वर्णाभा-होड़
पीले गुच्छों से।

3
असार स्वप्न
भस्म हुई उम्मीदें 
धुँआ जिन्दगी ।

4
दुःख व हंसी
जिंदगी की सौगातें
रूप सिक्के के ।

5
पद के मद
आंगन में दीवारें
घर कलह।

6
घर कलह
बरसे रिश्तों पर 
बेमौसम सा।

7
अँक हो तंग 
मिटे जलन जंग
स्नेह बौछारें ।

8
मेघों की टोली
लाये रंगीन डोली
महके बौर 

=

छाँव का स्थायित्व और अवहित्था

https://www.facebook.com/share/r/18WzEZJakd/?mibextid=wwXIfr बरगद के विशाल वृक्ष का तना लाल-सुनहरे धागों से भरता जा रहा था। पूजा की थालियों ...