Wednesday, 31 August 2022

'मुट्ठी में सृष्टि'

कैलिफोर्निया की रात्रि के आठ बज रहे थे तो ठीक उसी समय भारत की सुबह के साढ़े आठ बज रहे थे। एक घर में वीडियो कॉल पर बातें चल रही थी..

"भैया की तबीयत अब कैसी है?"

"दस बजे सिटी स्कैन होने जाएगा तो पता चलेगा कि कितनी चोट है..!"

"क्या बिना हेलमेट लगाए मोटरसाइकिल चला रहे थे कि सर में चोट लगी?"

"घर के नजदीक ही.."

"माँ! आप हमेशा उनके गलत पक्ष को ढ़कने की कोशिश करती रहती हैं..। खैर जैसा भी रिपोर्ट आये, बिना देर किए आपलोग दिल्ली पहुँचने की कोशिश करें..।"


दृश्य दो

सिडनी के मध्याह्न के एक बज रहे थे और भारत की सुबह के साढ़े आठ बजे वीडियो कॉल से बात हो रही थी... उसी परिवार में अन्य से वीडियो कॉल पर बातें हो रही थीं...

"रात में, वर्षा और पावर कट की स्थिति में तथा शहर के जख्मी सड़क पर निकलना ही नहीं चाहिए था। ऐसी स्थिति में असावधानी हो जाना स्वाभाविक है..!"

"मेरी बात सुनता कौन है..!"

"आप चिन्ता ना करें सब ठीक हो जाएगा हम आ रहे हैं।"

दृश्य तीन

अमरीका की रात्रि के साढ़े आठ बज रहे थे और सिडनी के मध्याह्न के डेढ़ बज रहे थे और वीडियो कॉल में बात चल रही थी...

"तू अपने ऑफिस से छुट्टी ले घर जा तैयारी कर और एयरपोर्ट पहुँच। मैं तेरी टिकट कटवाकर तुझे व्हाट्सएप्प पर भेज और मेल करता हूँ।"

"और आप भैया?"

"मैं भी अपनी टिकट लेकर पहुँच रहा हूँ। लगभग एक समय ही हम सभी दिल्ली पहुँचेंगे..!"

"दिल्ली में मदद मिल सके.. व्हाट्सएप्प और फेसबुक के समूहों में हमें अनुरोध का पोस्ट बना देना चाहिए..!"

Saturday, 27 August 2022

छिपा रूस्तम

 

मेरे देवर का बेटा तीन दिन से दुर्घटनाग्रस्त होकर गहन चिकित्सा विभाग में भर्ती था। आज लगभग साढ़े चार बजे हम पुनः गहन चिकित्सा विभाग के सामने उपस्थित थे लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली शीशे के पार देखने की। वहाँ पर अफरातफरी मची हुई थी। एक बुजुर्ग लाये गए थे जो जहर खा लिए थे। अब खा लिए थे या खिला दिया गया था.. यह हमें पता नहीं चल पाया क्योंकि हमने किसी से पूछताछ नहीं किया। बुजुर्ग को देखकर एक महिला बोली कि, "मेरे घर के गेंहूँ में कीड़ा लग रहा था उसमें दवा डालने के लिए खरीदने गयी तो मुझे दवा नहीं मिली। लौटकर दो पुरुषों को लेकर गयी तब भी दवा नहीं मिली। इन्हें जहर कहाँ से और कैसे मिल गयी?"

"इतने बुजुर्ग को मिल जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। आश्चर्य की बात है इनके साथ आये सभी युवा इनके गाँव के हैं। इनमें से कोई बुजुर्ग के घर का अपना नहीं है।" परिचारिका ने कहा।

थोड़ी देर में बुजुर्ग के घर से लोग आ गए।

"यह दस हजार रुपया रख लीजिए, पुलिस को सूचना नहीं दीजिएगा..," बुजुर्ग के घर से आये युवक ने कहा।

"मुझे रुपया देने की आवश्यकता नहीं। मैं परिस्थिति समझ रहा हूँ। आपलोग निश्चिंत रहिए मैं पुलिस को नहीं बुला रहा हूँ।" अस्पताल प्रबंधक और चिकित्सक ने एक स्वर में कहा।

"गहन चिकित्सा विभाग में ऐसे लोगों को नहीं रखना चाहिए जिनके शरीर से जहर निकालना हो अन्य रोगियों को परेशानी होती है। जल्दी से हटाइये।" गहन चिकित्सा विभाग में भर्ती अन्य रोगियों के रिश्तेदार आपत्ति जताने में शोर मचा रहे थे।

"आपलोग शान्ति बनाये रखें। बुजुर्ग की मौत अस्पताल आने के पहले ही हो चुकी थी। यहाँ जहर निकालने की प्रक्रिया नहीं की गयी हैं।" गहन चिकित्सा विभाग के पहरेदार ने कहा।

"फिर साढ़े आठ हजार किस बात की ली गयी है?" भीड़ में से किसी ने फुसफुसाया।

Saturday, 20 August 2022

चौमासे का गोबर

"बहुत-बहुत बधाई हो! तुम्हें काव्य में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।"

"वो तो मिलना ही था..! बहुत वर्षों से दिन-रात इसके लिए मैं मेहनत कर रहा था...।"

"मुझसे बेहतर और कौन जान सकता था तुम्हारे द्वारा किये गए मेहनत को?"

"क्या अब भी तुम्हें शक़ है? हमारे गाँव में चिकित्सा की स्थिति बहुत बुरी थी। अपने पुरखों के जमीन पर चिकित्सालय बनवाया...,"

"और उसमें तुम्हारे द्वारा लायी चिकित्सक, तुम्हारी पत्नी  बन गयी..?"

"गाँव में शिक्षा की स्थिति सुधारने के लिए मुझे कितनी भाग-दौड़ करनी पड़ी इसके गवाही दोगे न?"

"भाग-दौड़ की गवाही जरूर दूँगा। शिक्षिका के संग तुम्हारे लिव इन का भी तो गवाह हूँ।"

"शहर जैसा गाँव में बाजार, सड़क, बिजली की व्यवस्था करवाने में मेरा जो खून-पसीना बहा उसके बारे में भी तो कुछ कहो...!"

"कितनी कन्या-बालिका-स्त्री-महिला लापता हैं? केंद्र में कौन है? उसके हिसाब के लिए ही तुम कारागार में हो। क्या सदैव कारागार से कृष्ण बाहर आते हैं?"

Wednesday, 17 August 2022

ज्वालामुखी

कुमार संभव जी की शानदार लघुकथा- "हर दिल तिरंगा"

उस छोटे से बच्चे की खुशी का कोई पार नहीं था। बड़ी मुश्किल से उसे एक तिरंगा मिल पाया था। आज वह भी अपने घर की छत पर तिरंगा लहराएगा।
तिरंगा लेकर घर की ओर दौड़ लगाते हुए उसके दिल में वे सभी जोशीले नारे उफन-उफनकर गूँज रहे थे जो पंद्रह अगस्त- छब्बीस जनवरी को उसके स्कूल में लगाए जाते थे, या कभी भारत मैच जीत जाता तो बस्ती के चौक पर पटाखों के साथ गूँजते थे, या पिछले साल उसके दोस्त के फौजी भैया के तिरंगे में लिपट कर आने पर गूँजे थे।
वह बस दोनों हाथों से तिरंगे के कोने पकड़े खुद भी ध्वज की तरह उल्लसित लहराता हुआ घर की ओर दौड़ रहा था।
नन्हे कदम थक तो जाते ही हैं, बस्ती से जरा पहले ढाबे पर वह पानी पीने रुका।
कुछ निगाहें भी उसके झण्डे की ओर लहरा गई।
"बब्बन मास्टर का लौंडा है ना ये?" ढाबे पर बैठे एक खास दल के नेता की आवाज उठी।
"हाँ। कमबख्त मास्टर खुद तो दोजख में जाने के काम कर ही रहा है, औलाद को भी वहीं धकेल रहा है।" एक दाँत पीसता सा छुटभैया स्वर उभरा।
"मालिक के सिवा हमारी कौम का सिर कहीं और नहीं झुकेगा। मारो साले को...!" इस बार आवाज कुछ ज्यादा हौलनाक थी।
वे उठते, इससे पहले दूसरी ओर से आवाजें शुरु हो गईं।
"बब्बन मास्टर का छोकरा है ना ये?" दूसरे कोने पर बैठे एक अन्य विशेष दल के नेता की आवाज आई।
"हाँ, तभी तो बेगैरत जानबूझकर तिरंगे को उलटा लहरा रहा है।" एक आवाज उठी।
"इनकी तो ख्वाहिश ही यही है कि 'हरा' सिर पर नाचे।" फिर एक दाँत पीसता सा छुटभैया स्वर उभरा।
"देशद्रोही... गद्दार... मारो साले को!" बिलकुल पहले के जैसी हौलनाक आवाज आई।
उनमें से कोई भी कुछ कर पाता इससे पहले बीच में बैठे कुछ बस्तीवासियों ने उनकी गर्दनें दबोची और बाहर का रास्ता दिखा दिया।
"हिन्दुस्तान जिंदाबाद।" बच्चे के दिल में गूँजता नारा होंठों पर आ गया। वह फिर उसी जोश के साथ दौड़ पड़ा बस्ती के आखिरी घर पर भी तिरंगा लहराने वाला था।


"आप बाजार जा रहे हैं तो नीला रंग लेते आइयेगा।" नीले रंग की खाली शीशी पकड़ाते हुए हिना ने अपने बड़े भाई अनस को कहा।

"वो नीला रंग की बड़ी शीशी पड़ी तो फिर और रंग क्यों मंगवा रही है।" अनस ने कहा।

"हमारे स्वभाव की तरह उनदोनों रंगों में फर्क है।" हिना ने कहा।

"तो क्या हुआ! थोड़ा सफेद रंग मिला लो काम चल जाएगा।" अनस ने कहा।

"माँ-पापा के बहुत प्रयास के बाद भी हम एक जैसे कहाँ बन पा रहे हैं। बहुत कोशिश की थी। स्वाभाविक रंग नहीं बन पा रहा है।" हिना ने कहा।

"इतनी भीड़ में क्या पता चलेगा...!" अनस ने कहा।

"आप कहना चाहते हैं कि भीड़ में दो चार बच्चे उलटा झंडा पकड़ ले सकते हैं...! बदले रंग पर ज्यादा नजरें गड़ती हैं।" हिना ने कहा।

"मेरे कहने का यह अर्थ नहीं था।" अनस की आवाज में झल्लाहट थी।"

"जिस-जिस बच्चे के हाथ में अलग रंग के अशोक चक्र वाला तिरंगा जायेगा, उस-उस बच्चे का एक समूह बन जायेगा। फिर आकाश, महासागर और सार्वभौमिक सत्य को दर्शाते प्रतीक के रंग में ही समझौता मैं क्यों करूँ..!" हिना के स्वर चिन्ताग्रस्त होना बता रहे थे।

Monday, 8 August 2022

प्रत्याक्रमण

"अरे! मेरी प्यारी सखी! लक्ष्मी क्या तुम तो कुबेर हो गयी। अलग-अलग राज्यों के अनेक शहरों में तुम्हारे नाम से फ्लैट और उन फ्लैटों के कैश में अनेकानेक करोड़ रुपए, भारी मात्रा में सोना-हीरे के आभूषण, अनेक संपत्तियों तथा तुमदोनों आरोपियों के संयुक्त स्वामित्व वाली कई कंपनी के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। कौन विश्वास करेगा कि तुम भोली हो तुम्हें कुछ मालूम नहीं था?" प्रेमलता ने कहा।

"मेरी सहेली जो पूछ रही है उसका जबाब दो रवि.. तुमसे प्यार करने के बदले मुझे जेल जाने का उपहार मिला..।" अमृता ने कहा।
"मेरे साथ इंद्रधनुषी जीवन बिताने में क्या तुम्हें आनन्द नहीं आता था!" रवि ने कहा
"महोदय-महोदय-महोदय! एक बार एक लड़के ने एक सांप पाला, वो सांप से बहुत प्यार करता था उसके साथ ही घर में रहता .. एक बार वो सांप बीमार जैसा हो गया उसने खाना खाना भी छोड़ दिया था। कई दिनों तक उसने कुछ नहीं खाया तो वह लड़का परेशान हुआ और उसे पशु चिकित्सक के पास ले के गया .. चिकित्सक ने सांप का मुआयना किया और उस लड़के से पूछा "क्या ये सांप आपके साथ ही सोता है ?" उस लड़के ने बोला हाँ .. चिकित्सक ने पूछा आपसे बहुत सट के सोता है ? लड़का बोला हाँ ...
चिकित्सक ने पूछा "क्या रात को ये सांप अपने पूरे शरीर को फैलाने की कोशिश करता है..?"
ये सुनकर लड़का चौंका उसने कहा हाँ  .. यह रात को अपने पूरे शरीर को बहुत बुरी तरह फैलाने की कोशिश करता है और मुझसे इसकी इतनी बुरी हालत देखी नहीं जाती ,, और मैं किसी भी तरह से इसका दुःख दूर नहीं कर पाता..।
चिकित्सक ने कहा .... इस सांप को कोई बीमारी नहीं है ... और ये जो रात को तुम्हारे बिल्कुल बगल में लेट कर अपने पूरे शरीर को फैलाने की कोशिश करता है वो दरअसल तुम्हें निगलने के लिए अपने शरीर को तुम्हारे बराबर लम्बा करने की कोशिश करता है... वो लगातार यह परख रहा है कि तुम्हारे पूरे शरीर को वो ठीक से निगल पायेगा या नहीं और निगल लिया तो पचा पायेगा या नहीं..। आप तो वही सांप निकले...!"
"अपने औकात में रहिए। आप अमृता की सखी हैं। कुछ भी कहने का अधिकार नहीं पा जाती हैं...!" रवि जोर से चिल्लाया

"तुम देशद्रोही थे ही मुझे भी लपेटे में ले लिए?" अमृता ने कहा
"क्या तुम्हें पता नहीं था कि किंग कोबरा ही घोंसला बनाता है।" रवि ने कहा।
"उसको भी नेवले की धुलाई सहनी पड़ती है। कान खोल कर सुन लो जिसे आस्तीन में साँप पालने का जिगरा होता है उसे पहले से जहर का काट सीखना पड़ता है...।" अमृता ने कहा

Wednesday, 6 July 2022

सूक्ष्म स्थूल

अब वह जीवन के सन्ध्या में आ पहुँचा था। युवावस्था से उसके निजी जिन्दगी में खिजा ही छाया रहा क्यों कि पत्नी बिना तलाक लिए अलग रह रही थी। पत्नी को सन्देह था कि उनके इर्दगिर्द रहने वाली महिलाओं से उसके पति का गलत सम्बन्ध था जबकि उन महिलाओं का कहना था कि उतनी सुरक्षित तो कभी रहती ही नहीं। उसके घर में पल रहे पक्षी को बिल्ली झपट्टा मार दी बिल्ली को पालतू कुत्ता रपेट दिया। कुत्ता स्वाभाविक रूप से दम तोड़ दिया। अचानक से आये प्राकृतिक प्रहार से उसके घर में सुनामी आ गया था।
अपने बेहद करीबी को प्रतिदिन अपने घर बुलाने लगा जिसे सदा हिन्दी में लिखने के लिए प्रेरित किया करता था..। सैकड़ों छोटी-बड़ी बात उससे साझा करता। किसी दिन घर से भागी लड़कियों पर चर्चा करता, मतलब उसका मानना था कि घर से भागी लड़कियाँ सैकड़ों बार अपनी डायरी और अपने सपनों में भागी होती हैं।

किसी दिन वह कहता कि वह अत्यधिक प्रेम से ऊब जाता है..

किसी दिन किस्सा सुनाता कि कैसे उसे अपनी करीबी मित्र से प्यार हो गया था लेकिन बस इकतरफा वह महिला तो अपने पति के प्रति वफादार थी।

"अच्छा! आप यह बताइये कि यह जो आप महीनों से मुझसे जो बातें साझा कर रहे हैं उसके पीछे उद्देश्य क्या है?"

"यह बातें मेरे दो-चार करीबी जान समझ रहे हैं। वे लोग या तो हिन्दी, मैथली, अवधि, या भोजपुरी में लिखेंगे। तुम ही एकमात्र हो जो इन्हें अंग्रेजी में लिखोगे।"

Tuesday, 5 July 2022

रंगरेज


अनेक ऋतुओं के गुजर जाने के बाद वरुणा, अस्सी और गंगा की वर्चुअल गोष्ठी चल रही थी। वरुणा जहाँ अपने घाट के अनुभव साझा कर रही थी तो वहीं अस्सी, अपने घाट के।

"आज विपक्ष के एक प्रसिद्ध नेता इस नश्वर संसार से मुक्त हो गए,  गाँव में रह रही पत्नी को आस-पास वालों ने शायद खबर भी नहीं दी होगी। घाट पर लिव-इन रिलेशन वाली आयी थी।"

"वो लिव-इन रिलेशनशिप वाली पहले से विधवा थी न? इस घाट पर लिव-इन रिलेशनशिप वाले विधुर मुक्त हो गए। विधुर की लिव-इन रिलेशनशिप वाली अपने पति को बिना तलाक दिए तथा अपने दो बच्चों तथा उनके दो बच्चों के संग रहती थी।"

"आजकल के बच्चे ज्यादा संवेदनशील हो रहे हैं...," गंगा की कसकती चुप्पी टूटी।

"उन्हें भी तो... शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन में रहना क्या गुनाह नहीं है..!"

"पहले लिव-इन रिलेशनशिप वाली को ही #$#$#... कहा जाता था न...! ...उच्च कुलीन वर्ग आधुनिकता में अपने सुविधानुसार मुग्ध शब्दों की चाशनी में नए रिश्तों की परिभाषा का सृजन करती रहती है।"


Monday, 4 July 2022

'साहित्यिक आयोजन को जलसा क्यों बनाना'

 

[03/07, 3:48 pm] १७९९९/२०२१ : म ग स म का १२ वाँ स्थापना दिवस समारोह,

दि ०-०३-०७-२०२२ ई ०.

सत्र - ०२,

समय - ०२-०४ बजे तक,

विषय - साहित्यिक आयोजन में आने वाली मुश्किलें और समाधान,

°°

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है । रामधारी सिंह दिनकर सत्ता के भी करीब थे और जनता के भी। वे राष्ट्रकवि के साथ-साथ जनकवि भी थे।

कभी किसी समयोचित अवसर पर दिनकर ने कहा था :-

*'जब-जब सत्ता लड़खड़ाती है तो सदैव साहित्य ही उसे संभालती है'*

सत्ता को संभाल लेने वाली साहित्यिक-आयोजन के लिए अनुदान हेतु सत्ता की ओर ही टकटकी लगाना और हाथ फैलाना पड़े तो गाँधी जी को मेज के नीचे से हस्तांतरित भी करना पड़ता है और आयोजन में किसी मंत्री को अध्यक्षता देनी पड़ती है। मुख्य अतिथि में बुलाना पड़ता है। अब मंत्री जी को जनता हित को छोड़ बाकी सभी कामों की व्यस्तता होती है। एक से डेढ़ घण्टे विलम्बकर और अपने लावलश्कर के संग पधारेंगे। आवभगत करवायेंगे। बात-बात में अपनी व्यस्तता जतायेंगे और मात्र दस से पंद्रह मिनट या ज्यादा से ज्यादा आधा घण्टा ठहर गायब हो जाएंगे।

जो वरिष्ठ साहित्यकार समय या समय के पहले से पधार कर ठगे से स्तब्ध रह जाते हैं । उनका हुआ यह अपमान क्यों सहन किया जाए।

°°

म ग स म से उदाहरण में सीखा जा सकता यही नहीं होता।

संस्था ने विभिन्न शहरों के मोती  के नाम से बहुत सारे प्रकाशन किया। लगभग तीन लाख रुपय की पुस्तकें प्रकाशित की गई ।

उनके सभापति, कुछ स्थाई सदस्य, कुछ पदाधिकारी, कुछ गुमनाम साथियों की वजह से यह संस्था चल रही है।

लगभग 6 साल से लेख्य-मंजूषा  पंजीकृत संस्था की संस्थापक अध्यक्ष हूँ। सदस्यों के सहयोग से प्रत्येक महीने गोष्ठी और त्रैमासिक पत्रिका , वार्षिक पुस्तक, त्रैमासिक आयोजन वार्षिकोत्सव आयोजन होता जा रहा है।

अर्थ के आधार पर ही आयोजन की रूपरेखा बन जाती है और सफलता और असफलता की निर्भरता भी तय ।

स्थल चयन, संचालन - संयोजक आयोजक के कौशल पर निर्भर करता है तो उनका चयन संस्था के अध्यक्ष के अनुभव को परखने का मौका।

साहित्य प्रेमी तो अपने घर में भी कुशलतापूर्वक साहित्यिक आयोजन कर रहे हैं। घर में शादी का सालगिरह हो, बच्चों का , पति/पत्नी का जन्मदिन हो। 

आयोजन में अर्थ का व्यय कंजूसी से नहीं बल्कि मितव्ययिता से कैसे हो इसका पूरा ख्याल रखना चाहिए।

यह ना हो कि दिखावे में ज्यादा राशि उड़ जाए। साहित्यिक कार्यक्रम जलसा बन जाये। अतिथियों को आने-जाने का किराया देने में, होटल में ठहराने में, नगद राशि देने में भारी रकम खर्च हो जाये।

साहित्य व्यापारी होना है या साहित्य प्रेमी/सेवक होना है, निर्णय करने का वक्त मुकर्रर है...

°°

 १७९९९/२०२१

Saturday, 2 July 2022

मार्गदर्शन


"आप क्या सोच रहे हैं पिताजी?"पिता को बड़े गम्भीर मुद्रा में घर के बाहर बैठा देखकर पुत्र ने पूछा।

"देखिए काले बादल ने रवि को छुपाकर दिन को ही रात में बदल डाला है। घर के अन्दर चलकर बातें करते हैं। आप मुझे बताएँ कि आख़िर क्या बात है?" पुत्र ने पुनः पूछा।

"तुम्हारी माँ को किसी संस्था ने वाचस्पति पुरस्कार देने की बात किया है..," पिता ने कहा।

"अरे वाह! यह तो बेहद हर्ष और गर्व की बात है। और आप हैं कि यूँ चिंताग्रस्त बैठे हैं कि न जाने कौन सी बड़ी आपदा आन पड़ी। कोई पकी फसल में आग लग गयी या किसी फैक्ट्री गोदाम में...। मैं भी नाहक घबरा रहा था कि ना जाने क्या बात हो गयी।" पुत्र ने कहा।

"वाचस्पति पुरस्कार पाने के लिए तुम्हारी माँ को पन्द्रह से बीस हजार तक खर्च करने होंगे।" पिता ने कहा।

"बस! इतनी छोटी रकम! इतनी तो माँ घर के किसी कोने में रख छोड़ा होगा...। आपको घबराहट इस बात कि तो नहीं कि माँ अपने नाम में डॉक्टर लगाने लगेगी!" पुत्र ने कहा।

"इस पुराने अमलतास वृक्ष के कोटर में हवा के झोंके या खग-विष्ठा से उग आए बड़-पीपल को देखकर रहे हो! क्या बता सकते हो कि इससे प्र कृति को कितना लाभ होगा ?" पिता ने पुत्र से पूछा।

"..." निःशब्दता। पुत्र की चुप्पी ।

Friday, 1 July 2022

स्थापना दिवस समारोह

 

[30/06, 5:01 pm] सुधीर जी : *सभी आमंत्रित हैं

*स्वागत है आप सभी का

*३०/६/२२* सायं ५:०० से रात्रि ११:३० व्हाट्सएप्प पटल पर

*एक विशेष आयोजन*:*मगसम के १२ वर्ष* 

***

मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच(मगसम) को इस वर्ष स्थापित हुए 12 वर्ष होने को आए हैं, इस 12 वर्षों में संस्था से  जुड़े सदस्य और पदाधिकारी संस्था के इस लंबे से इतिहास के बारे में क्या सोचते हैं ? उन्हें क्या महसूस होता है? इस पर चर्चा विचार विमर्श किया जाएगा। सभी अपने विचार रख सकेंगे।

वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2022 तक हमने  साहित्य जगत से क्या कुछ खोया, हमने क्या कुछ पाया। इस  संबंध में चर्चा करेंगे।

संस्था के द्वारा इन 12 वर्षों में हजारों के संख्या में देश और विदेश के रचनाकार को *श्रोता और पाठक* के 📗📗आधार पर,उनके शहर गाँव,उन्हीं के जिले में जाकर सम्मानित किया गया है। सभी  सम्मानित रचनाकार अपने विचार आज इस पटल पर रख सकेंगे।

जिन साथियों के पास उन सभी  कार्यक्रमों की दस्तावेज व  फोटोग्राफ होंगे  उन्हें उसे पटल पर रखने का अवसर मिलेगा। अधिकतम 2 फोटो

बहुत सारी बातें होंगी। यह कार्यक्रम 30/6/22 को  सायंकाल 5:00 बजे प्रारंभ होगा और रात्रि 11:30 बजे तक चलेगा।

      इस पटल पर संस्था के 100 से अधिक रचनाकार सदस्य संपूर्ण भारत से हैं हम सभी को एक साथ इस भव्य कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करते हैं।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले :-

०१/ अनुराग

२०१७ से २०२२ की यादें

०२/ पुस्पेंदर

२०१५ से २०२२ की यादें

०३/ ज्ञांती सिंह 

२०१० से २०२२ की यादें

०४/ सुधीर सिंह सुधाकर 

२०१० से २०२२ की यादें

०५/ वीणा मेदनी 

     2017 से 2022 की यादें 

०६/निर्मला कर्ण 

        2020 से 2022

०१/अंजनी कुमार सुधाकर ०२/अनीता सोनी ०३/केशव चंद्र शुक्ला ०४/गीता सिन्हा गीतांजलि ०५/ज्योति तिवारी ०६/डॉक्टर भूमिका श्रीवास्तव ०७/डॉ रमा बहेड ०८/नवीन जैन ०९/नाथू लाल मेघवाल १०/मदन मोहन शर्मा सजल ११/मोती प्रसाद साहू १२/राजेश तिवारी मक्खन १३/रामबाबू शर्मा राजस्थानी १४/अरुणा रश्मि दीप्त १५/ वीणा मेदनी १६/ शिखा  अरोरा १७/ शिवालिका सिंह कुशवाहा १८/ शोभा पाठक १९/ सरला विजय सिंह सरल २०/ स्वर्ण ज्योति २१/ प्रशांत करण २२/ नरेंद्र परिहार २३/ अजय यादव २४/ अरुणिमा रेखा २५/ अर्चना जैन २६/ अल्पना नागर २७/ आशा जाकड २८/ आशा दिनकर २९/ आशा शर्मा ३०/ इरा जौहरी ३१/ उर्मिला श्रीवास्तव उर्मी ३२/ उषा जैन ३३/ उषा वर्मा वेदना ३४/ कमल किशोर कमल ३५/ कमल पुरोहित ३६/ कविता सिंह ३७/ किरण वैद्य कठिन ३८/ केवरा यदू मीरा ३९/ गिरीश चंद्र ओझा इंद्र ४०/ गीता चौबे गूंज ४१/ चंद्रकला भारतीय ४२/ ज्योति हरी प्रसाद श्रीवास्तव ४३/ डॉ सविता मिश्रा माधवी ४४/ डॉ शशि मंगल ४५/ डॉक्टर त्रिवेणी प्रसाद दूबे मनीष ४६/ डॉक्टर अनिता राज जैन विपुला ४७/ डॉक्टर ज्ञानचंद मर्मज्ञ ४८/ डॉक्टर मंजू रुस्तगी ४९/ डॉ सुधा चौहान राज ५०/ डॉक्टर सुशील शर्मा ५१/ दीप्ति सक्सेना दीप्त ५२/ नरेंद्र कुमार ५३/ नवीन मौर्य ५४/ निर्मला कर्ण ५५/ पुरुषोत्तम शाकद्वीपी ५७/ पूनम शर्मा स्नेहिल ५८/ प्रकाश राय ५९/ प्रवेश स्वरूप खरे ६०/ बी एल नायक ६१/ मधु अरोरा ६२/ मधु दायमा ६३/ योगिता चौरसिया ६४/ रमेशचंद द्विवेदी ६५/ राम हेतार मेघवाल ६६/ रेणु बाला धार ६७/ विद्या कृष्णा ६८/ विनीता निर्झर ६९/ विनोद कुमार हसोड़ा ७०/ विभा रानी श्रीवास्तव, पटना ७१/ शिल्पी भटनागर ७२/ श्रीमती कमल अरोड़ा ७३/ श्रीमती पुष्पा शर्मा ७४/ श्रीमती शशि ओझा ७५/ श्रीमती सरोज सिंह ठाकुर ७६/ रवि प्रकाश वोहरा ७७/ संध्या जावली ७८/ सुरंजना पांडे ७९/ सुशीला वसीटा दामिनी ८०/ स्वीटी गोस्वामी ८१/ मकसूद शाह ८२/हेमचंद सकलानी ८३/ सुषमा सिन्हा ८४/ सीमा गर्ग मंजरी ८५/ नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर ८६/ वीना आडवाणी तन्वी ८७/ अमिता रवि दुबे ८८/ सुधीर श्रीवास्तव ८९/ विनोद कुमार सिल्ला ९०/ नीरू मोहन बागेश्वरी ९१/ कालिका प्रसाद सेमवाल ९२/ सरला विजय सिंह सरल ९३/ डॉक्टर माधवी मिश्रा शुचि ९४/ कृष्णकांत दरौनी ९५/ राजेश्वरी जोशी ९६/ अरुणा अग्रवाल ९७/ विपुल माहेश्वरी ९८/ गीतांजलि वाष्णेय सुयांजलि 

संस्था के वे साथी जो अभी तक जोड़ नहीं पाए हैं । मंच संदेश संचालकों से निवेदन है कि अगर वह उन्हें जोड़ना चाहते हैं ,इस कार्यक्रम में अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें जोड़ें अपने-अपने पटल पर यह संदेशा छोड़ें 4:00 बजे तक उन्हें जोड़ दें।

*विशेष/*

राज्य सरकार द्वारा राजस्थान में कई शहरों में कई जिलों में इंटरनेट सेवा बाधित कर दी गई है इसलिए राजस्थान के कई शहरों से हमारा संपर्क टूटा हुआ है।

             अगर आज संध्या तक इंटरनेट सेवा बहाल नहीं होती है तो यह कार्यक्रम 4 जुलाई 2022 या फिर 7 जुलाई 2022 को पुनः जारी किया जाएगा ताकि राजस्थान के तमाम साथी हमारे इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।

अतः इस कार्यक्रम को पार्ट ०१ मान कर हम चलते हैं।

आज के कार्यक्रम के लिए सभी का स्वागत है सभी 4:50 पर कार्यक्रम में सम्मिलित हो जाने के लिए उपस्थित रहें।

अनुराग

[30/06, 5:01 pm] सुधीर माँपेरचना: *मैराथन साहित्यिक मंथन*

आज से हम उस कार्यक्रम का प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें साहित्यिक मंथन चिंतन का दौर चलेगा। यह कार्यक्रम 1 जुलाई 2022 से प्रारंभ होकर 15 जुलाई 2022 तक चलेगा।

[30/06, 5:02 pm] सुधीर माँपेरचना: आप सभी को जैसा कि ज्ञात  ही है। मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच की स्थापना वर्ष 2010 में 15 जुलाई के दिन की गई थी।

[30/06, 5:05 pm] सुधीर माँपेरचना: 5 साहित्यकारों को साहित्यिक समारोह में बुलाया गया लगभग डेढ़ हजार किलोमीटर की यात्रा कर कर जब वह दिल्ली पहुंचे तो उनको कार्यक्रम में मंच पर रचना पाठ करने का अवसर नहीं दिया गया।

     प्रेस दीर्घा में उस समय इस संस्था के सभापति जिनकी उम्र इस समय 96 वर्ष है जो इस समय कनाडा में हैं। तथा इस संस्था के राष्ट्रीय संयोजक भारतवर्ष सुधीर सिंह सुधाकर जी उस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

[30/06, 5:08 pm] सुधीर माँपेरचना: उस कार्यक्रम से उन 5 साहित्यकारों को इंडिया गेट लेकर पांच सदस्य पहुंचे सबने उन साहित्यकारों की रचनाओं का रचना पाठ का आनंद लिया उसके बाद भी रचनाकार ट्रेन से अपने शहर को वापस चले गए।

[30/06, 5:08 pm] सुधीर माँपेरचना: एक साहित्यकार की द्वारा एक साहित्यकार की इस तरह से  बेज्जती सभापति जी को बर्दाश्त नहीं हो और उसी क्षण उन्होंने सात ngo की मीटिंग बुलाई और मीटिंग के दौरान 2 घंटे के चर्चा विचार विमर्श के बाद मंजिल ग्रुप  साहित्यिक मंच का गठन कर दिया गया।

[30/06, 5:09 pm] सुधीर माँपेरचना: अगले सात दिनों तक इस संस्था के नियम शर्तें क्या हो इस पर भी चर्चा हुई और तब जाकर 15 जुलाई 2010 को इस संस्था का विधिवत निर्माण किया गया।

[30/06, 5:11 pm] सुधीर माँपेरचना: इस संस्था का पहला कार्यक्रम पटना बिहार में आयोजित हुआ जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय सभापति जी ने की थी।

    उस कार्यक्रम में सबसे पहली रचना मुंशी प्रेमचंद की बूढ़ी काकी कहानी पढ़ी गई थी। जिसे वहां उपस्थित 12 सदस्यों ने📒📒📒📒 पीला कार्ड भी दिया था।📗📗📗📗📗📗26 ने दिया था।📕📕📕लाल कार्ड किसी ने नहीं दिया था।

[30/06, 5:12 pm] सुधीर माँपेरचना: कार्यक्रम में जब हरा कार्ड की महत्ता को लोगों ने अच्छी तरह से जाना तो सभी ने मुंशी प्रेमचंद की रचना को हरा कार्ड ही देना चाहा पर जिन्होंने जो दिया था वही अंकित किया गया और आज तक वहीं अंकित है।

छाँव का स्थायित्व और अवहित्था

https://www.facebook.com/share/r/18WzEZJakd/?mibextid=wwXIfr बरगद के विशाल वृक्ष का तना लाल-सुनहरे धागों से भरता जा रहा था। पूजा की थालियों ...