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देवनागरी में लिखें

Sunday, 20 January 2013

समझा - बुझा - साँझा - माँझा करो



युवराज के ताजपोशी की
तैयारी शुरू होने पर है
होशियार में से
हो भी निकला हुआ है
ना पत्नी है ना बेटी ,
दर्द वो क्या जानेगा :(
मुन्ना को मिला झुनझुना समझा करो ...........


जब लगने लगा ,
इंतजार खत्म होने पर है
बेटी की मौत - शहीद की
कुर्बानी रंग लाने पर है
दिग्गजों में उठा-पटक
क्या गुल खिलाने पर है
अब तक जो होता आया है
वही होता रहेगा बुझा करो ..........

सबकी निगाह
फास्ट ट्रैक कोर्ट पर है
कुछ नहीं सोच-समझ में ,
कठोर कानून कब बनेगा 
क्या होगा शहीदों के
मान-सम्मान का , आतंकित है मन 
कब कब कब ,कितना ,
कौन जानता है ,साँझा करो ................

खुदा की लाठी बे-भाव पड़ेगी ,
 दम निकाल के छोड़ेगी ,
हम ये क्यूँ इंतज़ार करें ,
छोड़ो खुद की बातें ,
बातें प्यार की ,
जुटाओ हिम्मत ,
करो इन्कलाब की बातें ,
एक जलियावाला बाग
तब बना था ,एक हम बना दें ,
उनकी आत्मा को झंझकोर कर ,
अपनी-अपनी कर-कलम पर माँझा करो ......

10 comments:

  1. नियम है
    राजा का बेटा ही राजा बनता है

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  2. सबकी निगाह
    फास्ट ट्रैक कोर्ट पर है
    कुछ नहीं सोच-समझ में ,
    कठोर कानून कब बनेगा
    क्या होगा शहीदों के
    मान-सम्मान का , आतंकित है मन .... आतंकित मन होना स्वाभाविक है

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  3. सुन्दर भाव. लाठी से क्रान्ति ठीक नहीं पर कलम से क्रांति की ही जरूरत है.

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  4. अपनी-अपनी कर-कलम पर माँझा करो ......bahot acchche......

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  5. वाह: बहुत बहुत बढ़िया......

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