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देवनागरी में लिखें

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Saturday, 25 March 2017

स्तब्धता



झरता पत्ता-
क़ब्रों के बीच में मैं
निशब्द खड़ी

जीवन का अंत
या
जीवन का आरंभ
सबकी सोच अपनी अपनी
मापदंड होंगे न अपने अपने

Saturday, 18 March 2017

यूँ ही


ना लिखने से बेहतर है
थोड़ा थोड़ा लिखना

01.
डूबता सूर्य-
नाक से माँग सजी
सिंदूर लगा।
02.
इंद्रधनुष -
शादी में कुम्हारन
बर्तन लाई।

<><>



वय आहुति पकी वंश फसल गांठ में ज्ञान
जीवन संध्या स्नेह की प्रतिमूर्ति चाहे सम्मान
एक जगह रोपी गई दूजे जगह गई उगाई
बिजड़े जैसी बेटियाँ आई छोड़ पल्लू माई
किसी हिस्से फूल किसी हिस्से मिले शूल
छादन बनती विरोहण झेलती सहती धूल
डरे ना दीप हवा जो चले हथेलियों की छाया
डरे ना धी पिता कर माया जो आतंक साया
ससुरैतिन जलती, धुनी जाती जीना बवाल
दामाद क्यों नहीं जलाया जाता ससुराल
बेटी बॉस रहे बहु दास दुनीति बसे ख्याल


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कर्म
जी डूबे
शिखी नर्म
यादें तवाफ़
नवजात कर
कोंपल छुई-मुई
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क्यूँ !
छली
जी उठे
साँसें सार
मन रेशम
जीवन्तता नार
एहसास कोमल

Monday, 6 March 2017

*गिरगिट*



"हेलो ! भाभी हम दोनों  कुछ दिनों के लिए आपके घर आ रहे हैं । मेरे पति की तबीयत बहुत बिगड़ गई है"। मायना अपनी भाभी से फ़ोन पर बात की

"क्या हुआ आपके पति को दीदी ? आप जीजा जी को वहाँ के डॉक्टर को दिखला ली क्या" ? भाभी के चेहरे पर मनहूसियत छा गई , ननद की आने की खबर सुन कर

"हाँ हाँ ! भाभी वहाँ के डॉक्टर को दिखला चुके हैं । डॉक्टर बड़े शहर में दिखलाने के लिए बोला था तो हम कई दिनों से यहाँ आए हुए हैं । टेस्ट सब हुआ तो पता चला कि इनकी दोनों किडनी फ़ेल है और इलाज के लिए इसी शहर में ज़्यादा दिन रुकना होगा"।

"तो तुम्हारे पति के छः भाई भी तो इसी शहर में रहते हैं ? सुख दुःख अपनों के बीच ही काट ली जाती है"

"हाँ भाभी ! आप सही कह रही हैं ... सबों से बात करने के बाद ही आपको फ़ोन की हूँ ! इस उम्मीद में कि आपके घर में हमारे लिए ज़रूर जगह होगी ! ससुराल के इनके सभी भाई एक एक घर में रहते हैं । लेकिन मेरे भाई का चार मंज़िला हवेली है । कोई बता रहा था कि सभी तीन मंज़िलों के कमरे ख़ाली पड़े हैं" !

"अरे कहाँ से तुम गलत खबरें पा जाती हो ननदी  ? कुछ कमरे के लिए पेशगी ले चुकी हूँ । हमें तो क्षमा ही करो तुम"।

"क्यूँ भाभी कोर्ट में मिले हम क्या"?

"धत्त ! हमलोग घर में आपलोगों का इंतज़ार कर रहे हैं दीदी , जल्द आइयेगा प्यारी ननद रानी"।


Thursday, 23 February 2017

*न्याय*



कुलबोरन! कौन सी मनहुस घड़ी थी जो तुझे बियाह के लाए इस घर में !मेरे बंश के जान के पीछे पड़ी है । किस जनम का दुश्मनी निकालने के लिए इस जनम में आई । अपनी बहु को शब्दों के नश्तर चुभोती हुई भगमतियाँ अपने बेटे के पीछे पीछे भाग रही थी । बेटे के कमर में रस्सी बाँध पुलिस घसीटते हुए ले जा रही थी ।

मुशहर टोली की भीड़ जमा ! तरह तरह के लोग तरह तरह की बातें चल रही थीं । एक औरत आगे बढ़ कर बहु को झंझकोरते हुए बोली क्यों की तुम ऐसा ? देख अपनी सास की हालत , कई दिनों के बाद तो बेटा घर आया था और तूने पुलिस को ख़बर कर दी । पुलिस जाने कैसा उसके के साथ व्यवहार करेगी?

"क्या इन्होंने उस बच्चे को जान से मार कर ठीक किया था , जो अपने बॉल को लेने हमारे छत पर चढ़ गया था ?

Sunday, 19 February 2017

क्रमशः

Live with happiness not for happiness
जो है जितना है
उतना में ख़ुश होना
सीख लेना समझदारी है

रिसेल आज चिंतित हो गया, कई दिनों से एनी दिखलाई नहीं दे रही थी ।
दो सालों से नित प्रतिदिन दिन सुबह की सैर में भेंट होने से एनी और रिसेल में गहरी दोस्ती होने लगी थी । सुबह की सैर में अनमना रिसेल एनी के घर पहुँच call-bell दबाया । थोड़ी देर प्रतीक्षा के बाद दरवाज़ा खुला । दरवाज़ा खोलने वाला १८-१९ साल का ख़ूबसूरत नौजवान एनी का पुत्र था । आदर के साथ रिसेल को ड्राइंगरूम बैठा दिया। थोड़ी ही देर में एनी आ बताई कि वो अस्वस्थ थी , इसलिए सुबह की सैर में नहीं आ पा रही थी
आस पास से ही खाँसने की आवाज़ आई , रिसेल के प्रश्नवाची निगाहों पर ऐनी रिसेल को बग़ल वाले कमरे में ला अपने पति से मिलवा दी । एनी के पति को देख रिसेल स्तब्ध रह गया । एनी ३८-३९ साल की होगी तो उसका पति ७२-७३ साल वृद्ध बिछावन पकड़े।
क्यूँ की फ़ैसला शादी का इनसे जब उम्र का इतना फ़ासला था .. कमरे से बाहर आते हुए सवाल दाग़ ही दिया रिसेल ने ऐनी से
शादी हो रही है तब समझने की ना तो उम्र थी ना आस पास कोई विरोध करने वाला था .... बहुत अच्छे इंसान हैं मेरे पति!
इतने ही अच्छे इंसान हैं तो तुमसे शादी ही क्यूँ की .... पढ़ा लिखा कर तुम्हारे योग्य लड़के से करते शादी .... क्या कारण था कि ये तब तक शादी नहीं किए थे ये ख़ुद ?
अरे इनकी शादी हो चुकी थी ... मुझसे बड़े बड़े इनके बच्चे थे
तो अपने बेटे से ही शादी करवा देते समय आने पर!
समय की प्रतीक्षा करते और बेटा बड़ा हो पिता की बात मान ही लेता इसकी किस आधार पर उम्मीद की जा सकती थी ?
तुम इन्हें मिली कैसे और कहाँ ?
लड़कियों की तस्करी करने वालों के हत्थे से छूट कर इनके पनाह में पहुँची थी .... ये तब S.P. थे ... घर के कामों में सहायता करने लाए थे मुझे । . सारे घर के काम करने के बाद भी किसी न किसी बात पर इनकी पहली पत्नी और बच्चें मेरी धुनाई अच्छे से करते थे !
अभी सब कहाँ हैं और ये केवल यहीं पड़े रहते हैं ?
एक बार ये बहुत बीमार पड़े घर के किसी सदस्य ने इनकी सहायता नहीं की .. मेरी सेवा करने से ये इतने प्रभावित हुए कि मुझे सबसे दूर किराए के मकान में रखने का फ़ैसला कर डाला तब तक मैं माँ बनने की तैयारी में थी। ..  इनके साथ नहीं होती तो कहाँ होती ?


Thursday, 16 February 2017

मोक्ष



ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन
हेलो
कैसी हैं ?
बिलकुल ठीक ! :) आप सुनाएँ कैसी हैं ?
मेरी तो नींद ही उड़ गई ... मन बहुत खराब हो गया ...अब तो रात भर नींद ही नहीं आएगी
ओह्ह ऐसी क्या बात हो गई ....मुझे भी बतायें चिंता होने लगी है ....
 WhatsApp ग्रुप में एक पेपर का कटिंग आया है जिसमें खबर है कि दास जी लापता हैं। .... 
भला वो कौन है जिनको आज दास जी की खोज खबर चाहिए। ... केवल पैसे के लिए जिनकी जरूरत थी। ... वो रहे या ना रहे क्या फर्क पड़ता .... वो भी आज जबकि वे रिटायर्ड हो गये थे ... केवल पेंशन पर हैं ....आधा उन्हें मिल रहा था ...चौथाई मिलेगा ही ...वर्षों से नौकरों के भरोसे थे ....पत्नी साथ क्यूँ नहीं रहती थी ये उनका निजी मामला था ...समाजिक तौर पर उनकी मुक्ति से मैं खुश हूँ 

Tuesday, 14 February 2017

पुस्तक मेला + वेलेंटाइन डे





चित्र में ये शामिल हो सकता है: 6 लोग, लोग बैठ रहे हैं

पटना (बिहार) में पुस्तक मेला (चार फरवरी से चौदह फरवरी) और वेलेंटाइन डे सप्ताह भर संग संग


कोई भी स्वचालित वैकल्पिक पाठ उपलब्ध नहीं है.चित्र में ये शामिल हो सकता है: 2 लोग, लोग खड़े हैं

ठिठकी भीड़
कुम्हार चाक देख
पुस्तक मेला
रो रहा प्रकाशक
स्व स्टॉल खाली पाया

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 4 लोग, लोग खड़े हैं 

चहूँ ओर सत राग का शोर बड़ा
बता दो किनके गले में छाला पड़ा
हाँ तो गर्म दूध जिनके मीत ने पीया
कड़ा सवाल सुनते क्यूँ लकवा जड़ा

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दिवस प्यार –
उजड़ा बाग़ देख
रोया पड़ोसी
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पुस्तक मेला-
कुम्हार चाक संग
भीड़ ले सेल्फ़ी