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देवनागरी में लिखें

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Sunday, 15 July 2018

कहाँ_मिटती_भूख!




"मोटर साइकिल मिल गईल मुनिया" 
 थाने से छुड़ाये मोटरसाइकिल की सूचना पापा दे रहे थे... पापा के फोन रखते भाई को फोन लगाई " सब ठीक हो गया, अब देर रात घर नहीं लौटियेगा।"
"हाँ! सब ठीक हो गया... देर रात तब न लौटेंगे , जब मोटर साइकिल में बैटरी/इंजन और कुछ पार्ट-पुर्जा लगवा लेंगे।" फोन रख  यादों में डूबने लगी मुनिया, कुछ महीने पहले की बात है , रात ग्यारह बजे होंगे कि पापा का फोन आया उसके छोटे भैया को चाकू से गोद कर मोटर साइकिल छीन ले गये चोर... पौ फटते वह भागते हुए भाई देखने गई थी... ठीक होने के बाद छोटे भैया उस इलाके के चोरों के सरदार भाई जी को जाकर मिले और वह भाई जी ,अपने आदमियों से कह कर , रात में ही पूरी तरह सही सलामत मोटर साइकिल गाँव के स्कूल पर छोड़वा दिए... चुकिं चोरी गई मोटर-साइकिल पर एफ. आई. आर. लिखवाया गया था तो घर नहीं लाया जा सकता था । अतः गाँव के चौकीदार ने पुलिस को खबर किया पुलिस आकर मोटर साइकिल थाने ले गई...

Sunday, 1 July 2018

वक़्त


अर्चना चावजी जी 
पटना पहुँचने के लिए सफर में थीं तो मैं पटना से बाहर शादी में जा रही थी...
लेकिन समय ने तय कर रखा था कि हमारी भेंट होगी...




समय संग-संग क्या-क्या तय कर रखता है
एक ही दिन

पड़ोसन सुषमा जी का अपना राज्य/शहर छोड़ दूसरे राज्य के शहर में स्थापित होने जाना...

मेरी छोटी भाभी की तबीयत खराब होना...

सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए
सोच से शेरनी होना बेहद जरूरी है...
छूटता कोई काम नहीं...
बस निश्चय ही तो करना होता है...

Saturday, 23 June 2018

रिसता कोढ़




"यह कय्या सुन रहा हूँ अरूण जी ! थर्मल पावर, NTPC को दे दिया गया ?" भूतपूर्व महाप्रबंधक ने वर्त्तमान महाप्रबंधक से बात की।
"हाँ ! आप सत्य बात सुन रहे हैं... । चार साल से बंद जर्जर थर्मल पावर के जीर्णोद्धार के लिए आपकी पदस्थापना की गई थी... कभी।"
"मैं राँची जाने के लिए पटना स्टेशन पर रेल के लिए प्रतीक्षारत था कि ऑफिस से फोन आया कि आप तुरन्त चार्ज लेने पहुँचे... मैंने कई दलील दिया
-मुझसे कई लोग सीनियर हैं उनमें से किसी को भेजा जाए
-आज शुक्रवार है शनिवार रविवार को छुट्टी है सोमवार को चार्ज ले लेता हूँ
-महीने का आखरी ही है पहली से चार्ज लेना सही रहेगा...
    लेकिन मेरी कोई दलील नहीं सुनी गई , सुनी भी कैसे जाती पहले महाप्रबंधक को उनके रिटायरमेंट के आखरी दिन रिश्वतखोरी के इल्ज़ाम में सस्पेंड कर दिया गया था... मेरा जाना और चार्ज लेना अति आवश्यक बना दिया गया..."
    "आपसे सीनियर लोगों में वह काबिलियत नहीं थी जो आपमें दिखी , ईमानदारी का नशा ... गलत बातों को नहीं होने देना... जीर्णोद्धार के लिए जो फंड सरकार से मिला था उसके पाई-पाई को जीर्णोद्धार में ही लगाने का जज़्बा...।"
   "हाँ तभी तो जीर्णोद्धार के जंग खत्म होते-होते चुनाव आ गया... और खाने-कमाने के लिए मुझे वहाँ से निकाल फेका गया... बर्फ का सिल्ली है, सरकारी फंड... बीरबल ने अकबर को एक बार बतलाया था न।"

Friday, 15 June 2018

"वक्त का गणित"


चित्र में ये शामिल हो सकता है: वृक्ष, आकाश और बाहर

कलाकारी करते समय कूँची थोड़ा आडा-तिरछा कमर की और जरा सा दूसरे जगह भी अपना रंग दिखा दी... हाथी पर चढ़े, टिकने में टक टाका टक अव्यवस्थित ऐसे कलश को देख मटका आँख मटका दिया...
       कलश को बहुत गुस्सा आया उसके नथुने फड़कने लगे... अपने गुस्से को जाहिर करने के पहले उसने दूसरे से मशवरा करना उचित समझा और सखा दीप से सलाह मांगी,
    "ऐसे हालात में मुझे क्या करना चाहिए?"
दीप ने कहा कि "क्या कुम्हार तुम्हें याद है... ?"
    थोड़ी ही देर में पाँच सुहागिनें मटका में जल भरने आईं और जल भर ज्यों टिकाने लगीं , मटका का राम-नाम सत्य हो गया...

Tuesday, 12 June 2018

"सम्मोहन"


चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, बैठे हैं

सरंचना पुस्तक पढ़ने में मैं व्यस्त थी कि मोबाइल टुनटुनाया
"हेल्लो"
"क्या आप पटना से विभा जी बोल रही हैं...?"
"जी हाँ! आप कौन और कहाँ से बोल रही हैं... ? क्यों कि यह नम्बर अनजाना है मेरे लिए...!"
"मैं हाजीपुर से मीता बोल रही हूँ।"
"जी बोलिये किस बात के लिए फोन की हैं... मुझे कैसे जानती हैं यानी मेरा नम्बर आपके पास कैसे आया ?"
"एक विज्ञापन के बारे में मेरी साधना आंटी से मुझे पता चला, उसी में आपका नम्बर दिया हुआ था... फेक तो नहीं यही कन्फर्म करने के लिए मैं कॉल कर बैठी!" बेहद प्यारी मधुर आवाज और खनकती हँसी के साथ मीता बात कर रही थी...
"मुझसे बात हो रही है तो फेक नहीं , यह तो कन्फर्म हो गया... अब आप अपने बारे में बताइये... मुझे कॉल करने जा रही हैं कय्या आप अपने अभिभावक को बताई हैं... आपकी उम्र क्या है?"
"मेरी उम्र 22 साल है ! फेक का कन्फर्म करना था अतः मम्मी पापा को नहीं बता पाई हूँ...।"
"आपकी उम्र 22 साल है तो
-आपकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई होगी
-पढ़ाई पूरी नहीं हुई होगी तो शादी भी नहीं हुई होगी
-शादी नहीं हुई होगी तो अपने माँ बाप की बड़ी जिम्मेदारी हैं आप..."

"जी!जी! आप बिलकुल सही समझ रही हैं!"

- विज्ञापन देखी होंगी तो उसमें 30-40 उम्र सीमा तय है ,उसपर आपकी नजर जरूर पड़ी होगी... उस स्थिति में आपका फोन करना, आपको ही शक के दायरे में ला खड़ा किया... एक औरत होने के नाते हर लड़की के बारे में सोचना मैं अपना दायित्व बना ली हूँ... कोई बच्ची मकड़जाल में फँस ना जाये... इसलिए आपको भी कहती हूँ पहले पढ़ाई पूरी कीजिये... माँ बाप जो तय करें उसमें उनका सहयोग करें... "

"आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आप मुझे सही मार्गदर्शन दीं... आपकी बात सदा याद रखूँगी"

समाज की जो स्थिति हैं आपको दिख रही होगी... ऐसे में बिना अभिभावक की अनुमति लिए , किसी अनजाने नम्बर पर फोन करना... गम्भीरता से सोचने का समय निकालियेगा ,अगर सच में मैं फेक होती तो...?"

Tuesday, 5 June 2018

◆अपनी_बारी_खुशियों_से_यारी◆

05-06-2018

आज सुबह चार बजे आँख खुली तो कच्ची नींद जगी हूँ , ऐसा नहीं लगा... एक पल सोचने में लगा दिमागी अलार्म बजा क्यों... उठकर मोबाइल सर्च की तो पता चला देर रात सूचना आई थी संगनी क्लब में जाना है... पर्यावरण रैली में शामिल होने... साढ़े छ में पहुँचना है... रात में सोते समय दिमागी अलार्म अपना सेट हुआ... साढ़े छ में पहुँचने का मतलब पौने छ में घर छोड़ देना... दो ऑटो बदलना ,नियत स्थान पहुँचने के लिए... घर के काम क्यू में... सिंक भरा रात के झूठे बर्त्तन से, आम-लीची के दिनों में कूड़ा ,अपार्टमेंट में कूड़ा उठाने आनेवाला शहंशाह (कोई नियमित समय नहीं) सुबह का नाश्ता (गृहणी को घर से बाहर अगर जाना हो तो अतिथि भी आयेंगे) आज दही-चूड़ा से तो बिल्कुल नहीं चलेगा... कुछ स्पेशल बना देना... वो तो चना मूंग फूला/अंकुरित रहता है... आलू उबला रहता है... खीरा-आम का दिन तो फल की चिंता नहीं और तैयार चटनी आचार थोड़ा खटमिठी , तड़का , खीर ... आटा गूंधो... सारे काम निपटाते समय सोच रही थी दो बातें...
जब पापा चार बजे उठते थे तो मैं झल्ला जाती थी "ना चैन से सोते हैं ना सोने देते हैं , चार बजे से उठकर सारे घर को उठा देते हैं..." चापाकल का शोर ही इतना कर्कश लगता था...
 
जब महबूब चार बजे उठकर तैयार होता था कोचिंग और विद्यालय के लिए... "कब बड़ा हो जाएगा कब नौकरी में आ जायेगा तो तान कर लम्बी नींद खिचुंगी"...

Saturday, 26 May 2018

"उड़ान"





तालियों की गड़गड़ाहट से सारा हॉल गुंजायमान हो रहा था... आज के समारोह में पढ़ी गई सारी लघुकथाओं में  सर्वोत्तम लघुकथा श्रीमती रंजना जी की घोषित की जाती है... मुख्य-अतिथि श्री महेंद्र मिश्र(वरिष्ट साहित्यकार नेपाल) जी के घोषणा के खुशियों की लाली से रंजना सिंह रक्तिम कपोल लिए , दोनों हाथ जोड़े , मंच से नीचे आकर लेख्य-मंजूषा संस्था (पटना) के अभिभावक डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी के चरण-स्पर्श कर, अध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव के गले लग फफक पड़ी... विभा उनकी तरहखुशी से छलक आये आँसू को पोछते हुए एक कलम दवात का सेट पकड़ाते हुए बोली कि "याद है रंजना! कभी तुमने पूछा था , संस्था से जुड़ कर मैं क्या करूँगी दीदी...
"संस्था को श्रोता भी तो चाहिए न बहना..." दोनों एक संग खिलखिला पड़ीं...