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देवनागरी में लिखें

Saturday, 12 January 2019

"संतोष नहीं तो सुख नहीं'







#पटना_वाला_प्यार पुस्तक का लेखक ,"जीवन में कुछ फैसले इंसान खुद नहीं ले पाता है। उसे एक पुश की जरूरत होती है। कुछ यही हुआ इस बार के 'विश्व पुस्तक मेला,दिल्लीमें। मेरी पहली किताब को दिल्ली पुस्तक मेला में जगह मिला। सपना सच होने जैसा था। फिर मेरे प्रकाशक Samdarshi Prakashan के संपादक योगेश समदर्शी जी ने बताया वह मेरी किताब का लोकार्पण दिल्ली पुस्तक मेला में करवा रहे हैं। तो यकीन मानिए मेरे पास कोई शब्द नहीं थे। एकबार तो मन हुआ चला जाऊँ कैसे भी...!
पर बॉस से छुट्टी मांगने की हिम्मत नहीं हुई। फ्लाइट का टिकट भी देखा। फिर छोड़ दिया, सोचा डेढ़ घण्टे के कार्यक्रम के लिए कौन इतना खर्च करे? मैं भूल गया था, इतना बड़ा मौका मैं कैसे हाथ से निकलने दे रहा हूँ...।
   लोकार्पण वाले दिन दिल्ली से बड़ी दी Anupama Das का फ़ोन आया उसने समझाया इतना बड़ा मौका कैसे निकलने दे रहे हो। तुरंत निकलो एयरपोर्ट के लिए। मैं एयरपोर्ट के लिए निकला भी , लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। अब अफ़सोस के अलावा और कुछ नहीं बचा था...।"
"5 मिनट से ज्यादा समय नहीं मिलता.. तस्वीर खिंचवाने के संग शायद मंच से कुछ बोलने के लिए... उसके लिए इतना अफसोस..!🤔 4 दिसम्बर 2018 को दिग्गज समीक्षकों के समीक्षा के संग
माता-पिता, चाचा-चाची अपने पराए की उपस्थिति में लोकार्पण... किया-धरा सब पानी में...?
*पंजे से उचक कर नभ पर इंद्रधनुष खींचने की कोशिश जारी रखो.."*
"लेकिन सही में जाने की इच्छा थी। हम मैनेज नहीं कर सके।
4 दिसंबर का किया धरा सब पानी मे कैसे? वह दिन जीवन का सबसे बड़ा दिन था। मृगतृष्णा.."
"बिलकुल 'मृगतृष्णा'
–प्रकाशक मंगनी में पुस्तक नहीं छापते..
–पुस्तक मेला में भी वे स्व के प्रचार के लिए स्टॉल लगाते हैं
–इतना ही था तो सम्मानित करने के लिए बुला लेते लेखक को...
–दिल्ली या दिल्ली के आस-पास हो लेखक तो चला जाये... पटना से दिल्ली जाने में जो खर्च है... पटना से दिल्ली जाने में सामान्यतया दस हजार का खर्च दान कर दो न ठंढ़ में कम्बल खरीद कर...!" 

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