Friday, 5 June 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर बुध्दि की सफाई

"माँ! फोन पर आप किनसे बात कर रही थीं?
"सोशल मीडिया से बने रिश्तों में से बेहद प्यारी बहना है।"
"क्या जान सकता हूँ कि आपदोनों ने क्या बातें कीं?"
"अभी तो चहुओर एक ही शोर है, 'गर्भवती हथनी की हत्या'।"
"मुझे ऐसा क्यों लग रहा कि आप हथनी के मारे जाने से व्यथित तो हैं । लेकिन जानबूझकर किये गए कृत्य पर विश्वास नहीं कर पा रही हैं? आपकी लेखनी भी क्यों मौन है..?"
"अति भावुकता में , हड़बड़ी/जल्दबाजी में अब लेखन नहीं करना चाहती।"
"सही कर रही हैं.. किसी घटना पर अति संवेदनशील होकर दिमाग का लॉकडाऊन कर लेखन समाज को गुमराह करने जैसा अपराध ना हो वही बढ़िया होगा। केरल में पटाखों से भरा अनानास खाने के कारण जान गंवाने वाली गर्भवती हथिनी के लिए दो बातें स्पष्ट हुई हैं..

–केरल का शहर 'मलप्पुरम' नहीं होकर शहर पलक्कड़ है।

–कुछ लोगों ने पटाखों से भरा अनानास खिला नहीं दिया.. बल्कि लोग घातक जानवरों से अपने बचाव के लिए वैसा रखते हैं । जिसे इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में, एक भारतीय वन सेवा अधिकारी ने साझा किया, "किसी ने भी हाथी को अनानास खिलाया नहीं होगा। जानवर ने पाया होगा कि वह कहीं पड़ा हुआ है और उसने खुद ही इसका सेवन किया है और लोगों द्वारा जाने क्या-क्या झूठ बोला जा रहा है" यह कहते हुए कि पटाखों से भरे अनानास का उपयोग फसलों को नष्ट करने वाले जंगली सूअरों को पकड़ने के लिए एक घोंघे के रूप में किया जाता है।"

"जानते हो किस्से, कथा ,कहानियों को पढ़ने के संग रोज़मर्रा के वारदातों को सुनने-देखने के अनुभव से मुझे भीड़ का हिस्सा बनने से खुद को रोकने का नज़रिया तुमसे ही मिल रहा है।

"बीते कल में मेरी उँगली तुम्हारे हाथों में थी.. आज तुम्हारी उँगली...,"

4 comments:

  1. वाह..कितना सार्थक संदेश है दी।
    बेहतरीन लघुकथा।
    भीड़तंत्र का हिस्सा बनकर बुद्धितंत्र काम करना बंद कर देता है न।

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    1. सस्नेहाशीष शुभकामनाओं के संग छूटकी

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  2. भीड़ से अलग सोचना अलग दिखना ही पहचान होती है अलग मुकाम की
    प्रेरक प्रस्तुति

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  3. वाह , सबसे अलग सोच , अच्छी सोच . यह किसी ने सोचा ही न होगा .

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परबचन गीत

अ नोखी रीत समझ में बात है आयी, आ त्ममुग्धता  समझ में घात है आयी। थ मे राह लो परंजय उँगली थमाया क्यों झट गर्दन दबोचने नहीं दिया ...