अन्य के कार्य देखकर
पीड़ित होना छोड़ दिया...
कुछ पल का बचत..
एक वक्त में एक कार्य तो
इश्क करना आसान किया
लाल घेरे में
गूढ़ाक्षरों को करे
हिन्दी दिवस
नाक भौं टेढ़ी
गूढ़ाक्षरों से करे
हिन्दी दिवस
“नगर के कोलाहल से दूर-बहुत दूर आकर, आपको कैसा लग रहा है?” “उन्नत पहाड़, चहुँओर फैली हरियाली, स्वच्छ हवा, उदासी, ऊब को छीजने के प्रयास में है...
शुभकामनाएं
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर।
ReplyDeleteशुभकामनाएँ।
सादर
जी नमस्ते ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (११-०१ -२०२२ ) को
'जात न पूछो लिखने वालों की'( चर्चा अंक -४३०६) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
हार्दिक आभार आपका
Deleteशुभकामनाएं
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर!
ReplyDeleteसादर..
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
ReplyDeleteवाह, सुन्दर!
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