9 - १२ - २०११
(1) मन की चंचलता ,
मन की शान्ति भंग करता है .... !!
१० - १२ - २०११
(२) समस्या एक होने के बाद भी ,
(1) मन की चंचलता ,
मन की शान्ति भंग करता है .... !!
१० - १२ - २०११
(२) समस्या एक होने के बाद भी ,
समस्या का हल निकालने की क्षमता ,
सबकी अलग – अलग होती है , क्योंकि ,
सबका सोच और अनुभव अलग – अलग होता है…. !!
११ - १२ - २०११
(३) सारे काम किये जा सकते है , लेकिन ,
११ - १२ - २०११
(३) सारे काम किये जा सकते है , लेकिन ,
सारे काम एक बार में नहीं किये जा सकते…. !!
teenon vichaar hi superb hain....!!
ReplyDeleteSunder vichar...
ReplyDeleteBahut acchhe vichar hai. Aise vicharo se man ko shanti milti hai.
ReplyDeleteइन पंक्तियों में जीवन की बड़ी सधी हुई समझ दिखती है। दूसरी बात मुझे खास लगी, क्योंकि हम अक्सर एक जैसी समस्या पर भी अलग-अलग तरह से सोचते हैं और वही हमें अलग बनाता है। अनुभव का फर्क यहाँ साफ झलकता है।
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