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देवनागरी में लिखें

Tuesday, 30 October 2012

आउल बेदे आई ना


जब ढ़ाई साल का था तब खड़ा नहीं होता था ......
जब पाँच साल का था तब शब्द बोलता नहीं था ..... 
प्रत्येक वस्तु के लिए उसका अपना शब्द होता था ....
जैसे ~ ~ ~ ~ ~
सब्जी के लिए पच्ची -----
चप्पल के लिए पच्चल -----
गंजी और कंघी के लिए चांदी -----
जब कभी उसे सही बोलने के लिए बोला जाता ....
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
तो वो चुप रहता ....
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
सही शब्द सिखलाने वाला मुर्ख है ,
साफ-साफ उसके चेहरे पर लिखा होता
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
बड़े आत्मविश्वास के साथ बोलता ----
आउल बेदे आई ना ( राहुल को बोलने नहीं आता ) ..... !!!!
लेकिन आज हिंदी-अंग्रेजी में भाषण दे लेता है ..... !!!!
उसकी छोटी सी भी उपलब्धि मुझे बहुत ख़ुशी देता है ..... !!!!
आउल बेदे आई ना सपना सा लगता है ..... !!!!

11 comments:

  1. बेटे की उपलब्धि ही माँ का सबसे बड़ा सपना होता है,,,,बहुत२ बधाई,,,,

    RECENT POST LINK...: खता,,,

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  2. धीरज और प्रयास रंग लाते ही हैं ...
    आपकी ख़ुशी समझी जा सकती है !

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  3. वही सपना तो आपके चेहरे पर सा चमक रहा है

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  4. हर माँ का यही सपना होता है,,,,

    RECENT POST : समय की पुकार है,

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  5. बहुत बहुत बधाई आपको ...
    बड़ा प्यारा बीटा है ....!!

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  6. बहुत बहुत बधाई भैया को ।

    सादर

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