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देवनागरी में लिखें

Monday, 7 December 2015

सपना











एक आयोजन सफल हुआ कि आँखें फिर नई संजो लेती है

रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने सन् 1916 में पहली बार हाइकु की चर्चा किये थे
उस हिसाब से 2016 हाइकु शताब्दी वर्ष है
तो
क्यों न हम 100 हाइकुकार इक किताब में सहयोगाधार पर शामिल हो , विमोचन पर एकत्रित हो यादगार आयोजनोत्सव मनायें
जो शामिल होना चाहें
स्वागत है

15 comments:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 09/12/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की जा रही है...
    इस हलचल में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...

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    Replies
    1. शुभ प्रभात
      सस्नेहाशीष
      शुक्रिया पुतर् जी

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    2. शुभ प्रभात
      सस्नेहाशीष
      शुक्रिया पुतर् जी

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  2. बहुत अच्छी सोच है ...अग्रिम बधाई!

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  3. प्यारी दीदी
    नमन
    शुभ कामनाएँ
    सादर

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  4. बधाई और मंगल कामना

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  5. आदरणीय विभा रानी श्रीवास्तव दीदी बधाई आप को पुस्तक प्रकाशन के लिए.

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  6. पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई

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  7. सच है की जिनकी सोच इस्लाम के बारे मैं गंदी है
    वो हमेशा अपनी गंदी सोच का ही प्रमाण देगा ।।
    इनका मुद्दा हमेशा से इस्लाम को नीचा दिखाना और
    ईस्लाम का नेगेटिव प्रमोशन करना ही है ।
    दुनिया जानती है की मुसलमानों के दिलो में
    पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की क्या इज़्ज़त क्या रुतबा है
    जिनको खुदा ने सारी इंसानियत के लिए शांति और
    अमन का दूत बनाकर कर भेजा था उनकी शान में
    बार बार गुस्ताखी करना किस बहादुरी का नाम..
    पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के खिलाफ़ की गई टिप्पणी देश का
    वातावरण बिगाड़ने का प्रयास है .जो गन्दी मानसिकता दर्शाती है
    अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वालो ।।
    आज़ादी का ये मतलब नही के किसी भी धर्म की आस्था
    को ठेंस पहुंचाई जाए आज़ादी तो यह है के सच को सच
    लिखा जाए बोला जाए।
    अगर दम है तो इजराइल के ज़ुल्मो की दास्ताँ बारे में बोलो ।।
    अगर दम है तो मज़लूमो की चीख पुकार के बारे में आवाज उठाओ।।
    अगर शर्म है तो सीरिया के हालात के बारे में बोलो ।।
    अगर इंसानियत है तो अमरीका के बर्बरता इराक़ पर बोलो ।।
    अगर दिल है तो फलस्तीन की माओं का दर्द सुनाओ ।।
    अगर दर्द है तो गुजरात आसाम के किस्से ब्यान करो ।।
    यह है अभिव्यक्ति की आज़ादी..
    किसी धर्म के बारे मैं गलत भाषा इस्तेमाल करना नहीं

    लेकिन यह जो दोहरी मानसिकता के लोग है वो एक तरफ़ा ही बोलते लिखते थे
    और बोलते लिखते रहेंगे लेकिन सच कभी नही बोलेंगे ।।

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  8. Replies
    1. आपको सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएं...HAPPY NEW YEAR 2016...

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  9. बधाई! ho vibha ji
    OnlineGatha Team

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  10. पुस्‍तकों के प्रकाशन के लिए हार्दिेक बधाई...विभा जी।

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