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देवनागरी में लिखें

Friday, 4 November 2016

// परिवार में चूल्हा बंटता है ,पर्व नहीं //


"दूरदर्शी"

"जानती हो विभा ! राय जी अपने तीनों बेटों को बुला कर बोले कि G+3 फ्लोर मकान बनवाने के पीछे की मंशा ये थी कि तुम तीनों अलग अलग फ्लोर पर शिफ्ट हो जाओ । हम माँ बाप ग्राउंड फ्लोर पर ही रहेंगे ।"
"क्यों पिता जी ? ऐसा क्यों ! हमलोगों से क्या कोई गलती हुई है ? कल ही तो सबसे छोटे भाई की शादी हुई और आज आप हम। तीनों को अलग अलग फ्लोर पर शिफ्ट होने का आज्ञा दे बंटवारे की बात कर रहे हैं ।" तीनों बेटों बहुओं का एक ही सवाल सुन राय जी मुस्कुराये और बोले " आज कोई गलती तुमलोगों से नहीं हुई है । कल तुम लोग कोई गलती कर एक दूसरे से दूर ना हो जाओ दिलों से ,"आज फ्लोर से बस दूर हो जाओ।"
हम माँ बाप जिस फ्लोर पर रहेंगे वो फ्लोर सबका होगा । हमारे रिश्तेदार , हमारे संगी साथी खास कर हमारी बेटियों का निसंकोच मायका आबाद रहेगा ! ...
जया चाची (मकान-मालकिन) की बात सुन विभा अतीत में खो गई ... वर्षों पहले कुछ ऐसे विचार से ही वो अपने पापा को अवगत कराई थी

जी आदरणीया

करीब 27 -28 साल पुरानी सीख है जो मैंने अपने पिता को दी थी 🙏
अवकाश प्राप्त कर नौकरी के क्वाटर को छोड़ कर जब वे घर रहने जा रहे थे .... संजोग से मैं उस समय वहाँ थी .... घर पहुंचते रात हो जाने वाली थी .... मैं भाभी को बोली "सबके लिए यही से खाना बना कर ले चलते हैं ...

मेरी बात खाना बनाने वाली सुनते ही मेरे पिता दुखित हो गए ..... घर पर उनसे बहुत बड़े भाई , भाई=पिता समान यानि मेरे बड़े बाबू जी और बड़ी अम्मा रहते थे ... जो खुद वृद्ध थे .... उनके बच्चे बाहर रहते थे ..... वे लोग जिद से घर रहते थे .. कि गांव का वातावरण भोजन उन्हें स्वस्थ्य रखता है और मन लगता है ....  सच में आज भी जो अपनापन गांवों में बुजुर्गों को मिलता है ... वो शहरी परिवेश नहीं दे सकता है .... गप्पबाज़ी सेहत के लिए ज्यादा जरूरी
 
मेरे पिता को लगा कि आज भोजन लेकर चलेंगे तो बड़े भाई से अलग हो जाना होगा ..... जिसकी शुरुआत उनके कारण होगी .... लेकिन मेरी सोच कह रही थी कि पापा का पूरा परिवार उनके संग रहेगा क्यों कि मेरी माँ नहीं थी तो जब तक मेरे पापा जीवित रहे कोई न कोई भाभी उनके साथ रही तब दो दो भाभियाँ रहती थी ..... उनके बच्चे थे .... सबका अपना अपना स्वाद था .... अपनी अपनी आजादी थी ..... मैं एक ही बात बोली "आज आप चूल्हा अलग करते हैं तो बड़े बाबूजी के दिल से कभी अलग नहीं होंगे" ....  उनको आप अपने साथ रखियेगा दो चौका रहेगा तो परेशानी किसी को नहीं होगी .... नहीं तो कीच कीच स्वाभाविक है और दरारे पड़ने के बाद अलग होने से दीवारें खड़ी होती है .... और आज भी हम सब अपने चचेरे भाई बहन कोई पर्व हो शादी ब्याह हो एक चूल्हा जलता है ...
 
मेरी भाभियों पर मेरे पापा के संग बड़े बाबूजी और बड़ी अम्मा लादे गए बोझ नहीं थे लेकिन एक आँगन में होने से इंसानियत ज्यादा दिखाई सबका बराबर ख्याल रखा गया क्यों कि केवल सुपरविजन करना था
"बांधे रखना चाहते हो कुनबे को तो सबको मुक्त कर दो 🙏"
पिजड़े से फरार पक्षी ,पिंजड़े में नहीं लौटता है .... साख से उड़ा पक्षी ,बसेरा साख को ही बनाता है ....

7 comments:

  1. वाह.....
    सीख देती है यादें पुरानी
    सादर

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 06 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत सही कहा आपने

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  4. फोंट कलर हल्का दिखाई दे रहा है । पता नहीं समस्या इधर है या उधर है :)
    बहुत सुन्दर पोस्ट है ।

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    1. एक बार पुन: निरिक्षण करने का कष्ट करें .... सादर

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  5. पिजड़े से फरार पक्षी ,पिंजड़े में नहीं लौटता है ....एक दम सही कहा आपने कुछ पुरानी बातें सीख तो देती ही है

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