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देवनागरी में लिखें

Tuesday, 26 September 2017

भ्रम टूटा


20 सितम्बर को दिल्ली स्टेशन पर ट्रेन में बैठे साढ़े ग्यारह-बारह बजे तक फोन से बात कर सोई तो सुबह चंडीगढ़ में आँख खुली... सधारणत: ऐसा मेरे साथ होता नहीं है .... मेरी नींद इतनी गाढ़ी कभी नहीं हुई कि समान चोरी हो जाये... फोन चोरी होने से सबसे सम्पर्क खत्म हो गया.... 

8 comments:

  1. अरे, बहुत खराब हुआ यह तो। थकान की नींद होगी। मिला क्या सामान दीदी🙏
    नम्बर अब क्या है?

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  2. नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 05-10-2017 को प्रकाशनार्थ 811 वें अंक में सम्मिलित की गयी है। चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर। सधन्यवाद।

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  3. कुछ महत्वपूर्ण नम्बर लिखे हुऐ भी रखने चाहिये पाने साथ हमेशा सफर में।

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  4. कब क्या हो जाय कोई नहीं जानता और आज के चोर स्मार्ट जो हो गए है
    बहुत मुश्किल हो गई।

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  5. चोर वाकई स्मार्ट हो गये हैं,बस में चढती लड़की के हाथ से झपटकर मोबाइल लेकर भाग खड़े हुये.....

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  6. आदरणीया और मैं क्या कहूँ?

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  7. क्या कहूँ ,सच कहते है लोग जमाना बड़ा खराब है

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