Pages

देवनागरी में लिखें

Wednesday, 12 December 2012

एक बुलबुल की थेथरई .....




एक बुलबुल की थेथरई जग प्रसिद्ध हुई ....

एक बुलबुल से मुलाकात हुई , बात हुई ....

वो सोने के पिंजड़े में वर्षों से कैद थी .... !!
समय गुजरता गया .... धीरे - धीरे उसकी उपयोगिता कम हो गई .... उसके पिंजड़े को खोल दिया गया था .... फिर भी वो बाहर खुले में न जाकर , पिंजड़े में ही दिन काट रही थी .... !!

" उससे पूछी :-  क्यूँ नहीं उड़ जाती हो .... ?


तो वो बोली :- इतने वर्षों से कैद में रहने की आदत हो गई है .... बाहर नभ का कोई कोना वो अपने लिए कहाँ  बना पाई है और आत्मा का घायल होना दूसरों को कहाँ दिखता है .... !!


" अरे .... डर लगता है .... कुछ नहीं होगा एक बार दिल से कोशिश तो करो .... !!


वो बोली :- ना डर लगता है और ना हौसले की कमी है .... कोई जरुरत नहीं है .... बाहर कुछ हो ना हो , बाहर तीखे नुकीले चोंच से शरीर भी घायल हो ना हो .... घायल आत्मा जरुर लहू-लुहान हो जायेगा .... !!
वो बोली :-  थेथर और थेथरई में हम ज्यादा ही निपुण होती हैं .... !!

इसे ही तो कहते हैं .... *थेथरोलोजी .... !!

थेथरई का अर्थ बेअदब-जबरदस्ती .... !!

जब तक स्त्रियाँ भी थेथर रहेगीं , यही होता रहेगा और उनका हाल भी यही रहेगा .... !!

वृथा हैं बातें थोथी  ...

थोथी बातों से कभी ,

जीती गई ना ,

जग की कु-प्रथा !!
 
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

11 comments:

  1. बेहद लाजबाब रचना.शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन.बधाई।

    ReplyDelete
  2. अन्तस् को छूने वाली रचना!

    ReplyDelete
  3. touchy ..... dar aadat ban jaata hain

    ReplyDelete
  4. bulbul ki thethrayi ne bulbul ko khaas bana diya

    ReplyDelete
  5. मन को छू गई.. सुन्दर अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  6. bahut bahut acchi hai ye lines....bahut kuch hume kehti aur samjhati rachna

    ReplyDelete
  7. मर्मस्पर्शी रचना।

    ReplyDelete
  8. हृदयस्पर्शी आलेख ....

    ReplyDelete
  9. बेहद लाजबाब रचना...

    ReplyDelete
  10. लाजवाब प्रस्तुति | मुबारकबाद

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... ये तो आप ही बताएगें .... !!
आपकी आलोचना की जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!