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देवनागरी में लिखें

Thursday, 9 July 2015

समय के साथ साथ सोच बदलता है या अलग अलग मनुज की अलग अलग सोच होती ही है ... समय काल कोई भी हो

                मेरी शादी में एक दूर के रिश्ते की ननद से मेरी मुलाकात दो चार दिनों की हुई वो बहुत सुलझी हुई लगी
एक दो साल बाद उनकी भी शादी हुई ..... मेरी जब उनसे मुलाकात हुई तो मैं उनसे पूछी .... आप सम्बन्ध विच्छेद कर नई जिंदगी क्यों नहीं शुरू करती हैं .... उनका जबाब था जैसी किस्मत मेरी ..... उनमें एक ही कमी है , वैसे वे बहुत अच्छे इंसान हैं .... फिर कौन जानता है, दूसरा कैसा इंसान मिले ... इतने अनाथ बच्चे हैं दुनिया में किसी को गोद ले अपने आँचल भर लुंगी....
करीब 29 - 30 बाद मेरे पड़ोसी की लड़की की शादी हुई ...
फिर एक बार लड़के वालों के धोखे की शिकार एक लड़की हुई
लड़की दो तीन दिन में ही लड़के को तलाक दे अपने नौकरी पर लौट गई

दोनों लड़की के नजरिये से मुझे दोनों का निर्णय मुझे सही लगा .....

किसी ऐसे मनुज के साथ रहना जिंदगी भर ; जो ना स्त्री हो और जो ना पुरुष हो .......


         हमेशा हमें अपने सहनशीलता को खुद के लिए तौलते रहना चाहिए ...... क्षमता के अनुसार ही सहना चाहिए


दवा जानलेवा

डेढ़ साल पहले एस्प्रिन सेवन से मेरे बड़े भैया की बहुत हालत खराब हुई थी ..... खून इतना पतला हो गया था कि शरीर से बाहर बहने लगा था ।
                जिन्हें हाई bp होता है उन्हें ऐसी दवा दी जाती है जिनसे उनका खून पतला रहे ताकि हर्ट प्रॉब्लम ना हो ।
            मेरी सहेली के जेठ की मृत्यु हो गई । उनका खून इतना पतला हो गया कि दिमाग पर असर कर गया , जिसे सम्भाला नहीं जा सका ।
डॉ से नियमित जांच हर के लिए जरूरी है 
          जिंदगी में लापरवाही खुद के लिए हानिकारक होने के साथ आप अपनों को भी चोट पहुंचाते हैं