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देवनागरी में लिखें

Friday, 19 January 2018

क्षणिका


01.
मेरा है , मेरा है , सब मेरा है
इसको निकालो उसको बसाओ
धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें
अनेकानेक कहानियाँ इति हुई
लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें
तब भी न क्षणभंगुर संसार झलके
02.
माया लोभ मोह छोह लीला
उजड़ा बियावान में जा मिला
दम्भ आवरण सीरत के मूरत
अब खंडहर देख रोना आया
लीपते पोतते घर तो सँवरता
चमकाते रहे क्षणभंगुर सुरत

13 comments:

  1. बेहद गंभीर,विचारणीय क्षणिकाये हैं दी,दार्शनिक भाव लिये बेहद सुंदर...वाह्ह्ह👌

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  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १९ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    विशेष : आज 'सोमवार' १९ फरवरी २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच ऐसे एक व्यक्तित्व से आपका परिचय करवाने जा रहा है। जो एक साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य सुधा' के संपादक व स्वयं भी एक सशक्त लेखक के रूप में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। वर्तमान में अपनी पत्रिका 'साहित्य सुधा' के माध्यम से नवोदित लेखकों को एक उचित मंच प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य"

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  3. Wah, Such a wonderful line, behad umda, publish your book with
    Online Book Publisher India

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  4. यथार्थ‎ को शब्दों में बांध दिया है आपने.

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  5. बेहतरीन प्रस्तुति !! बहुत खूब आदरणीया ।

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  6. बहुत सुंदर
    सादर

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  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ अप्रैल २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  8. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं...
    लाजवाब जीवन दर्शन...
    वाह!!!

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  9. व्व्व्वाह् ... लाजवाब उपमा अलंकृत क्षणिकाएँ... ख़ूबसूरत सृजन के लिए अनेकानेक शुभेच्छाएँ आदरणीया 👌👌👌💐💐💐

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. जीवन का सार बताती सारगर्भित क्षणिकाएं आदरणीय विभा दीदी | सादर नमन |

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