Pages

देवनागरी में लिखें

Monday, 18 June 2012

पति-पत्नी का रिश्ता काफी मधुर होता ....


                                       


कोई नहीं पढ़ पाता मेरे अन्दर की ख़ामोशी ....

पति-पत्नी का रिश्ता काफी मधुर होता ....

मन के संवेदनशील तारों को झंकृत कर गई  

दोनों जहाँ में हमारी मोहब्बत हो जाए मशहूर

दिल - दिमाग की रस्साकस्सी को छोड़

मित्रता का हाथ  बढ़ा ,प्रीत की अल्पनाएं सजाई  

क्षणिक  भावों का परिणाम ,मनभावन की काल्पनिक उड़ान ,

मादक -  मीठी - मनोहर महक तन-बदन को महका गई  

पत्थर की लकीरें , मेरे स्वप्न  बने नहीं ,

ऐतिहासिक  परम्पराओं और दकियानुसी पृष्ठभूमि के

 रिवाज़ों के साथ की मनमानी 

उनके महत्वाकाँक्षाओं के गिद्ध ने 

मेरे आकाँक्षाओं के मयूर को नोच डाला

मेघ बन सैलाब लाना मुझे आता नहीं ,

जुबां की ताकत , खून में उबाल लाती नहीं  

अविनीत निगाहें भी टटोलती अवश जीवन ,

अविकल चाहतें , नृत्य  करते नहीं ,ग़म की , ख़िज़ाँ की रुत पर 

प्रतीक्षा से ऊबी स्मृतियाँ सिसक- सिसक रोई  

हसरतों का सलोना झोंका अब गुदगुदाती नहीं 

कविता के मृदंग  साथी बनतें नहीं 

अब मैं गुनगुनाती नहीं .... 

                                       


13 comments:

  1. बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

    ReplyDelete
  2. भावों को शब्द मिल ही गए या शब्दों को भाव ....

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  4. मन के अन्दर के ख़ामोशी को पढ़ पाना बेहद मुश्किल:)
    प्रतीक्षा से ऊबी स्मृतियाँ सिसक- सिसक रोई .. पर स्मृतियाँ ... सहेजी हुई स्मृतियाँ हर समय ख़ुशी देती है...:)
    एक एक शब्द.. चमक रहे...:)

    ReplyDelete
  5. उहापोह और अंतर्द्वंद

    ReplyDelete
  6. बहुत ही भावपूर्ण, हृदयस्पर्शी रचना !

    ReplyDelete
  7. आपने भी क्या खूब ,ये पंक्तियां पढवाई हैं ,
    सुंदर शब्दों का चयन , संयोजन कर के लाई हैं ,
    दिल से निकली ,रचना ये मन को हमारे भाई है ..
    बहुत बहुत शुभकामनाएं ।
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

    ReplyDelete
  8. जिन्‍दगी का सच...बहुत सुन्दर.

    ReplyDelete
  9. संजय भास्कर भाई को बहुत शुक्रिया उनके लिंक शेयर करने की वजह से ही मैं यहाँ आ पाया और इतनी सुंदर रचना मुझे पढने को मिली ,

    बहुत सुंदर भावो के साथ लिखा हुआ है, बहुत बहुत शुभकामनाये , आभार

    यहाँ भी पधारे
    मेरा चाँद जमीन पर

    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_5.html

    ReplyDelete
  10. पत्थर की लकीरें , मेरे स्वप्न बने नहीं ,waah

    ReplyDelete
  11. कविता के मृदंग साथी बनतें नहीं

    अब मैं गुनगुनाती नहीं .... , वाह !भावो को पंख दे दो तो वो उसकी खुशबू को हर तरफ फैला देते है...तब शब्दो मे खनक आ जाती है और लोगो को एक नया तराना..मिल जाता है

    ReplyDelete
  12. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us.. Happy Independence Day 2015, Latest Government Jobs.

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... ये तो आप ही बताएगें .... !!
आपकी आलोचना की जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!