Saturday, 26 July 2014
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०१ मई : लघुकथाकार श्री मधुदीप जयन्ती
पंचर की मरम्मत “कारखाने की घड़ियों की टिक-टिक मेरे सिर में हथौड़ों की तरह बज रही थी। मेरे पेडू का दर्द किसी तेज़ धार वाले चाकू की तरह उसे भी...
पंचर की मरम्मत “कारखाने की घड़ियों की टिक-टिक मेरे सिर में हथौड़ों की तरह बज रही थी। मेरे पेडू का दर्द किसी तेज़ धार वाले चाकू की तरह उसे भी...
सुन्दर रचनाओं का गुच्छ
ReplyDeleteबहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...
ReplyDeleteमन भाया बहुत.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteअच्छे दिन आयेंगे !
कर्मफल |
फेसबुक पर पह्ले ही पढने को मिल जाता है!! फिर भी दुबारा पढना और भी आनन्द प्रदान करता है!!
ReplyDeleteवाह ... बहुत ही खूबसूरत ...
ReplyDeleteसुंदर बेहद सुंदर , आ. धन्यवाद !
ReplyDeleteInformation and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
बहुत बढ़िया
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना...
ReplyDeleteखुबसूरत अभिवयक्ति.....
ReplyDeleteस्नेहाशिष ..... शुक्रिया .....
ReplyDeleteबहुत सुंदर.
ReplyDeleteनई पोस्ट : क्रूस के अनसुलझे सवाल
खुबसूरत अभिवयक्ति..... कृपया हमारे ब्लॉग पर भी पधारें धन्यवाद !
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