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देवनागरी में लिखें

Monday, 31 December 2012

हम ना भूलें = * हाइकु *





आप सब का नया साल सुख और शांति के साथ बीते .
आप और आपके परिजन इस साल सुरक्षित रहें ............ !!


http://hindihaiga.blogspot.in/2013/01/blog-post.html  

रचनाएँ hindihaiga@gmail.com पर भेजें - ऋता शेखर मधु
* हाइकु *  *हाइगा*



उम्मीद थामे
एक छोर फिसला
दोषी क्या भाग्य ? 

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हम ना भूलें
नैन इंतजार में
वादा किया है
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रौशनी करो
नहीं हक़ ख़ुशी का
ना फैला सको
~~~~~~~~~~~~~



पलते रहे
नयनों के सपने
अभावों में जो
~~~~~~~~~~~~~



हैं चटकते
फलने से पहले
झुलस जाते
~~~~~~~~~~~~~

ख्याल कर लें
खुशियों से भर दें
हर्षित करें !!


~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~

उम्मीद थामे
एक छोर फिसला
दोषी क्या भाग्य  ?
कहने वाले कहें
हम ना भूलें
नैन इंतजार में
वादा किया है
रौशनी फैलाने का
ना फैला सको
नहीं हक़ ख़ुशी का
पलते रहे
नयनों के सपने
अभावों में जो
जीवन मोड़ पर

हैं चटकते
फलने से पहले
 झुलस जाते
आओ ख्याल कर लें
खुशियों से भर दें !!


~~~~~~~~~~~~~
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Thursday, 27 December 2012

तेरह दिन यानी तेरहवीं एक मासूम के इज्जत की हत्या के और हमारे कारनामें ..... ??

http://www.prabhatkhabar.com/node/247306 

 

जहाँ एक तरफ देश की लड़कियां अपना कद बढाने में लगी है वहीँ दूसरी तरफ उनके मनोबल को तोड़ने की पुरज़ोर कोशिश की जा रही है ...........



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क्या कृष्ण केवल कृष्णा के लिए ही थे ..........
आज उनके सुदर्शन की जरुरत  यहाँ ज्यादा नहीं ......??....
मेरा दिल कर रहा है उन स्थति से ये गुजरे और मैं पूंछू ....................
काश आज मेरे संस्कार मेरे सामने ना होते ...................

ऐसी औरते ही औरत के नाम पर कलंक होती हैं ..............



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जानी मानी लेखिका और सामाजिक मुद्दों पर अपनी अलग राय रखने वाली अरुंधति राय ने बीबीसी स्टूडियो में बलात्कार के मुद्दे पर अपने विचार रखे. पढ़िए वो क्या कहती है ....
 
राष्ट्रपति के बेटे और सांसद अभिजीत मुखर्जी ने बलात्कार के मु्द्दे पर उमड़े आक्रोश का मखौल उड़ाते हुए एक बहुत ही विवादास्पद बयान दिया है। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शनों मे शामिल लोग डिस्को जाने वाले वर्ग के हैं और ये लिपीपुती महिलाएं (read painted women) दो मिनट की शोहरत की खातिर टीवी पर बयान देती फिर रही हैं।

उनका पूरा बयान ये रहा :-

would term the protests in Delhi as what is popularly known as Pink Revolution. It is becoming fashionable to land up on the streets with candle in hand, such people are completely disconnected from reality. They go to discotheques. I am very well versed with student activism, and I can bet on it that most of the protesters are not students. They are dented and painted women chasing two minutes on fame, giving interviews on TV. The protesters do not fall in the age group of students
साभार :-  अमिताभ श्रीवास्तव जी (टी वी टुडे नेटवर्क )

Raj Kamal :-

रेप पर कड़े कानून के लिए जस्टिस वर्मा को बताइए

सेक्शुअल असॉल्ट के मामलों में जल्दी न्याय दिलाने और सजा कड़ी करने के लिए कानूनों में संशोधन के मकसद से सिफारिशें देने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई तीन सदस्यों वाली कमिटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। इस कमिटी ने नोटिस जारी कर 5 जनवरी तक लो...गों से इस मसले पर राय मांगी है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ज...स्टिस जे. एस. वर्मा ने गंभीर यौन हमले के मामलों में जल्द न्याय दिलाने और कड़ी सजा के लिए आम जनता विशेषकर प्रख्यात न्यायविदों, कानूनी पेशेवरों, गैर सरकारी संगठनों, महिला समूहों और समाज के सदस्यों की राय मांगी है।इस मुद्दे पर कोई भी व्यक्ति justice.verma@nic.in पर ईमेल के जरिये या 011-23092675 नंबर पर फैक्स के जरिये अपनी राय भेज सकता है।

दिल्ली में चलती बस में गैंग रेप के बाद उपजे जनाक्रोश के बाद इस कमिटी का गठन किया गया है। कमिटी महिला के खिलाफ गंभीर प्रकृति के यौन हमले के आरोपों में समुचित सजा दिलवाने और त्वरित सुनवाई के मकसद से फौजदारी कानूनों में संभावित संशोधनों पर विचार करेगी।सरकार द्वारा गठित इस कमिटी में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस लीला सेठ और देश के पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम शामिल हैं।समिति 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।


Vandana Gupta14 minutes ago · ....

अभी मुझे ये मेल मिला सीमा सुरक्षा बल के विजेन्द्र शर्मा जी का ………पढिये इसे …………और जानिये कौन है दोषी ? पुलिस , हम या सरकार

आसान बहुत है काम , ख़ाकी पर इल्ज़ाम .........

इसमें कोई शक नहीं कि दिल्ली गैंग - रेप के हादसे ने पूरे मुल्क को हिला कर रख दिया ! दरिन्दगी का ऐसा घिनोना कृत्य शायद ही इससे पहले किसी ने सुना हो ! दिल - दहला देने वाले इस हादसे ने उन लोगों के अन्द...र भी संवेदना के बीज अंकुरित कर दिए जिनका संवेदना से दूर - दूर तक कोई सरोकार ही नहीं था ! पूरे देश का सोया हुआ हस्सास इस घटना से एका-एक जाग गया ! ऐसी घटना सभ्य समाज के माथे पे कभी ना मिटने वाला कलंक है !

ऐसी वीभत्स घटना के बाद आवाम का ग़ुस्सा जायज़ था , लोगों ने अपने इस आक्रोश को ज़ाहिर भी किया मगर आरोप – प्रत्यारोप के बीच अगर सब से ज़ियादा किसी पे गाज गिरी तो वो गिरी दिल्ली पुलिस पर ! ख़ाकी की यहाँ, मैं इस लिए पैरवी नहीं कर रहा कि मेरा त-अल्लुक़ भी ख़ाकी से है !

एक क्षण के लिए सोचिये इस घटना के बाद अगर वो भेड़िये ना पकड़े जाते तो हिन्दुस्तान की जम्हूरियत(लोकतंत्र )के मरकज़ (केंद्र ) राजपथ पर हज़ारों लोग किन्हें फांसी पे चढाने की आवाज़ बुलंद करते !

सोयी हुई हुकूमत को जगाने वाले प्रदर्शनकारियों की हर तख्ती पर लिखा था “ बलात्कारियों को फांसी दो “ अगर वे दरिन्दे हाथ ना आते तो शायद इस जन- आन्दोलन का स्वरुप आज कुछ और ही होता !

उस मासूम सी लड़की के जिस्म और रूह को नौचने के बाद उन दरिंदों ने उसे और उसके साथी को तक़रीबन मरे हुए समझकर महिपालपुर की पहाड़ियों के क़रीब फैंक दिया था ! लड़की के साथी ने बेहोशी की सी हालत में पुलिस को सिर्फ़ इतना बताया कि बस के ऊपर “ यादव “ लिखा था ! इस लीड के अलावा दिल्ली पुलिस के पास कोई भी और क्लू नहीं था ! पुलिस पर अक्सर संवेदनहीन होने का आरोप लगता है , हो सकता है कोई और केस होता तो पुलिस इतना मश्क नहीं करती पर कहीं ना कहीं दिल्ली पुलिस की उस टीम में संवेदना थी जो उस बच्ची की वो हालत देखकर उन्होंने अपनी एडी – चोटी का ज़ोर लगा दिया ! आधे घंटे तक पास से गुज़रने वाले लोगों ने उनकी पुकार नहीं सुनी, दो फ़रिश्ते ( फ़रिश्ते इस लिए लिखा क्यूंकि इंसान तो रुके ही नहीं ) अपनी बाइक पर जा रहे थे उन्होंने जब एक लड़के के कराहने की आवाज़ सुनी तो वे रुके उन्होंने 100 नंबर पे पी.सी.आर को फोन किया ! उनके फोन करने के ठीक साढ़े पांच मिनट के बाद पुलिस की गाड़ी आ गयी ,पुलिस वालों ने अपनी जैकट से उनके जिस्म को ढका ,वो दोनों फ़रिश्ते पास के एक ढाबे से चद्दर लेकर आये जिसमे लपेट कर पीड़िता और उसके साथी को अस्पताल ले जाया गया !

इसके फ़ौरन बाद मुआमले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपनी कई टीमें गठित की जिन्होंने अपना काम शुरू कर दिया !

दिल्ली में जितनी भी चार्टड बसे चलती है रात भर उनका रिकॉर्ड खंगाला गया , पता चला लगभग ऐसी 370 बसें है जिन पर यादव लिखा है ! सोलह दिसंबर की उस सर्द और सियाह रात में पुलिस की टीम एक – एक बस ,उसके मालिक और बसों के ड्राइवरों को ढूंढती रही ! पूरी रात की मशक्कत के बाद सुबह तक पुलिस उस बस को ढूंढ पाने में कामयाब हो गयी जिस बस में हैवानियत का गंदा नाच हुआ था ! मुख्य आरोपी राम सिंह के गिरफ़्त में आने के बाद पुलिस के लिए बाक़ी भेड़ियों को पकड़ने की राह आसान हो गयी ! अगले दिन शाम तक पुलिस ने चार आरोपी अदालत में पेश कर दिए ! एक नाबालिग आरोपी राजू को पकड़ने में भी दिल्ली पुलिस ने अपनी सूझ –बुझ का परिचय दिया केवल राम सिंह उसे पहचानता था उसका न कोई पता था न कोई मोबाईल नंबर ! राजू को दो दिन की भाग –दौड़ के बाद दिल्ली के आनंन्द विहार इलाके से पकड़ा गया जिसके पास पीड़ित बच्ची का ऐटीएम् कार्ड और पर्स मिला !

किसी ब्लाइंड केस को इस तरह दिल से सुलझाने की ऐसी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है !

ये भी सच है कि जज़्बात का चश्मा हमे हर चीज़ साफ़ - साफ़ नहीं दिखाता, लोग शानदार जांच और इतनी जल्द समाज के दुश्मनों को पकड़ने वालों के ऊपर ही इल्ज़ाम लगाने लगे !

अमेरिका में छुटियाँ मना रहे दिल्ली के उप राज्यपाल ने आते ही दिल्ली पुलिस के दो सहायक कमिश्नर बर्खाश्त कर दिए ! पुलिस पर दवाब बना कर काम करवाने वाले हुक्मरानों ने इतना भी नहीं सोचा कि ऐसा करने से उन पुलिसवालों के मनोबल पे क्या असर पड़ेगा जो इस हादसे के बाद 36 घंटों तक लगातार बिना सोये इस केस के लिए काम करते रहे ! कमज़ोर सियासत का वर्दी पर इस तरह इल्ज़ाम ढोल देना कोई नई बात नहीं है !

जितने लोग उतनी बातें , किसी ने कहा की दरिन्दे दो घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर बस घुमाते रहे पुलिस उस वक़्त क्या सोयी रही ? इस बात का जवाब वो लोग आसानी से समझ सकते है जो दिन – रात दिल्ली की सड़कों पर सफ़र करते हैं ! उस चार्टड बस में परदे लगे थे , अन्दर से बस की लाइट्स बंद थी ! दिल्ली की सड़कों पर वाहन कीड़े – मकोड़ों की तरह चौबीसों घंटे रेंगते रहते है ऐसा प्रायोगिक रूप से कतई संभव नहीं है कि बस को किसी चेक पोस्ट या लाल बत्ती पर जांच के लिए रोका जाता ! यूँ तो बस के क़रीब से भी कई वाहन गुजरें होंगे ..क्या उन्हें नहीं दिखा ये सब ? दिखता कैसे ये सब तो संभव नहीं था ! जो लोग वहाँ रोज़ सफ़र करते है वे ये बात समझ सकते है ! जनता के आक्रोश के सामने दिल्ली पुलिस का तमाम मुल्ज़िमों को इतने कम समय में सलाखों के पीछे कर देने का काम किसी को दिखाई ही नहीं दिया ! मुझे हैरत इस बात की भी हुई कि पुलिस की कार्य - प्रणाली समझने वाले भी पुलिस को ही इस हादसे का ज़िम्मेदार ठहराने लगे ! हमारे समाज और पुलिस के बीच आंकडा वैसे भी 36 से कम होता ही नहीं है यही वज़ह है कि समाज पुलिस को कभी उसके अच्छे काम के लिए भी शाबाशी नहीं देता !

पुलिस पे इल्ज़ाम धर देना बड़ा आसान है मगर ऐसे हादसे क्यूँ होते हैं इस पर समाज कभी गौर नहीं करता ! अदालतों में हज़ारों बलात्कार के मुआमले लंबित है ऐसा नहीं है कि ये तमाम केस पुलिस की अकर्मण्यता के कारण किसी अंजाम तक नहीं पहुँच पा रहे है ! राष्ट्रीय अपराध रिकोर्ड संस्थान के आंकड़ों के अनुसार देश में ९० % बलात्कार महिला के जानकार या किसी सगे संबंधी के द्वारा किये गए हैं ! दिल्ली गैंग रेप अपने आप में एक अलग और राष्ट्रीय शर्म का केस है !

ये बात मेरी समझ से परे है कि किसी महिला से उसके घर में किसी रिश्तेदार या जानकार द्वारा ये घृणित कृत्य किया जाता है तो इसमें पुलिस कहाँ दोषी हो जाती है ?

पीड़ित महिला को इन्साफ़ देरी से मिलता है इसके लिए हमारी न्यायिक प्रक्रिया भी बराबर की कुसूरवार है ! अभी तक “बलात्कार “ की परिभाषा भी हमारा क़ानून ठीक से गढ़ नहीं पाया है ! एक तो किसी की अस्मत लूट ली जाती है उस पर घटना के बाद पीड़िता से इन्साफ़ के मंदिर अदालत में ऐसे ऐसे सवाल किये जाते हैं जैसे उसी ने ही बलात्कार किया हो ! बकौल राहत इन्दौरी :--

इन्साफ़ जालिमों की हिमायत में जाएगा

ये हाल है तो कौन अदालत में जाएगा

मगर दिल्ली गैंग रेप की इस घटना ने इंसाफ़ को भी सोचने पे मजबूर किया है ! हमारी पुलिस , सियासत , आवाम और समाज का सर वाकई शर्म से झुक गया है ! सच तो ये है की इस घटना के बाद हम अपने आप से भी नज़र नहीं मिला पा रहे हैं !

इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो इसके लिए हम ख़ुद अपने गिरेबान में झांके ना कि पुलिस पे दोष मंढ कर हम हक़ीक़त से पल्ला झाड़लें ! समाज को ख़ुद सजग होना पडेगा , हमे अपने बच्चों, ख़ास तौर पे लड़कों को ऐसे संस्कार देने होंगे कि उनकी निगाह किसी महिला की तरफ़ जब भी उठे तो इज्ज़त ओ एहतराम के साथ उठे ! अपने इर्द-गिर्द ऐसी फ़िज़ां हमे बनानी होगी जिससे कि मनचलों का मन जब भी चले तो सही दिशा में चले !

भौतिकवादी इस दौर में हमलोग चाहते है कि हमारे बच्चे डाक्टर बने इंजिनीयर बने हम ये क्यूँ नहीं चाहते कि हमारी नस्ल कबीर बने , नानक बने , गौतम बने , भगत सिंह बने ,बोस बने ,अशफ़ाक़ बने ! इस दौरे-तरक्क़ी की सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि हम लोग अपने बच्चों का कैरियर बनाने में मसरूफ हैं ना कि किरदार बनाने में ! बच्चों को किरदार बनाने की तालीम ना तो स्कूल कॉलेज में दी जा रही है ना ही घरों में ऊपर से रही सही कसर टी.वी , मोबाईल , इंटरनेट ने पूरी कर दी है ! अपने आप को आधुनिक समझने और ज़माने से आगे निकलने के चस्के में हमे ख़बर ही नहीं है कि हमारे बच्ची क्या पढ़ रहें हैं और उन्हें क्या परोसा जा रहा है !

अपनी आबरू की कुर्बानी देकर दिल्ली गैंग रेप की शिकार इस बच्ची ने हमारे मृत पड़े ज़मीर को जीवित किया है , पूरा राष्ट्र आज एक स्वर में बोल रहा है ! हमारी सियासत कितनी संवेदनशील है हमने देख लिया , इंडिया गेट पर हुए जन आन्दोलन के दवाब के बिना अगर हुकूमत कोई कठोर क़दम उठाती तो बात कुछ और होती !

इतवार के रोज़ राजपथ पर ज़बरदस्त आन्दोलन हुआ , सरकार आवाम की भावनाओं का सम्मान नहीं कर पायी ,बड़ी बर्बरता के साथ लाठी-चार्ज हुआ ,कंपकंपाती ठण्ड में छात्र – छात्राओं पर पानी की बौछारें , यहाँ तक उम्रदराज़ महिलाओं पर भी लाठी-चार्ज किया गया ! इन सब के लिए भी आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दिया गया , एक चीज़ लोगों को समझनी चाहिए की पुलिस को भी कहीं से हुक्म मिलते है , पुलिस की अपनी मजबूरियां है , मैं सुरक्षा बल की उस कार्यवाही को जायज़ नहीं ठहरा रहा हूँ पर मोब को नियंत्रण में करना उतना आसान नहीं है जितना बाहर से दिखता है ! प्रदर्शन-कारियों में कुछ सियासी रोटिया सेकने वाले भी घुस गए और हालात बिगड़ते गए कुछ ज़ियादती सुरक्षा बल से भी हुई ! इस पूरे प्रदर्शन में पुलिस ने भी अपना एक जवान सुभाष तोमर खो दिया !

पुलिस समाज से अलग नहीं है , एक पुलिस वाला भी एक भाई है, एक बाप है, एक बेटा है उसकी भी रगों में लाल रंग का ही खून दौड़ता है हाँ अगर कहीं कोई कमी है तो वो है हम में और पुलिस में आपसी एतबार की ! सबसे पहले पुलिस और समाज को ये एतबार बहाल करना होगा !

बहरहाल, इन तमाम बातों से हटकर मेरी एक गुज़ारिश है कि हम सब मिलकर ऐसा माहौल बनाए की इस तरह की घटनाएं मुस्तक़बिल में ना हों ..और पुलिस को हम अपने समाज का ही हिस्सा समझें ना कि कोई छूत की बिमारी ! हमारी पुलिस अपनी मेहनत और जांबाज़ी से जब कोई अछा काम करे तो हमे उसकी पीठ भी थप-थपानी चाहिए ना कि पूर्वा-ग्रहों से ग्रसित हो हम उसपे आरोप ही आरोप थौंपते रहें !

आख़िर में ईश्वर से यही प्रार्थना कि अभी तक बहादुरी के साथ मौत से जंग लड़ने वाली उस बच्ची को इतनी हिम्मत और हौसला दे ताकि वो पूरी तरह ठीक होकर अपनी आँखों से उन भेड़ियों का हश्र देख सके और हमारे मुंसिफ़ों की क़लम में ईश्वर वो ताक़त दे जिससे कि वे उन दरिंदों के हक़ में मौत से भी बदतर सज़ा लिख सकें !..आमीन

हाकिम हो गर मुल्क के , जल्द करो इन्साफ़ !

वरना तुमको बेटियाँ , नहीं करेंगी माफ़ !!

विजेंद्र शर्मा

सीमा सुरक्षा बल ,बीकानेर

Vijendra.vijen@gmail.com


Today, Delhi Police passed a rule for 'Scared' Girls of Delhi. After 7 PM, if any Autowala refuses any girl for going at any place, she can takes Auto's number, Dial 100 and complaint to Police. Traffic Police will charge that Autowala with a huge fine, on the spot. Delhi Police Anti-stalking helpline number for 24 hours (Obscene calls, threats, abuses) : 011-27894455.



Rajesh Kumari jee :-

झूठे का मुँह काला -----सिपाही सुभाष चन्द्र की पोस्ट मोरटम रिपोर्ट से पुलिस का झूठ सामने आ गया,सिपाही का हार्ट अटैक ज्यादा भागने की वजह से हुआ ,धन्य है वो युवा पत्रकार योगेन्द्र तोमर जिसकी मदद से सच सामने आया ,अब यदि जरा भी शर्म बाकी है तो पुलिस कमिश्नर स्तीफा दे ................

कहीं पढ़ी *Facebook* पर अभिव्यक्ति को हमारे दुःख-संवेदना को सच नहीं माना जाएगा ... तो ऐसा करते हैं .......... हिन्दुस्तान में हजार-लाख गाँव तो होगें ही जहाँ दामिनी जैसी लड़कियों के साथ रोज कहीं ना कहीं वहशी-दरिंदों की दरिंदगी चलती ही रहती है . .... सब , सब का मतलब हर एक हिन्दुस्तानी ,सब , सब का मतलब हर एक जगह - जगह जाते और हथियार उठाते हैं ........... अरे !! दिल्ली में जो घटना घटी ,उस लड़की का साथ इसलिए जोर - शोर ,जो जहां है और उसके पास जो साधन उससे देने का प्रयास कर रहा ,क्यों कि सब जानते हैं कि कानून ,बनाना-बदलना दिल्ली से ही संभव है ..................

हमें क्या पड़ी .... आग तो पड़ोस में लगी .... !!



Bhawna Naveen Pandey आप को बताऊँ अभी एक दिन पहले पढा कि घरोँ मेँ एसी घटनाऐँ ज्यादा होती हैँ मगर उसे लोक लाज के नाम पर दबा दिया जाता है,उस पर समर्थन मेँ लिख क्या दिया तमगा मिल गया " पहाड़िन बड़ी बे... " क्योँ बसोँ मेँ हो तो हल्ला ठीक और देश के कई बन्द घरोँ मेँ होता हो तो "काहे को अशोभनीय बातेँ करती हो?
बिहार के राजधानी पटना जैसे छोटे से गाँव , Google से surch कर ज्ञान बढ़ाने वाली इस emotional fool बुढ़िया को किसी का भाग पढ़ने नहीं आया ......

अरे नादान लड़कियों के मूरख माता - पिता आपके बेटियों के साथ सगे बाप-पितिया फूफा और भाई या बाहर के वहशी-दरिन्दे जो बलात्कार करते हैं ... वो उन अभागी बेटियों के पिछले जन्म के करम पर निर्भर था ...... ऐसा कल महानगर में रहने वाले किसी सिद्ध ने मुझे समझाने की कोशिश की कि मैं अपना सफेद-खून क्यूँ जला रही हूँ .........
*थ्रिल*के लिए ......... और कहने वाले कहते हैं .......... हमें समझना चाहिए कि रेप 'स्पर ऑफ द मोमेंट' में होनेवाला एक व्यभिचार है। इसमें कोई सोची-समझी रणनीति नहीं काम करती है।

http://navbharattimes.indiatimes.com/depression-loneliness-was-filled-by-ram-singh/articleshow/17667493.cms 


उम्र के इस पड़ाव पर ,
दादी-नानी :)
बनने के ख़्वाब दिल में ,
आँखों में सपने पलते हैं .......
होठो पर दुआ :)
हांथो में आशीर्वाद बसते हैं ......
नहीं तो मैं कर्कशा ...
ना ही कोई जल्लाद ...
किसी की मौत की प्रार्थना ,
क्या है आसान ?
... लेकिन नहीं मैं समर्थ समाज बदलने में ......
जहां उसकी रोज मौत होगी ...
आसान नहीं होगा एक बार में मर जाना ... ?

इसे मैं कहीं से लेकर आई हूँ :-
लड़कियों के साथ इतना अत्याचार और अन्याय हो रहा है कि लोगों के मन में आता है कि कन्या भ्रूण हत्या ही मजबूरी बन जाये ... पर कन्या भूर्ण हत्या क्यों ?????????? यदि पुरुष ऐसे ही होते हैं तो क्यों न लड़कों को ही जन्म न लेने दिया जाए ...उनको ही गर्भ में खत्म कर दिया जाए ....?
बड़े साहित्यकार राजेन्द्र यादव जी का कथन है ---रेप की सज़ा ज्यादा से ज्यादा दस साल की होनी चाहिए। कैपिटल पनिशमेंट या पेनिस रिमूवल-कास्त्रेसन तो कभी नहीं। हमें समझना चाहिए कि रेप 'स्पर ऑफ द मोमेंट' में होनेवाला एक व्यभिचार है। इसमें कोई सोची-समझी रणनीति नहीं काम करती है। दस साल के कारावास में दोषी को सुधारने की भरपूर कोशिश की जा सकती है। आप क्या कहेंगे?
मेरा कहना है कि क्षणिक आवेश में एक स्त्री का वजूद ही खत्म कर दिया जाता है तब भी आपकी सहानुभूति बलात्कारियों के प्रति ???
यह कैसी सोच है ?


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Guddo Dadi .
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दिल्ली में रेप पर इतनी हायतौबा क्यों: काटजू
जागरण – ६ मिनट पहले.. .

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ईमेल

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.फ़ोटो देखें.
दिल्ली में रेप पर इतनी हायतौबा क्यों: काटजू

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नई दिल्ली। यह सही है कि राजधानी दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना को लेकर पूरे देश में गुस्सा है। संसद से लेकर सड़क तक आक्रोश दिखाई भी दे रहा है, लेकिन प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू के मुताबिक इस मुद्दे पर मीडिया को जोश से नहीं बल्कि होश से काम लेना चाहिए।

काटजू ने इस मुद्दे पर दिए अपने बयान में कहा कि लोग दिल्ली में हुए इस सामूहिक बलात्कार की घटना पर मेरी राय पूछ रहे हैं। काटजू ने कहा कि मैं इसकी जबर्दस्त भ‌र्त्सना करता हूं। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हैं उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।

काटजू ने कहा कि इसके साथ ही मैं यह भी जानना चाहता हूं कि मीडिया और संसद में क्या तब भी इतनी ही हायतौबा मचती जब यही घटना देश के किसी दूसरे हिस्से में हुई होती, खासकर ग्रामीण इलाके में। मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसा नहीं होता लेकिन निश्चित रूप से दिल्ली पूरा भारत नहीं है। काटजू ने कहा कि विदर्भ, आंध्रप्रदेश और अन्य जगहों पर पिछले 10-15 साल में ढाई लाख किसानों ने आत्महत्या कर ली जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है, लेकिन शायद ही इसपर कभी ऐसी हायतौबा मची हो। देश में 48 फीसद बच्चे कुपोषित हैं, यह सोमालिया और इथियोपिया से भी बदतर स्थिति है। देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है। गरीबों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। शिक्षा की भी ऐसी ही स्थिति है। महंगाई आसमान छू रही है और देश की 80 फीसद आबादी कैसे अपना जीवन यापन करती है ये अपने आप में एक आश्चर्य है। लेकिन न तो मीडिया और न ही संसद में कभी इसपर कोई हायतौबा मची। काटजू ने कहा कि मैं यहां रेप को उचित ठहराने की कोशिश नहीं कर रहा मैं सिर्फ लोगों से संतुलन में रहने और दिल्ली की गैंगरेप की घटना को ऐसी हाइप न देने की प्रार्थना कर रहा हूं जैसे कि ये देश की अकेली समस्या हो। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 में पहले से ही रेप के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद निर्धारित है। मुझे इसमें फांसी की सजा का प्रावधान जोड़ने का कोई कारण नजर नहीं आता।
 
एक अपील,हर एक नागरिक से जो सोचता है कि जो हुआ गलत है और इस तरह के अमानवीय व्यवहार के खिलाफ सख्त नियम होने चाहिए..हम सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानून की मांग करते हैं,कृपया इस पोस्ट को SHARE करे और इस मुहीम के प्रति अपना समर्थन दिखाए!!

मैं बेटी को मुल्क़ और सरहद में नहीं बांटी .... गुस्से में मैं सही शब्दों से खेल नहीं सकी .... मेरी दुआ नहीं फलती ......... एक बेटी को जिन लोगों के दुआ मांगनें से जीवन मिल गया और वो एक मिसाल बन शान से जी सकेगी , शायद .... उन्ही लोगों के प्रार्थना से दूसरी बेटी की मौत की प्रार्थना से उसकी मृत्यु हो जाए ..... वो जी कर क्या करेगी ?? बच गई तो , वहशी - दरिंदों  की दूसरी टोली , उसे किसी कोठे की वेश्या बना देगें .......... और तब भी हम क्या करेगें .......... ?? 
अपनी लाचारगी-बेबसी पर दम घूंट रहा ....
हत्यारों की एक ही सजा , फांसी की सजा :(
:'(
जिनसे कोई जान-पहचान भी नहीं होती .... फिर भी दुख अपना सा क्यूँ लगता है ....... ??
SUPPORT "INDIAN YOUTH PROTEST"
....AISF student march.... Patna, bihar....

 गैंग रेप की पीड़ित युवती की हालत बिगड़ने के बाद बेहतर इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया है।
तेरह दिन यानी तेरहवीं एक मासूम के इज्जत की हत्या के और हमारे कारनामें ..... ??
किसी भी जनांदोलन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि एक जनमत हो ...... लेकिन यहाँ , अपनी-अपनी डफली , अपना-अपना राग है ............ !!

जहाँ ऐसे हालात हों , वहाँ कोई औरत अपनी लड़ाई कैसे लड़े .... ??

Sunday, 16 December 2012

गलती गुनाह बन गई

कभी-कभी सच्चाई की तलाश में भी कोई बात फिसल ही जाती है ....
किसी दुसरे इंसान पर भरोसा करके , गलती इंसान से हो ही जाती है .........  ....
भरोसा वो काठ की हांडी जो चूल्हे पर दोबारा ना चढ़ती है ....
गलती मुझसे भी हुई है , जो मेरी गुनाह बन गई ....
शर्मिन्दा हूँ , यकीं ना दिला पाई , जब ख़ुद मुझे यकीं नहीं ....  
ख्याल था हाथी पचा जाने का , वहाँ चना हज़म नहीं हुई ....
उन्हें मुझ पर यकीं नहीं , मुझे इस जमाने पर भरोसा नहीं ....
"बात तब तक अपनी है, जब तक अपने पास है"  सहमत हूँ आप से ............ 


समय सीखा ही देता है ........ !!

शकलेंदु भी शंस्य तो नहीं होता .... !!


कहाँ से करूँ शुरूआत ...........
या .......
कहाँ ले जा कर करूँ समाप्त .....
क्या ....

दर्द जो समय दिया , वो , ज्यादा है दर्दनाक ......
या ...........
वो जो शरीर दे रहा दर्द , है ज्यादा दर्दनाक ....
अकेला रहना है , सजा .....
या ....
अकेलापन है , बड़ी सजा ........
शरीरवृत्ति का न रहना , शगुनियाँ  है बना देता ......
या .....
शरीरवृत्ति का होना , शक्तिमत्ता  , है बना देता ....
बालिश सा बालम , बारीस हो तो ...
कैसे ....
समाहित हो जाए बादरिया सी बाला .....
शकलेंदु भी शंस्य तो नहीं होता .... !!



शरीरवृत्ति = जीविका .... शगुनियाँ = शुभाशुभ का विचार करने वाला .....

बालिश = मूर्ख ...... बारीस = समुंद्र ..... शकलेंदु = अपूर्ण चन्द्रमा ....

शंस्य = स्तुति करने योग्य

Wednesday, 12 December 2012

एक बुलबुल की थेथरई .....




एक बुलबुल की थेथरई जग प्रसिद्ध हुई ....

एक बुलबुल से मुलाकात हुई , बात हुई ....

वो सोने के पिंजड़े में वर्षों से कैद थी .... !!
समय गुजरता गया .... धीरे - धीरे उसकी उपयोगिता कम हो गई .... उसके पिंजड़े को खोल दिया गया था .... फिर भी वो बाहर खुले में न जाकर , पिंजड़े में ही दिन काट रही थी .... !!

" उससे पूछी :-  क्यूँ नहीं उड़ जाती हो .... ?


तो वो बोली :- इतने वर्षों से कैद में रहने की आदत हो गई है .... बाहर नभ का कोई कोना वो अपने लिए कहाँ  बना पाई है और आत्मा का घायल होना दूसरों को कहाँ दिखता है .... !!


" अरे .... डर लगता है .... कुछ नहीं होगा एक बार दिल से कोशिश तो करो .... !!


वो बोली :- ना डर लगता है और ना हौसले की कमी है .... कोई जरुरत नहीं है .... बाहर कुछ हो ना हो , बाहर तीखे नुकीले चोंच से शरीर भी घायल हो ना हो .... घायल आत्मा जरुर लहू-लुहान हो जायेगा .... !!
वो बोली :-  थेथर और थेथरई में हम ज्यादा ही निपुण होती हैं .... !!

इसे ही तो कहते हैं .... *थेथरोलोजी .... !!

थेथरई का अर्थ बेअदब-जबरदस्ती .... !!

जब तक स्त्रियाँ भी थेथर रहेगीं , यही होता रहेगा और उनका हाल भी यही रहेगा .... !!

वृथा हैं बातें थोथी  ...

थोथी बातों से कभी ,

जीती गई ना ,

जग की कु-प्रथा !!
 
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Friday, 7 December 2012

समय बलवान होता है ??

समय बलवान होता है .... समय सब ठीक करता है .... सुनते - सुनते बड़ी हुई ......... लेकिन समय ये दिन दिखलायेगा कभी नहीं सोची थी .........
मौसी(चाची की बहन) का बेटा ,मौसेरा भाई ,जिसे बचपन से होनहारसमझदार मानती रही ........ इस तरह आत्महत्या कर लेगा कभी नहीं सोची थी .........
मौसी शुरू से तेज़ - तरार थीं ये तो मैं जानती थी ........ लेकिन बेटे के प्रति possessive होगीं ये तो वे ख़ुद नहीं समझ पायी होगीं ........... मौसी को दो बेटी और एक बेटा था पुलक* .....
जब से चाचा की शादी हुई  ,चाची की बहनों से हमेशा मुलाक़ात होती रही ,क्यों कि वे ज्यादातर चाची के साथ ही होतीं ... एक बहन मेरी हमउम्र थी .... इसलिए उससे मेरी दोस्ती भी गहरी थी ....समय के साथ हम बड़े होते गए और हमारी शादी हुई और हम अपनी गृहस्थी में रमते गये  ,जिसे जैसा घर - बार मिला वहीँ के होकर रहे ,लेकिन चाची के बाद वाली  बहन शादी के बाद भी चाची के साथ ही रही .... क्या कारण था मेरे समझ से बाहर था ,क्यों कि मौसा मुझे बहुत समझदार ,पढे-लिखे सुलझे - शान्त विचारों वाले इन्सान लगते .... मौसा प्रोफेसर थे .... कुछ वर्ष अलग-अलग शहरों में घुमने के बाद 18 साल से हम ( मैं - चाचा का परिवार - चाची के दोनों बहनों का परिवार ) पटना में रह रहे  हैं .......... जब भी राखी - बजड़ी में चचेरे भाइयों के लिए चाचा के घर जाती पुलक जरुर मिलता ,बहुत प्यार से कलाई पर राखी बंधाता - बजड़ी खाता .... वो अपनी नौकरी और मौसा तनाव - अवसाद से ग्रस्त होने से बीमार हो गये थे ,उनकी देखभाल में व्यस्त रहता था ....... फरवरी 2012 में उसकी शादी भी हुई थी ........... उसे पत्नी बहुत अच्छी मिली थी .... सुनकर मन बहुत खुश होता था ..... छठ के दिन  उसने आत्महत्या कर ली .... उसकी पत्नी मैके गई थी ..... पुलक भी ससुराल जाना चाहता था मौसी उसे जाने नहीं दी ..... वो मर गया ...... अपनी 8 महीने की ब्याहता को  किस के भरोसे छोड़ गया ........ उस बेचारी के पिता भी नहीं हैं ....

Wednesday, 5 December 2012

क्या कहते हो !! तब क्या होता ....... ???






Sweet I am ,   
but
Honey is U ....


Image is mine,
but
Colours are U ....


Flower is me,
but
Frangnance is U ....


Happy I am ,
but
Reason is U ....


क्या कहते हो !! 

Mehboob Shrivastava  Betu I Love U ♥

अच्छे पल पर बुरे पल भी याद आते हैं मुझे .... !!

सन 1993 की बात है .... तब महबूब(7साल) कक्षा तीन में पढ़ता था .... !!
उस समय हमलोग केन्दपोसी में रहते थे .... केन्दपोसी झारखण्ड का एक छोटा सा गाँव है .... बात उस वक़्त की है , जब बिहार-झारखंड बंटा नहीं था .... बांटने के लिए आन्दोलन चल रहा था .... !!
केन्दपोसी में कोई स्कूल नहीं होने के कारण , महबूब , झिंकपानी ( केन्दपोसी से 30 किलोमीटर दूर ,जहाँ सीमेंट फैक्ट्री है ) के D. A. V. स्कूल में पढ़ने जाता था .... !!
घर से झिंकपानी के बस स्टॉप तक की दुरी थी 25 किलोमीटर .... झिंकपानी के बस स्टॉप से स्कूल तक की दुरी थी 5 किलोमीटर .... !!
घर से स्कूल जाने की सुविधा , लोकल बस + स्कूल बस थी ........ !!
घर से झिंकपानी के बस स्टॉप तक लोकल बस से जाता था और वहाँ जो स्कूल बस , चाईबासा से बच्चों को लेकर आती , उस बस से ही महबूब भी स्कूल चला जाता .... स्कूल के लिए महबूब को सुबह के 5 बजे लोकल - बस पकड़ना पड़ता था और घर वापस लौटते - लौटते शाम के 5 बज जाते थे ..... !!
केन्दपोसी और झिंकपानी के बीच में पड़ता था हाटगम्हरिया .... हाटगम्हरिया में दो रास्ता था , एक केन्दपोसी (तब बिहार) की तरफ और दूसरा उड़ीसा की तरफ जाता था ....
आये दिन , आन्दोलन के कारण लोकल बस की आने-जाने पर रोक लग जाती थी .... कभी-कभी ऐसा होता था कि महबूब स्कूल चला जाता था , तब बस बंद हो जाती थी .... बस को वापस लौटाते समय , बस का खलासी हमारे स्टाफ को सूचित कर देता और स्टाफ महबूब के पापा को खबर करता और वे कोई व्यवस्था कर महबूब को स्कूल से वापस ले आते .... !!
एक दिन महबूब स्कूल चला गया .... तब आन्दोलन शुरू हो गया और आन्दोलन की वजह से बस उसे छोड़ कर वापस लौट गई .... बस का खलासी हमारे स्टाफ को भी सूचित कर दिया ......... लेकिन संजोग से महबूब के पापा उस दिन रांची गए हुए थे .... स्टाफ मुझे सूचित करना जरुरी नहीं समझा .... !!
महबूब की जब स्कूल से छुट्टी हुई और वो बस-स्टॉप पर पहुंचा तो उसे पता चला , लोकल बस तो अब आएगी नहीं .... तो वो एक ट्रक से लिफ्ट लिया .... ट्रक पर चढ़ने के बाद उसे नींद लग गई ....
कुछ देर के बाद उसकी नींद खुली तो उसे रास्ता जाना-पहचाना नहीं लगा .... उसे समझ में आ गया कि वो गलत रास्ते पर जा रहा है .... वो ट्रक वाले से बोला कि उसका घर आ गया है .... उसे यहीं उतरना है .... ट्रक वाला उसे वही उतार कर चला गया .... महबूब वहाँ से फिर एक जीप से लिफ्ट लिया और वापस हाटगम्भरिया के दोराहे वाले जगह पर पहुंचा और वहाँ से फिर एक ट्रक से लिफ्ट ले कर घर(केन्दपोसी) पहुंचा .... अगर महबूब उस समय समझदारी और हिम्मत से काम नहीं लिया होता तो आज वो मेरे पास नहीं होता .......

 तब क्या होता ............. ?????