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देवनागरी में लिखें

Tuesday, 26 August 2014

हाइकु - मुक्तक








जपानी विधा में लिखी गई 
17 अक्षर और 3 पंक्तियों की 
व्यापक अर्थ लिए कविता को ही 
हम चार पंक्तियों में एक भाव पर 
चार हाइकु लिखें तो बनेगा 
हाइकु - मुक्तक 

एक हाइकु-मुक्तक में 
चार पंक्ति के मुक्तक के 
एक पंक्ति में फिर तीन पंक्ति है 
यानि
 हमें 12 पंक्ति का ख्याल रखना है 

जैसे 

पहला प्रयास 
समीक्षा हेतु

सूखे ना स्वेद / अपहृत बरखा / रोता भदई
देख भू चौंकी / खाली बूँदें-बुगची / नभ मुदई
व्याकुल कंठ / भरे नयन सरि / चिंता में दीन
भादो है छली / घाऊघप बादल / द्वि निरदई
==
अपहृत = अपहरण हो गया 
घाऊघप = गुप्त रूप से किसी का धन हरण करने वाला 


25 comments:

  1. सुंदर विधा
    शब्दों से भाव गुथे
    अति उत्तम
    नवाकार

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  2. बहुत सुन्दर और प्रभावी...बहुत सुन्दर प्रयास...

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  3. अच्छे लगे मुक्तक , आ. धन्यवाद !

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  4. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 28/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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    1. स्नेहाशीष ..... शुक्रिया ....

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  5. नयी विधा की जानकारी मिली…सुन्दर रचना

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  6. बहुत बहुत सुन्दर

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  7. हाइकू मुक्तक की जानकारी के लिए धन्यवाद स्वीकार करें |

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    1. शुभ प्रभात .... आभार आपका

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  8. बहुत सुन्दर हाइकू....

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  9. आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 29 . 8 . 2014 दिन शुक्रवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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    1. स्नेहाशीष ..... आभार आपका

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  10. बढ़िया हाइकू मुक्तक

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  11. सुंदर प्रस्तुति.
    आपको भगवान गणेश जन्मोत्सव के साथ ही जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें!

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    1. आभारी हूँ .... बहुत बहुत धन्यवाद आपका

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  12. bahut sunder muktak....bahut hi umda haaiku.. shukriya.
    .

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  13. सारे बहुत अछे लगे.

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  14. बहुत सुन्दर रचना

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  15. सुन्दर मुक्तक ..अच्छी शुरुआत दी

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  16. fb पर एक टिप्पणी में :-

    डॉ. प्रणय * सूखे न स्वेद अपह्रत बरखा रोता भदई !

    ( पसीने का न सूखना - अथक परिश्रम / दौड़ - धूप । बरखा - वर्षा / नाम विशेष बरखा - मजदूर कन्या , जिसका अपहरण होना नियति में है । भदई - माह विशेष से जुड़ा / कृषक - मजदूर व्यक्ति विशेष - बरखा का पिता जिसके पास रोने के अलावा और कोई बूता नहीं ! , स्वेद और अश्रु एकसाथ , प्रकृति भी उपस्थित ).....और-और अर्थ खोलता हायकू ! ऐसा लेखन सहज नहीं, ऐसे हायकू कभी- कभी लिख जाते हैं ! यह 17 वर्ण की एक लंबी और चिरजीवी कविता है जिसका भाष्य चित्ताकर्षक है ! रचनाकार धन्य !

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  17. शब्दों का जादुई प्रयोग ...
    अच्छे हैं सब ...

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  18. हाइकू मुक्तक.. इस नई विधा की जानकारी सोदाहरण देने का धन्यवाद। बहुत सुंदर। काश कि घाऊघप बादल से सारी बारिश निकलवा ली जाये।

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