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देवनागरी में लिखें

Saturday, 9 August 2014

राखी की असीम शुभ कामनायें



रक्षण वादा 
एक दूजे के संग 
बांध के धागा 


बहुत पहले केवल पंडित जी रक्षा सूत्र बांधा करते थे .... 
मैं अपनी माँ को पंडित जी से रक्षा सूत्र लेकर 
सिन्होरा में बांधते देखती थी .... 
लेकिन वो ऐसा क्यूँ करती थी ,
मैं उनसे पूछ नहीं सकी ..... 
किसी को इसके बारे में 
कोई जानकारी है क्या ?

======

1

अमोल राखी 
स्नेह-रोली का टीका
आंचल कोर ।

2

जने ना सुता 
सूनी रहे कलाई 
उदास सुत ।

3

आई ना जाई 
राखी ले खिन्न सुत
माँ भर आई ।

4

राखी ले आई
पिता व सखा भाव
एक भाई में।

5

तीज त्यौहार
जीवन है सुंदर 
याद कर लें।

6

स्नेह बंधन 
धर्म वर्ग से परे 
रक्षा बंधन। 

=============

सावन हमारे शहर में रूठा रहा 
सारे मेघ को हटा दिखा हूठा रहा 
सबका कहना बरस पलटेगा नसीब 
करता रहा कमबख्त वो झूठा रहा 
===
१९७६ में राखी के चार दिन पहले मेरे मझले भैया की मृत्यु हुई ...... 
आज भी वे हर पल मुझे मेरे साथ लगते हैं ..... 
उनके लिए उदास नहीं हो सकती क्यूँ कि 
तीन और भाई हैं जिन के लिए हँसती हूँ ..... 
मैं उनकी ढिबरी हूँ तो रौशनी देना मेरा काम हुआ ना ..... 
रो कैसे सकती हूँ ..... अँधेरा तो चिराग तले होता है ..... 
दिल कुहुकता है …..


10 comments:

  1. स्नेह बंधन
    धर्म वर्ग से परे
    रक्षा बंधन।

    सुन्दर हाइकु
    रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ !
    सादर !

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    Replies
    1. आपको भी
      रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ !

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  2. आपको भी बधाई. हमारी बहनों की राखी भी इस बार दो दिन पूर्व ही मिल चुकी है कई साल के बाद. अब कल का बेसब्री से इंतज़ार है :)

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें।

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  4. बहुत सुन्दर ....हार्दिक शुभकामनाएं

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  5. सभी हाइकू बहुर सुन्दर ... विषय पे कड़ी पाकर रक्खे हुए ..

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  6. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें....

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  7. दीदी हमलोग हैं ना! भैया भी जहाम होंंगे आपको आशीष दे रहे होंंगे!
    बहुत सुन्दर हैं सारी रचनाएँ!!
    प्रणाम स्वीकारिये!!

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  8. स्नेह बंधन
    धर्म वर्ग से परे
    रक्षा बंधन।

    .....सभी हाइकू बहुर सुन्दर

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