Tuesday, 11 February 2014

बौराई तो मैं खुद हूँ


जैसे सावन के अंधे को हरा हरा दिखता है 
वैसे ही इस माह में लोग मुझे बौराये दिखते हैं 

बौराई तो मैं जो खुद हूँ  …







सिंदूरी साँझ 
क्षितिज चित्रपट 
टेसू चितेरा। 


रिश्ता जलाता
ध्रूमपान करता 
शक का कीड़ा ।




22 comments:

  1. सुन्दर चित्र सुन्दर हाईगा
    :-)

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  2. बहुत सुन्दर और प्रभावी हाइगा..

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  3. tesu chitera ke sath tesu ke fool hote to sone men suhaga ho jata

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  4. रिश्ता जलाता
    ध्रूमपान करता
    शक का कीड़ा ।

    बहुत गहन हाइकु है ...!!

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  5. मनोहारी और सार्थक

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  6. बहुत ही सुन्दर और उत्कृष्ट प्रस्तुति, धन्यबाद .

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  7. chitrmay hayku , bahut bahut manohari

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  8. प्रभावशाली प्रस्तुती....

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  9. सुंदर चित्रावली से सजी पोस्ट !

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  10. शायद पहली बार आपका लिखा हाइगा पढ़ रहा हूँ. अति उत्तम.

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  11. कल 13/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    1. शुक्रिया और आभार आपका
      हार्दिक शुभकामनायें

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  12. बहुत सुंदर हाइगा ....

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  13. बहुत सुन्दर चित्र भी पंक्तियाँ भी

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  14. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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