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Saturday, 22 February 2014

"फाल्गुनी तांका"



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1

फाग तरंग 
ठंडाई संग भंग 
होली उमंग 
मस्त चढ़ता रंग 
मिष्ट स्वाद के संग 

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2

बैर ना पालो 
रंग में क्लेश घोलो 
तनाव टालो
शरारत नाचता 
मधुमास कहता 

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3

रंगीला मास 
निशा आयु घटती 
दिन उत्तान
छाई एक खुमारी
ऊनी लगते भारी

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4

मदन माया 
कण-कण नहाया
उन्माद आया 
टेसू यौवन छाया
अंतस चहकाया 

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13 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (23-02-2014) को " विदा कितने सांसद होंगे असल में" (चर्चा मंच-1532) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आदरणीय
      सादर प्रणाम _/\_
      आभारी हूँ ..... बहुत बहुत धन्यवाद आप का
      सादर
      ==

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  2. रंगीन...उमंग भरी...

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  3. सुन्दर रचना |
    आशा

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  4. सुन्दर प्रस्तुति

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  5. बहुत सुंदर .......होली का स्वागत गान ......सुंदर ताका...

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  6. बहुत बढ़िया ,चाची जी आपके ब्लॉग पर आकर कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है

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  7. बहुत बढ़िया ताका

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  8. बहुत बढ़िया....रंग बिखराते शब्द

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