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देवनागरी में लिखें

Wednesday, 11 September 2013

"पहाड़ "




छु लो गगन
भरों आत्मविश्वास
शृंग अंग से
~~2
संत्रास हँसे
सैलाब आ ही जाये
शाल जो मिटे .....    शाल = वृक्ष
~~3
शृंग विहसे
आँधियों के आँचल
काँख फंसाये
~~4
क्षितिज पर
शृंग बांधा हो साफा
सूर्यास्त हुआ ....
 ~~5
 मुंह का खाया
ईच्छा पहाड़ जैसी
श्रमहीन था ....
~~6
सूत कात लें
शृंग कंधे बादल
कपास लगे....
~~7
पहाड़ी भाल
है तनाव मिटाता
छू ले जो गाल
~~8
विस्तृत धान्य(संपदा)
उलीचना जानता
उदार शृंग
~~9
हुई व्यथित 
जुदा रह न सकी
है चन्द्रस्नाता 
~~
Clipart Gif animé lettre v

16 comments:

  1. वाह चाची जी ....चलते फिरते पहाड़ों के साथ ...."संत्रास हँसे
    सैलाब आ ही जाये....शाल जो मिटे ..... "भविष्य के प्रति व्याकुल रचना ......सुंदर मतलब ये कि बहुत ही सुंदर |

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  2. बहुत सुन्दर हायकू हैं दी...
    सादर
    अनु

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  3. आज बुलेटिन टीम के सबसे युवा ब्लॉग रिपोर्टर हर्षवर्धन जी का जन्मदिवस है , उन्हें अपना स्नेह और आशीष दीजिये साथ ही साथ पढिए उनके द्वारा तैयार की गई आज की ब्लॉग बुलेटिन ........
    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जन्मदिन और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. sundar haykoo .photo to bahut jandaar hain bahut der tak photo hi dekhti rahi

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  5. अति सुन्दर. पहाड़ों की तरह ही ताजगी देता हुआ.

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  6. बहुत ही सुंदर हाइकू ............

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  7. पहाड़ों के इर्द गिर्द लिखे सुन्दर हाइकू ...

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  8. यह विधा विशुद्ध साहित्यिक परिधान ओढ़ बैठी है, आपकी इस रचना में।

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  9. Aha...bhut sundar .arth bta kr achha kiya samajne me bhut asaani hui aur aanand bhi aya

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  10. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  11. सुंदर लेखन ,बखूबी से बयाँ करते सुंदर हायकू |

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  12. बहुत खुबसूरत हाइकू !!

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  13. सुंदर तस्वीरों के साथ बहुत ही सुंदर हाइकू .....

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