Friday, 28 June 2013

बड़े भैया





मेरे पिता-तुल्य बड़े भैया ......
माँ के बाद , माँ की सारी जिम्मेदारी इन्हों ने ही पूरी की ......

जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और ढेरों शुभकामनायें .....
आपका साया हमारे सिर पर तब-तक रहे ,
जब तक ये दुनिया रहे ....

 इनकी एक खास बात आज कहने को रोक नहीं सकी .....
अगर आपको बुरा लगे तो क्षमा-प्रार्थी हूँ *बड़े भैया .....
 इन्हें मेरी शादी करने के बाद और लड़की (जैसे :- छोटी साली ,बड़ी साली की लड़कियां , भतीजी-भगिनी , दोस्त की बेटी , आस  -पड़ोस की बेटी यानि समाज सेवा) की शादी करवाना अपनी ही जिम्मेदारी लगती और बहुत कुशलता पूर्वक सम्पन्न भी करवाते ....
लेकिन जैसा हमारा समाज है ..... शादी के बाद लड़का-लड़की तो बहुत खुश होते .... लेकिन लड़के की माँ को कोई ना कोई शिकायत अगुआ से हो ही जाती है ....
अगुआ को बहुत अपशब्द , गाली ,बुरा-भला सुनने को मिल जाता है .....
इन्हें बुरा लगता या ना लगता मुझे बहुत बुरा लगता ....
क्यूँ कि जिन लड़कियों की शादी ,ये करवाते  ,लड़का-पक्ष वाले मेरे परिचित जरूर होते ....
सुनने को मुझे मिल ही जाता .....
मैं अक्सर इनसे बोलती कि आप को बुरा नहीं लगता .... ??

ये हँसते हुये बोलते .... देखअ तअ कहीं हमराअ देहाअ मे कौनो सटलअ बा अपशब्द , गाली ,बुरा-भला ..... पुण्य होला आ लड़की केअ बिहाआ करवावलअ ......
काश !!
ये शिकायते नहीं होते
काश !!
ऐसा हो जाता
इनके जैसा बन पाती
किसी का
कहा-किया खो जाता
असर नहीं हो पाता
दिल पर नहीं ले पाती  ......



Photo: * जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई



Tuesday, 25 June 2013

सज़ा एक ही होनी चाहिए थी .... ??



एक बार .... एक अदालत में तीन खूनी पकड़ कर लाये गये .... उनमें से एक को बरी कर दिया गया .... दूसरे को पाँच साल की सज़ा मिली .... तीसरे को फांसी की सज़ा मिली ....

जिसे बरी किया गया ,वो मकान बनाने वाला एक मजदूर था .... ,छत पर काम करते वक़्त एक बड़ा पत्थर उसके हांथ से अचानक छुट कर गिर गया और वो पत्थर नीचे चलते एक राहगीर के सिर पर लगा और उससे उस राहगीर की मृत्यु हो गई .... हत्या तो हुई लेकिन मजदूर ने वो जान-बुझ कर पत्थर नहीं फेंका था उसकी नियत गलत नहीं थी इसलिए उसे बरी कर दिया गया ....

दूसरा मुजरिम एक किसान था .... उसके खेत में लगे फसल को एक चोर काट रहा था ,उस चोर को किसान ने ऐसी लाठी मारी कि चोर मर गया .... चोरी गलत काम है ,किसान का नुकसान भी हो रहा था .... लेकिन ऐसा अपराध नहीं था कि उसकी हत्या कर दी जाये .... इस लिए उस मुजरिम किसान को 5 साल की सज़ा हुई ....

तीसरा मुजरिम एक मशहूर डाकू था .... एक धनी इंसान के घर में रात को डकैती के नियत से गया और धनी पुरुष की हत्या कर के घर का सारा धन चुरा लिया .... उस डकैत का अपराध जघन्य था ,इसलिए उसे फांसी की सज़ा दी गई ....

तीनों ही अपराधी ने खून किया था .... जुर्म का बाहरी रूप एक सा था .... सतही सोच के आधार पर सज़ा एक ही होनी चाहिए थी .... ??


ऊपर के न्यायलय में भी ऐसा ही न्याय होता होगा ना .... ??

हम सभी को भी अपने अन्तर्मन के सत्यनिष्ठ जज के फैसले के अनुसार न्याय का साथ देना चाहिए .... ??

अन्तर्मन कोई काट -छांट  नहीं करता .... लोभ - लालच ,भय - स्वार्थ उसे प्रभावित नहीं करता .... अन्तर्मन तो बस विश्वास पर निर्णय (जजमेंट) देता है ....


Saturday, 22 June 2013

मैं स्तब्ध हूँ


सैलाब ,प्रलय ,प्रकृति आपदा या दैविक प्रकोप जो रहा हो ....
मैं मूक थी ....
मेरी लेखनी को शब्द नहीं मिल रहे थे ....

कल ये प्रसाद मेरे हांथों  में आया ....

मैं स्तब्ध हूँ ....
इस प्रसाद के लोभ में
आकांक्षा के प्रलोभन में
कितनों की बलि चढ़ गई  ....

मैं अब स्तब्ध हूँ
इस चाँदी के सिक्के को देख कर
जो भोले-भण्डारी
धतूर कनेल भांग से खुश हो जाते हैं
उनके प्रसाद में ..............



खुश कौन ज्यादा होगा
केदार नाथ या
चढ़ा प्रसाद पाने वाला ???




Saturday, 15 June 2013

एक क्षण .......


खिलखिलाने के लिए एक क्षण बहुत है 





Advisory excellerator fy13 q3 jan to mar 2013.pps (6) from Vibha Shrivastava


Mehboob Shrivastava को इस साल 

“Excellerator” is an award that recognizes individuals who 


demonstrate excellence in their field of work and stand out 


as champions.


Please refer page#21.......


Photo

महबूब को उसकी कंपनी अवार्ड देने की घोषणा की है ....

महबूब सफलता की एक एक सीढ़ी चढ़ता जाता है और मैं अपने पिता के आगे नतमस्तक होती हूँ ....
 आज जो भी हो रहा उनके आशीर्वाद से ....

बस एक कसक है .... जो कभी भी मिट नहीं सकती ....
महबूब को जब नौकरी लगी तो तैय किया गया कि उसकी पहली सैलरी को उसके बुजुर्ग(दादा-दादी ,नाना) को दिया जाएगा .... क्यूँ  कि हमारे घर में कोई पूजा-दान नहीं होता है .... सैलरी आते ही दादा-दादी को उनके मन मुताबिक दे दिया गया और नाना के लिए रख दिया गया कि जब उनके पास जाया जाएगा तो दे दिया जायेगा ..... लेकिन ,हम कुछ दिनों तक ना जा सके और नाना की मौत की खबर आ गई .......... कल(16/6) फादर्स डे है और कल(14/6)महबूब को अवार्ड मिलने की घोषणा हुई .... कसक फिर ..........



Wednesday, 12 June 2013

बेवफ़ाई


अदाकारा जिया ख़ान की मौत से स्तब्ध हूँ .... लेकिन .... ज्यादा स्तब्ध हूँ , आत्महत्या के कारणों को जान कर ....

हमने ,दिल-ओ-जान से जिसे चाहा ,
उस बेवफ़ा ने किसी और को चाहा ,
पता नहीं हम क्यू उनके लिए फ़रियाद करते हैं ,
जो प्यार के बहाने हमें बर्बाद करते हैं ....

बेवफ़ाई .... किसे कहें बेवफ़ाई ....??

मर्द को मोह का श्राप
और
स्त्री को धैर्य का वर
मिला हुआ है ....
फिर सब बातों के लिए
किसी एक को दोषी
क्यूँ ठहराते हैं , हम  .........

शादी से पहले हुये शारीरिक संबंध , प्रेम के किस श्रेणी में आते हैं ....?? अगर वो बलात्कार था .... तो दो बार गर्भपात ....
 दो बार बलात्कार हुआ था .... ??
और तब वो क्यूँ चुप रही थी .... ??

अत्यधिक तप से
पाया गया एक शब्द है
प्रेम
यह मित्रता का सगा भाई है
एक रंग-रूप का
हु ब हु
रु ब रु होना हो
तो
कुछ ऐसे कि
जब कभी भी
लिखना हो प्रेम तो
शब्द मित्रता से
 होकर गुजरते हैं .....
प्रेम तो मधुर और कोमल होता है ....

काम-वासना-अश्लीलता .... प्रेम होने का भ्रम हो सकता है .... !!

सत्य थोड़ा रूखा है .... सत्य से निर्भीकता आती है तो प्रेम से निरभिमानता .... सत्य और प्रेम एक दूसरे के पूरक और आधार हैं .... सत्य का आधार मस्तिष्क है और प्रेम का आधार हृदय है .... सत्य जैसे जानने की बात है तो प्रेम ठीक वैसे ही मानने की बात है .... परिवार प्रेम के विकास की पहली सीढ़ी है .... परिवार में जहां परस्पर प्रेम है .... आपस में आत्मीयता है .... वहाँ पर एक व्यक्ति ,अन्य दूसरे व्यक्ति के दुख को समझता है .... ऐसे परिवेश में एक व्यक्ति ,दूसरे अन्य व्यक्ति के दुख को दूर करने के लिए वैसा ही प्रयास करता है , जैसा कि वह अपने दुख को दूर करने के लिए प्रयास करता है .... जिया ख़ान की माँ का किसी मर्द के साथ बिना शादी के रहना .... "कौन सा प्रेम" को सीखाता है ....

फिर वही बात बेवफ़ाई .... बेवफ़ाई का दर्द अवसाद तक पहुंचा सकता है ..... मौत का कारण बन सकता है .... बेवफ़ाई जान लेवा दर्द होता है .... समझ सकती हूँ .... लेकिन .... तब , जब कभी प्रेम मिला हो .......
!!


Sunday, 9 June 2013

एकतीस साल गुजराती गई




एकतीस साल गुजराती गई
कुछ यादें जोड़ती गई
कुछ यादें विछुड़ती गई
एकतीस साल गुजराती गई
जेठ का महिना मिला था
रेगिस्तान के रेत पर
नंगे पैर दौड़ती गई
एकतीस साल गुजराती गई
रास्ते में चट्टान मिला
ठोकर खाती गई
ठोकर मारती गई
एकतीस साल गुजराती गई



समुंदर में सैलाब सा जीवन मिला
नाक तक पानी में
उतरती गई
उबरती गई
उबारती गई
एकतीस साल गुजराती गई
गिला-शिकवा ना रहा
माफ करती गई
माफी मांगती गई
एकतीस साल गुजराती गई
शूल निकाल
फेंकती गई



फूल जुटा
सँजोती गई
सहेजती गई
संभालती गई
एकतीस साल गुजराती गई
मुस्कुराती गई
भार्या-जननी-
धरा बनती गई
एकतीस साल गुजराती गई
दुआ करती गई
फिर नज़र
 ना लगे किसी की
नज़र तो अपनी ही लगती है
एकतीस साल  गुजारती गई
!!








जीत गई
जी गई
जीती गई
एकतीस साल गुजारती गई ....







Wednesday, 5 June 2013

जीवन 80% आनंद है और 20 % दुख है .... The best creation of God ....


Never blame any one in LIFE ,
WORST people give a LESSON
BAD people give EXPEREINSE
GOOD people give HAPPINESS
BEST people give MEMORIES

۞
दुनिया को बदलना है .... पहले खुद को तो बदल लीजिये ....
किसी ने कहा , अपनी शक्ल भी तो आईने में देखो ....
۞
किसी ने कहा दुनिया ही एक आईना है , जिसमें सबका Attitude(मुद्रा-व्यवहार)Reflect (टकराने के बाद वापस मुड़ना .... अर्थात , जैसा जायेगा , वैसा ही मिलेगा) होता है ....
बोये पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय ....
۞
किसी ने कहा एक चम्मच घी हवन में डालो .... अग्नि अपने माध्यम के द्वारा पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित कर शुद्ध कर देगी..
۞
दूसरों को प्यार के दौलत से मालामाल कर खुद प्रेम से लबालब हो सकते हैं ....
۞
जहां में मुस्कान बाँटिए .... हमें मुस्कान खोजनी नहीं पड़ेगी ....
۞
हमेशा दूसरों की प्रशंसा कीजिये आपकी प्रशंसा करने के लिए दूसरे मजबूर हो जायेंगे ....
۞
आभार व्यक्त कीजिये ,लोग आपके आभारी होगें ही
۞
नफरत करेंगे , नफरत ही तो लौट कर आयेगी ....
۞
जिसकी आदत होती है , दूसरों की निंदा-चुगली करने की , उसकी निंदा क्यूँ ना हो भला ....
۞
दूसरों के प्रति गुस्से की भावना रखना अपने लिए उनके मन में गुस्सा पैदा करना होगा ....
۞
दूसरों में अच्छाई देखते हैं तो उन्हें मजबूर करते हैं कि वे भी आपकी अच्छाई ही देखें ....
۞
आप दूसरों में आशा की किरण देखते हैं , यह आपके भीतर की आशा दिखलाई पड़ती है ....
۞
आप में चिल्लाने की आदत है तो सभी आप पर चिल्लायेगें ही ....
۞
जुबान से मधुर होना चाहिए .... नहीं तो अच्छे स्लोगन तो दीवारों पर भी लिखे होते हैं ....
۞
एक अच्छा श्रोता बनिये .... धैर्य पूर्वक दूसरों की बातें सुनिए .... आपकी बात भी जरूर सुनी जाएगी ....
कम बोलने की आदत होगी तो उम्दा बातें बोलियेगा .... नहीं तो सब कहेगें कि बकर-बकर तो करता ही रहता है .... एक चुप्पा सौ वक्ता पर भारी ....
۞
अपने अंदर दूसरों को समझने की शक्ति को पनपने दीजिये .... तभी तो आप को दूसरे समझ पाएंगे ....
۞
किसी की भी मदद के लिए तत्पर रहिए .... कोई जरूरी नहीं कि जब आप को जरूरत हो कोई की मदद की तो वही आपकी मदद करे जिसकी आपने मदद किये थे ....  लेकिन कोई ना कोई आपकी मदद जरूर करेगा .... ऐसा मेरा खुद का अनुभव कहता है ....
۞
जब एक जैसे विचारों और भावनाओं वाले दो लोग आमने-सामने होते हैं तब कम्यूनिकेशन के लिए शब्दो कि जरूरत नहीं होती .... चेहरे के भावों ,आँखों से सबकुछ कहा और सुना जा सकता है .... "न बोले तुम न मैंने कुछ कहा" जैसे हालात होते हैं ....
۞
और
इंसान ही क्या जानवर भी हमारी भावनाओं के सिग्नल पकड़ते हैं .... कई बार गौर की हूँ .... जब किसी कुत्ते के पास से गुजर रही होती हूँ तो या तो वो मुझे घुरना भौंकना चाहता है या पास आकर भी
दुम हिलाने लगता है सिर झुका देता है जैसे कह रहा हो प्यार करो ....
वो इस लिए होता ... कभी या तो मैं कुत्ते को देख कर डर रही होती हूँ या किसी-किसी कुत्ते को देख कर उसके साथ खेलने का मन कर रहा होता है ....
۞
इन फीलिंग्स को मोटा-मोटी तौर पर दो भागो में बांटा जा सकता है .... एक समूह है 'डर' ,
जिसके कारण गुस्सा,शर्म ,ईर्ष्या ,दुख ,आत्मा ,संशय और भी दूसरे नकारात्मक विचार मन मेन आते हैं ....।
दूसरा समूह है 'प्रेम'जो हमारे भीतर शांति ,आशा,पवित्रता का .... सबसे जुड़ कर चलने का भाव
, दया साहस करुणा और जोश जैसे भाव जगाता है ....
۞
हमारी 50% भावनाएं बॉडी लैंग्वेज के जरिये कम्युनिकेट होती हैं .... 40 % भावनाएं लहजे यानि कि तों से और सिर्फ 10% भावनाएं ही शब्दों के जरिये दूसरों तक पहुँचती है .... आनंद सजगता सतर्कता और दया के क्षणों में जीना ,एक बच्चे की तरह रहना ,दिव्यता है .... अपने अंदर के अहम से मुक्त होकर सबके साथ बिना किसी संकोच के सहज रहना सम्मान से रहना सीखा देता है जीवन में किसी तरह का बदलाव हम वर्तमान में ही कर सकते हैं अतीत तो केवल आईना दिखा सकता है ....। वैज्ञानिक आइंस्टीन ने भी कहा है कि "विज्ञान मानुषी को अपरिमित शक्ति तो दे सकता है पर वह उसकी बुद्धि को नियंत्रित करने कि सामर्थ्य नहीं प्रदान कर सकता है ....
۞
जीवन 80% आनंद है और 20 % दुख  है .... लेकिन हम उस 20 % को पकड़ कर बैठ जाते हैं और उसे 200 % बना लेते हैं यह जान-बुझ कर नहीं होता बस हो जाता है ....
विश्वभर के डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास आने वाले 90% मरीज ‘मनोदैहिक’बीमारी से ग्रसित होते हैं .... कुछ मानसिक बीमारियों में से ,बड़ी खतरनाक बीमारियाँ हैं ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या 'पक्षपात’.... हम काम ,क्रोध ,मोह ,लोभ ,अहंकार को त्यागने की सोचते हैं , परंतु हम कभी ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या 'पक्षपात’से निजात पाने का उपाय ढूँढने का कोशिश नहीं कराते .... जो सबसे ज्यादा जरूरी होता है .... मुझे लगता है .... निस्वार्थ प्रेम को अपना कर और अपने मनोदशा(मूड)को समझ कर मनोदशा को नियंत्रित रखने की प्रक्रिया को अपना कर ही ‘ईर्ष्या’और ‘पूर्वाग्रह’या ‘पक्षपात’पर नियंत्रण रख सकते हैं ....
۞
जिसने अपने मनोदशा पर नियंत्रण पा लिया .... समझो जग जीत लिया .....

If you see the Moon 
you can see 
the beauty of God 
If you see the Sun 
you can see 
the power of God 
&
If you see the Mirror 
you can see 
the best creation of God 
~~


Saturday, 1 June 2013

ये सही तो नहीं है ना .... ??


ध्यान(योग)की सारी विधियाँ जागरण की विधियाँ ही होती हैं ....
कैसे भी हो बस जाग जाना है ....कोई अलार्म लगा कर जाग जाता है …
 कोई पड़ोसी से कह देता है कि द्वार पर दस्तक दे दे कर जगा दे ….
कोई अपने घर के ही अन्य सदस्य को कह देता है कि आँख पर ठंढे पानी की छीटें मार-मार कर जगा दे ….
और
 जिसे पता है , समझ है थोड़ी ,
वो खुद अपने आप से कह कर सो जाता है ; हे ईश्वर मुझे ठीक समय पर जगा देना ....

 (मैं भी उन्हीं बंदो में से एक हूँ …. इतनी उम्र हो गई मेरी ,कभी भी ,किसी की भी ,सहायता नहीं लेनी पड़ी …. मुझे किस समय ,सुबह उठना है ,बस सोचने की जरूरत पड़ी ....चाहे रात के 2 बजे या 4 बजे सुबह .... ठीक उसी समय मेरी नींद खुल जाती रही है और मैं घड़ी पर नजर डालती हूँ ,तो वही समय हो रहा होता है .... …. जीतने बजे मुझे उठना था .... ऐसा नहीं है कि गहरी नींद  ना आती हो या रात में बार-बार नींद उचटती हो ....आज तक ये मेरे खुद के लिए भी आश्चर्य की बात रही .... लेकिन आज रहस्य का पता चला .... खुदा का तौहफा है)

और आश्चर्य की बात है कि ठीक समय पर कोई उसे उठा देता है ....
 क्यूँ कि सबके शरीर के अंदर ही एक घड़ी है जो काम करती है ....
अब तो वैज्ञानिक भी इस घड़ी से राजी हो गए हैं ....तभी तो सभी को ठीक वक़्त पर भूख लग जाती  है .... ठीक समय पर नींद आ जाती है और ठीक समय पर नींद खुल जाती है .... किसी वजह से थोड़ी देर हो जाए तो पेट कुलबुलाने लगता है .... शरीर की घड़ी कहने लगती है कि अब बहुत देर हो रही है , कुछ खाओ नहीं तो बस गड़बड़ हो जायेगी .....
अगर सोने का समय हो गया है और बिस्तर पर नहीं जा पाएँ तो भी पलकें झपकने लगती है ....शरीर  की घड़ी कहने लगती है , बिस्तर पकड़ो नहीं तो शरीर लुढ़केगा-जकड़ेगा ....
अगर सुबह जगने का समय हो गया हो और जरा आलस की वजह से सोने के थोड़ा लोभ से बिस्तर पर पड़े रहें तो सिर भारी हो जाता है और फिर पूरे दिन सुस्ती पकड़े रहती है .... अत: समय हो जाये  तो शरीर के घड़ी के कहे अनुसार उठ जाना चाहिए .... अगर मन से छिना-झपटी भी करनी पड़े तो करनी चाहिए .... शरीर को खींच कर भी बिस्तर से बाहर निकाल लेना चाहिए .... क्यूँ कि जागना तो होगा ही .... अन्यथा समय के साथ , जीवन भी व्यर्थ चला जाएगा .... प्रतिपल हांथ से गंवा देगें एक परम संपदा ....
और कैसे-कैसे धोखे देते हैं , कोई-कोई अपने आपको .... पहला सबसे बड़ा धोखा तो यही है कि वो सोचने लगता है कि वो जगा हुआ ही तो है .... आँख खुली ही तो है .... दुनिया को देख ही रहें तो हैं .... चल-घूम रहें हैं .... उठ रहें हैं .... बैठ रहे हैं .... सड़क से गुजर रहे हैं .... घर आ-जा रहे हैं .... दफ्तर आ-जा रहें हैं ....
हर किसी से टकरा तो नहीं रहे हैं ....  तो जगे हुये ही तो हैं .... पर ये सबसे बड़ा धोखा है .... क्यूँ कि जिसने यह मान लिया कि वो जगा हुआ है .... अब वह और जागने का .... अंतर-आत्मा को जगाने का कोई प्रयास नहीं करगा ....
ये सही तो नहीं है ना .... ??

Tuesday, 28 May 2013

Mrs.मोतिया


मेरे ब्लॉग के पिछले पोस्ट पर मेरे एक बेटे का कहना था कि कहानी के पात्र को बदल दिया जाये तो पुरुष की जगह महिला होगी सज़ा की हकद्दार ....
उन्हे कहना चाहती हूँ .... किसी भी ऐसी घटना में दोषी दोनों होते हैं , बराबर के .... क्यूँकि ऐसी किसी वारदात तो दोनों के शामिल होने से ही घटित होती है ....
चुकि मैं पीड़िता को जानती हूँ .... तो मैं पुरुष के लिए सज़ा की मांग कर रही हूँ ....मेरे वो बेटे के कोई पीड़ित पुरुष होगा .... जिसकी पत्नी बेवफा होगी .... जिस घटना को मैं लिख रही हूँ ,उसमें भी तो एक बदचलन पत्नी भी तो है .... वो है, दूसरी औरत .... जो अपने पति से बेवफाई ही तो कर रही है ....सज़ा उसे भी तो मिलनी चाहिए ....
खैर ....
पत्नी को अपने विश्वास टूटने पर सब विखरता नज़र आया ..... पत्नी दुख और गुस्सा के ऐसे सैलाब में डूबी कि पहले तो उसे लगा कि वो खुद को खत्म कर ले ....जीने का कोई वजह नहीं रह गया है .... अवसाद ,पत्नी को भी तो हो सकता है .... लेकिन जो जुझारू रही हो .... उसे अपने इस विचार को त्यागने में कुछ घंटे लगे .... फिर सोची अलग हो जाये .... लेकिन अलग होने के पहले अपना भड़ास तो निकाल ले .... इस लिए पति पर चिल्लाना शुरू की .....
जो पत्नी कभी भी किसी को भी एक अपशब्द .... एक गाली अपने इतने लंबे जीवन में ,मज़ाक में भी नहीं बोली होगी .... वो जीतने गाली दे सकती थी .... दी .... ऐसे-ऐसे शब्द बोली कि मैं यहाँ लिख नहीं सकती हूँ .... पति बहुत परेशान हुआ .... उसे अब तक समाज में , परिवार की कमाई अपनी इज्जत मिट्टी में मिलती नज़र आई .... बहुत समझाने का प्रयास किया अपने पत्नी को ....

पति ,पत्नी से बोला :- मैं कोई बेबवफ़ाई नहीं किया हूँ .... आज भी सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हूँ .... स्थिति को समझो ....

पत्नी पुछी :- तुम्हें जो msg  आते हैं या तुम जो msg करते हो .... वैसा कोई मुझे करे तो बर्दास्त कर लोगे .... ?? वो सब मैं तुम्हारे रखैल के पति को बताना चाहती हूँ .... मुझे उसके घर ले चलो .... जिसके लिए उस पत्नी के पति नहीं तैयार हुये ....

पति बोला कि :- एक बार और मुझे मौका दो .... ऐसा कुछ नहीं करो .... वो औरत संयुक्त परिवार में रहती है .... देवर - जेठ का परिवार रहता है .... अगल-बगल में किराएदार रहता है .... हँगामा मत करो .... वो कुछ महीनों में मर जायेगी .... उसे चैन से मर जाने दो ....

ऐसा कैसे हो सकता था कि पत्नी का सब कुछ लूट लेने वाली को कुछ पता ना चले .... वो पति पर ज़ोर देने लगी .... उस औरत को फोन करो .... मैं उससे बात करूंगी .... पति टालता रहा .... लेकिन इस बार पत्नी पर जैसे किसी और का साया हो .... वो जिद करती रही .... फोन होना शुरू हुआ .... लेकिन वही हालात .... पूरा रिंग होकर कट जाये .... और फोन कोई उठाए नहीं .... दिन बैचनी में और रात आंखो में कट गई .... दूसरे दिन सुबह 6 बजे पत्नी अपने पति के ही mobile से phone की 
तो वो औरत ही phone उठाई :- hello

पत्नी :- कैसी हो ?

रखैल :- ठीक नहीं हूँ .... कल सिर में बहुत दर्द हो गया था ....

पत्नी :- ऑफिस नहीं जा रही हो ?

रखैल :- जाती हूँ .... सब बहुत तंग करते हैं , छुट्टी देने में .... बहुत गर्मी है तो नाक से खून आ जाता है .... sir ,आपके साहब ही तो मुझे छुट्टी दिलाने में मदद कर देते हैं .... उनकी बात सब सुनते हैं .... छुट्टी मिलने में आसानी हो जाती है .... कोई बात है मैडम ? ....

पत्नी :- नहीं .... कोई बात नहीं है .... कल रात में तुम्हारा Good Night का और आज सुबह में Good Morning का msg नहीं आया तो .... मैं देखना चाही कि तुम्हें कुछ हो तो नहीं गया है ....

रखैल :- कुछ हुआ है ? .... कोई बात कहनी है ? ....

पत्नी :- नहीं .... कोई बात नहीं है .... तुम आराम करो .... फिर बात होगी .... फोन रख रही हूँ .... ना जाने क्यूँ पत्नी को कटु बात करने कि इच्छा नहीं हुई ....

फोन रख देने के बाद भी पत्नी को चैन नहीं मिला .... अकेली बैचैनी में दिन-रात कटी .... पत्नी के पति एक शादी में चले गए थे ....
फिर दूसरे दिन करीब 8-8:30 बजे सुबह में उस औरत को पत्नी फोन की .... फोन वो औरत ही उठाई ....

औरत :- hello

पत्नी :- आज मेरे पति से तुम्हारी बात हुई है ? 
शक का कीड़ा न जीने देता है न मरने ....

औरत :- नहीं .... कल रात में मेरे पति के पास Sir साहब का फोन आया था .... उनका फोन खराब हो गया है ना ? खराब था ? .... उसे ठीक करवाने के लिए बोल रहे थे ....

पत्नी :- उनका फोन परसो मैं ही गुस्से में पटक कर फोड़ दी थी .... कुच-कुच कर चकनाचूर कर दी थी .... तुम जो msg करती हो या मेरे पति जो msg तुम्हें करते हैं .... वो तुम्हारे पति जानते हैं ?

औरत :- नहीं ....

पत्नी :- कोई कमी है तुम्हें ?

औरत :- नहीं .... मुझे किसी चीज की कमी नहीं है .... मेरे पास सब चीज है ....
पत्नी :- तुम्हारे पति को कोई दूसरी औरत ऐसा msg करती तो तुम्हें कैसा लगता ?? ....

औरत :- मैं तो मर ही जाती मैडम जी ....

पत्नी :- तो तुम क्या सोच कर ऐसा msg की ,कि मैं मर जाऊँ .... मैं मरने वालों में से नहीं हूँ .... मारने वालों में से हूँ .... तुम्हें और तुम्हारे पति और अपने पति को भी मार डालती .... लेकिन उसके बाद भी तो मुझे भी तो मरना ही  होता ....

औरत :- आप गलत समझ रही हैं , मैडम जी ....  Sir साहब सब की मदद करते हैं .... मैं उन्हे भगवान की तरह मानती हूँ ....

पत्नी :- तुम अपने को मीरा-राधा समझती हो .... मुझे कृष्ण-राधा+मीरा का प्रेम भी समझ में नहीं आता है .... भगवान ऐसे msg करते हैं या भगवान को ऐसा msg किया जाता है .... ?? तुम मरने वाली हो ....

औरत :- जानती हूँ मैडम जी ....

पत्नी :- अपने पति से बेवफ़ाई करने में घिन नहीं आई .... मेरे पति मेरे भगवान होने चाहिए थे .... ले जाओ ऐसे भगवान को अपने घर में रखना .... मैं अपने घर से निकाल रही हूँ ....

औरत :- ऐसा नहीं कीजिये मैडम जी .... मुझ से ही गुनाह हुआ है .... मुझे सज़ा दीजिये ....

पत्नी :- तुम्हारे msg से मुझे कोई शिकायत नहीं है .... तुम हरामजादी बेश्या हो .... सज-धज कर ऑफिस जाती थी मर्दो को रिझाने के लिए .... हरामजादी गाली किसे दिया जाता है .... पता है .... ?? आज तुम्हारे कारण तुम्हारी माँ को भी गाली सुननी पड़ी .... तुम्हें मैं एक बेटी की तरह समझती थी .... क्यूँ कि तुम मेरे पति के साथ काम करने वाले की बेटी थी .... जो बाप के मरने के बाद अनुकंपा पर चतुर्थवर्गीय की नौकरी पर काम कर रही थी .... तुम अपनी  औकात भूल गई थी .... तुम्हारा पति ऑफिसर था .... तो तुम्हें चतुर्थ वर्गीय नौकरी छोड़ देनी चाहिए थी .... तुम मेरे बराबरी में मेरे स्तर  की होती .... तुम्हें ऐसे msg करने के पहले कुछ सोचना चाहिए था .... तुम अभी अपने पति के साथ मेरे घर आओ .... नहीं तो मैं आती हूँ .... तब क्या होगा .... इसकी कल्पना भी नहीं कर सकती तुम ....

औरत :- plz .... मैडम जी .... मेरे पति को कुछ नहीं बताइये - कुछ नहीं कहिये ....

पत्नी :- क्यूँ ? मुझे तुम्हारे पति को सब बताना भी है .... और साथ में राय भी देना है .... आज तुम्हारी पत्नी मेरे पति के साथ है .... कल तुम अपनी बेटी को मेरे पति के साथ कर देना .... उनकी जिंदगी कट जायेगी ....

औरत :- plz ..... मैडम जी मुझ से गुनाह हो गया हैन .... अब मैं क्या करूँ .... मेरे गुनाहों की सज़ा–बददुआ मेरी बेटी को मत दीजिये ....

पत्नी :- आओ तो तुम .... देखूँ कि तुम मुझसे नजरे कैसे मिलाती हो .... ??
औरत :- plz .... plz मैडम जी ऐसा नहीं कीजिये .... plz मैडम जी ....

पत्नी :- तुम आओगी , कि मैं आऊँ .... ??

औरत :- plz .... कृपा कीजिये मुझ पर .... दया ही कीजिये .... अब मैं कितना दिन जियूँगी .... मुझ से अब आपको कोई दुख नहीं मिलेगा .... plz ,मैडम जी .... मुझ से कोई सहानुभूति नहीं .... कोई दया नहीं .... तो मेरे बच्चो पर रहम कीजिये  .... plz मैडम जी ....

पत्नी निरा बेबकूफ .... शाम में जब उसके पति आए तो बोली कि आज फिर वो उस औरत से बात  की है .... सब बात बताई .... पति का सिट्टी-पिट्टी गुम .... मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी .... कुछ देर के बाद ... बहुत हिम्मत कर के , थूक निगलते हुये ,थर्रायाये गले से पति अपनी पत्नी से बोला :- मुझ से गलती हो गई ... मुझे जो सज़ा देनी हो तुम दो .... समाज में जलील ना करो .... मुझे जलील कर के या उसे ,उस औरत के पति को सब बता कर तुम्हें क्या मिलेगा ....

पत्नी :- संतुष्टि ....। आत्म-संतुष्टि .... ना बताऊँ .... ?? क्यूँ ना बताऊँ .... ?? ना बताऊँ तो क्या मिलेगा .... ?? जो मुझे खोना था मैं खो चुकी .... क्यूँ नहीं बताऊँ .... ?? पत्नी तो बिफर रही थी ....

पति :- तुम कुछ नहीं खोई हो .... वो केवल सहानभूति था .... मैं उस औरत से कभी नहीं मिलूँगा .... ना कभी msg करूंगा .... कल भी तुम्हारा था .... आज भी और आने वाले कल में भी तुम्हारा ही रहूँगा ....

पत्नी :- अब मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकती .... कभी कर ही नहीं सकती ....

पति :- आज मैं कुछ क्या बोलूँ .... बस एक मौका दे दो .... हमें जलील ना करो ....

समाज का डर पति और उस दूसरी औरत के बीच का भगवान और भक्त का नाता पानी के बुलबुले या रेत के महल साबित हो रहे थे (ये तो समय तैय करेगा) पत्नी को लगा कि ये डर उनदोनों को दूर कर देगा )
क्षमा और विश्वास कोई चीज है .... जो कोई किसी को भी बार-बार उठा कर दे दे .... ??
लेकिन ....
पत्नी एक मौका देने के लिए अपने को तैयार करने लगी .... या यूं कहें हो गई है ....
उसका दिल कोई टूटा शीशा था .... जो उठा कर कूड़ेदान में फेंक दे .... दिल तो बार-बार टूटने के लिए ही बना है ....

ऐसी पत्नी को (जो महान बनाने के चक्कर में होती हैं)को मेरी मित्रा-भाभी Mrs.मोतिया(कुतिया) बुलाती हैं .... Mrs.मोतिया(कुतिया)श्रेणी की पत्नी को जरा चोट लगी .... उछल-कूद ... धूम-धड़ाम ... घुरना-गुर्राना ... चीखना-चिल्लाना करती हैं .... जैसे कोई शेरनी हों .... अब जीवन लील कर ही .... किसी की जिंदगी समाप्त कर के ही दम लेगी .... लेकिन .... और जरा सा खोखले प्यार का भी गोस्त-विहीन सुखी हड्डी भी मिली .... कि .... पतली सी दम को टीक-टीक  हिलाती हुई पति के सामने बिछ जाती हैं और अपने अस्तित्व को समाप्त कर डालती हैं  ....
इस बार देखते हैं ,Mrs.मोतिया में कितनी हिम्मत हैं , कि कितनी बार वो सजती-सँवारती .... टूटती-विखरती .... समेटती-संभालती .... बैठती-उठती हैं .... अपने रोएँ झाड़ कर .... अभी तो Mrs.मोतिया मुस्कुराना भी भूल गई हैं ....
बस आप भी दुआ कीजिये कि Mrs.मोतिया ,अपने को अवसाद से पूरी तरह बाहर निकाल लाएँ ....

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Sunday, 26 May 2013

क्या सज़ा मिलनी या होनी चाहिए .... ??


एक पत्नी जब भी अपने पति का mobile छूती .... उसके पति झपाटा मार कर mobile छिन लेते और अक्सर डांट पड़ती पत्नी को कि वो पति का mobile ना छूए .... किसी का फोन आए तो वह फोन ना उठाए .... ऐसा मौका कम ही मिलता .... जब कभी वो mobile छूए और उसके पति आस-पास ना हों .... लेकिन पत्नी को भी ,पति का फोन छूना - देखना अपना हक़ समझती अच्छा लगता .... कभी – कभी जब ऐसा मौका मिलता .... वह उस फोन का msg पढ़ती .... msg-box में एक नंबर से ही हमेशा प्यार में पगी पगली का msg होता .... पत्नी को पढ़ कर ,बड़ा अजीब लगता .... कभी तो पढ़ कर छोड़ देती .... कभी वो अपने पति से सवाल करती कि ये किसका नंबर है , जो आपको इस तरह का msg करती है .... पति अक्सर टाल जाते कि अनजाना नंबर है .... उन्हें इसके बारे में नहीं पता .... पत्नी झुँझलाती - कहती कि आपका नंबर उसके पास कैसे आया होगा .... तो पति बोलते कि वो सरकारी नौकर हैं .... जनता के सेवक हैं .... उनका नंबर निकालना कौन सा मुश्किल काम है .... कोई मज़ाक करता है .... मुझे इतनी फुरसत कहाँ कि पता करूँ कि कौन मेरे से इतना प्यार करता है .... कभी वो ही नंबर ,missing नंबर में भी होता तो .... कभी receiving में भी होता तो .... उनका जबाब हाजिर होता .... फोन आया था .... hello किया तो कट गया .... मज़ाक में आई - गई बात हो जाती ....
खैर ....
 ये वर्षो चलता रहा .... हाल के दिनों में Good Morning .... Good Night के msg भी आने लगे .... पत्नी को जब मौका लगता पढ़ कर .... कट कर रह जाती .... जबाब तो उसे मालूम ही था , क्या मिलेगा ... कभी , अगर वो अपने mobile से या land-line से फोन करती तो उसे कोई उठाता ही नहीं .... पूरा रिंग हो कर कट जाता ....
लेकिन .... एक बार receving call को पत्नी उठा ली और जब तक वो कुछ बोलती , उधर से आवाज आई और फोन करने वाली ने अपना नाम जो बताई .... उस औरत को पत्नी बहुत अच्छे से जानती - पहचानती थी ....
पति के ऑफिस में ही वो औरत काम करती थी .... बहुत ही खूबसूरत .... चंचल - वाचाल .... धनी ,जाना माना प्रतिष्ठित परिवार से .... पत्नी से प्यार करने वाला सीधा-मासूम पति भी .... सरकारी बड़ा ऑफिसर .... बड़े प्यारे - अच्छे तीन बच्चे दो बेटी एक बेटा ....
पत्नी को विश्वास ही नहीं हुआ कि वो ऐसा कर सकती है .... उसे लगा अभी गलत नंबर लग गया है .... पत्नी को तब भी कोई शक अपने पति पर नहीं हुआ ....
इसे कहते हैं आँख बंद कर विशवास करना ....
पति को अपने मेहनत और लगन के बल पर promotion तो नहीं मिला लेकिन उसी पद का जिम्मा मिला .... वो उस पद के लिए हकदार तो हो गए थे .... लेकिन उसमें देरी थी .... क्यूँ कि सरकारी काम था .... promotion सिलसिलेवार ढ़ंग से सब के साथ होने वाला होता है ....
दूसरे दिन न्यूज़-पेपर में न्यूज़ था .... तो शाम में बधाई का msg भी मिला ....
पति अपने पत्नी से बोले कि आज शुक्रवार है .... कल - परसो (शनिवार-रविवार) छुट्टी है .... सोमवार को अपने नए office में कार्यकाल संभाल लूँगा ....
शुक्रवार को ही शाम से रात गुजरने लगी .... करीब रात के 10-10:30 बजे पति महोदय थके - हारे घर आए और बोले कि आज ही उन्हें join करना पड़ा .... ऑफिस वालों के दबाब में .... पत्नी बोली तो एक फोन कर देते कि इतनी देर क्यूँ हो रही थी .... पति चिल्ला पड़े .... तुम्हें तो केवल अपने बारे में सोचना होता है ....  अपने बारे से अलग , दूसरे के बारे में सोचना पड़ता .... तब ना सोच रही होती कि इतना काम था कि दम मारने का फुरसत नहीं था .... ना जाने तुम्हें फोन कैसे करता .... पति बेचारे थके - हारे थे .... खाना खा कर सो गए .... तो पत्नी उनका phone ली , और देखी कि उसमें msg था कि वो सबसे ज्यादा प्यार करती है इस लिए आज join करने के उपलक्ष में सबसे पहले Celebration मेरे साथ होना चाहिये ....
उस दिन भी वो बेबकूफ पत्नी ये नहीं सोची कि ये अचानक हुआ भी तो उसे ये कैसे पता चला ....
पत्नी को कभी ये सोच में भी नहीं आया कि send-box को ही जरा खंगाल ले ....
उसे अपने पति पर पूरा विश्वास था .... उसका मानना था कि जहां प्यार है , वहाँ पूरा विश्वास रहना चाहिए और जहां विश्वास है वहाँ ना तो जलन की गुंजाइश होती है और ना कोई शक का कोई जगह होता है ....
वो बेबकूफ ये नहीं जानती थी कि जहां अति विश्वास होता है , वहीं बारीक रेखा की दूरी पर विश्वासघात रहता है ....
उस रात पत्नी को mobile लंबे समय के लिए मिला तो वो send-box को इस विश्वास के साथ देखी कि उसमें उस औरत को कोई msg उसके पति नहीं किए होंगे ....
लेकिन पत्नी स्तब्ध रह गई जब उसे ये देखने को मिला कि उस औरत के सारे msg का जबाब उतने ही प्यारे अंदाज में दिया गया है .... और सारे सूचनाएँ भी उसके पति द्वारा ही दिया गया है ....
पत्नी के क्रोध का कोई ठिकाना नहीं रहा .... फिर भी सुबह उठ कर नाश्ता बनाई .... नाश्ता करा दी .... तब वो पुछी कि ये msg आप जो किए हैं .... उसका मतलब वो क्या समझे .... ??
पति तब भीय झूठ बोले किया  तुम जिसके बारे में सोचा रही हो वो नहीं है .... ये मेरा ही लड़का साथी है .... तो पत्नी बोली कि आप समलैंगिग हैं .... ठीक है अगर वो लड़का है तो मुझे अपने ही mobile से एक call करने दीजिये कि या वो लड़का है या वो है जिसके बारे में main निश्चित रूप में जानती हूँ .... तब पति दौड़ कर भाग कर bathroom में घुस कर सारे msg और No. को delete कर दिये और पत्नी को समझाने लगे कि जो तुम सोच रही हो एकदम गलत है .... उस औरत को कैंसर है और वह बहुत परेशान रहती है .... उसके मानसिक सांत्वना – संबल देने के लिए मैं इस तरह का msg दे रहा हूँ ....
पत्नी बोली :- ऑफिस के इतने सारे लोगों में एक आप ही उसे मिले .....  अगर आप के मन कोई पाप नहीं था तो जब मैं पुछती थी तो आप मुझे क्यूँ नहीं बताए और आज भी झूठ पर झूठ बोलते रहे .... आप पहले जब भी उससे मिलने जाते थे .... तो मुझे भी बताते थे या मुझे भी साथ ले जाते थे .... एक दिन वो औरत मुझ से बोली कि ऑफिस सब लोग मुझे आपके साहब की रखैल बोलते हैं .... तो मैं घर आकर आपको बोली कि आपके office के लोगों का कितना संकुचित मानसिकता  है कि ऐसी गंदी -घटिया बातें करते हैं .... तब से आप मुझे बाहर कहीं भी ले जाना छोड़ दिये .... और आज उसी औरत से इस तरह का msg का क्या अर्थ निकालूँ मैं .... ?? अगर वो मर रही है तो और जरूरी था , आपको मुझे उसमें शामिल करना .... पति भी माने कि हाँ ,ये गलती हो गयी .... मुझे तुम्हें शामिल(अगर वो पति ,अपनी पत्नी को बता भी देता तो जो msg हुआ था .... उसका उसे अधिकार मिल जाता .... उन msg का कोई गलती नहीं होता ) करना चाहिए था .... वह मेरी गलती है .... उसका जो तुम सज़ा देना चाहो सज़ा दो ....
अब आप ब्लॉगर मित्र बताएं कि उस पति को क्या सज़ा मिलनी या होनी चाहिए .... ??

Saturday, 25 May 2013

औरत को घर बचाना है कैसे बचाए ??........

रामायण में एक प्रसंग है कि राम जब वनवास में थे और एक बार नदी पार करने के क्रम में मल्लाह उनके पैर धो कर नाव में चढ़ने का अनुरोध करता है ,क्यों कि राम जी पैर के धूल लगने से पत्थर भी औरत हो गई थी ....
 खैर ....
प्रश्न उठता है कि दूसरी स्त्री क्यों किसी विवाहित पुरुष को चुनती है ?
इसके कई कारण हो सकते हैं पर उसमें सबसे महत्वपूर्ण कारण है ,पुरुष-प्रधान व्यवस्था .... यह व्यवस्था महत्वाकांक्षी स्त्री को अपने सपने पूरा करने का सीधा रास्ता नहीं देती .... ऐसी अवस्था में वह मजबूत पुरुष के कंधे का सहारा ले बैठती है .... यौनाकर्षण भी ऐसे रिश्ते का एक बहुत बड़ा कारण  हो सकता है ....
अकेली , अविवाहित ,परित्यक्ता ,विधवा ,आश्रयहीन परिवार से उपेक्षित स्त्रियाँ भी ऐसा कदम  उठा  लेती हैं .... पर रिश्ते बन जाने  के बाद  दूसरी औरत को महसूस  होता  होगा  कि उसके  भीतर  के दादी -नानी  वाले  संस्कार  अभी  मरे  नहीं हैं .... और भारतीय  समाज अभी इतना  आज़ाद  ख्याल  नहीं हुआ है  कि अवैध  रिश्तों  को आसानी  से हजम  कर ले ....  तभी उसकी महत्वाकांक्षा  भी उसके  अंदर की रूढ़िवादिता  में घिरी  स्त्री के आगे  हार  जाती  होगी  और वह  पारंपरिक  पत्नी  और माँ  बनाने  के लिए  छटपटाने  लगती  होगी  .... ऐसी मनोस्थिति  में वह  प्रेमी -पुरुष पर दबाब  बनाने  लगती  होगी  ....
वह  भूल  जाती  है कि रिश्ते  बनाते  समय  उसने  सामाजिक  मर्यादा  की शर्त  नहीं रखी  थी .... जब उसने  पहले  पत्नी और माँ  का अधिकार  नहीं चाहा  था  , फिर  वह  सब उसे कैसे मिले  ?
पुरुष चाह  कर भी उसे  यह सब  दे  ही  नहीं सकता  .... यह सब  तो  उसके  पास पहले  से ही  होता  है .... पूरी  सामाजिक  मान्यता  और प्रतिष्ठा  के साथ  ....
दूसरी औरत यह भी भूल  जाती  है कि  अगर  पुरुष उसे  वह  सब दे देता है ,तो  पहली  स्त्री के जायज  हक़  मारे  जाएंगे  ....
लेकिन 
शादीशुदा ,सम्पन्न प्यारे-प्यारे बच्चे प्यार करने वाला पति और एक अच्छी सैलरी पर काम करने वाली औरत दूसरे शादीशुदा मर्द के साथ नाजायज रिश्ता रख कर क्या पाती है ....? आज का बौद्धिक पुरुष मानसिक अर्धगिनी चाहता है वो स्त्री के बौद्धिकता से प्रभावित होता है अगर उसकी पत्नी बौद्धिक स्तर में भी कम ना हो तो .... ?? 
एक स्त्री की बर्बादी  पर दूसरी स्त्री अपना  घर  कैसे  आबाद  कर सकती  है ?
दूसरी तरफ  पुरुष यौनाकर्षण  में दूसरी औरत को अतिरिक्त  आत्मविश्वास  से भर  देता  है .......। पुरुष भी भूल  जाता  है कि यह नवीनता  का आकर्षण  है ,जो  बहुत  जल्द  ही अपनी  चमक  खो  देगा  और होता  भी वही  है ......।
दूसरी औरत को देह - स्तर पर हासिल  करते  ही  नशा  हिरण  हो जाता  है .......। पुरुष को महसूस  होता  है कि देह -स्तर  पर सब  स्त्री एक जैसी  ही  है ......। अत: उसे  दूसरी स्त्री के लिए  अपना  सब -कुछ  दांव  पर लगाना  मूर्खतापूर्ण  कदम  लगने लगता  है और वह बदलने   लगता  है ..........। पुरुष के बदलाव  का जब दूसरी औरत विद्रोह  करने लगती  है ,तब पुरुष उस  दूसरी औरत से छुटकारा  पाने  के लिए घृणित  कदम  उठा  लेता  है और वापस  पत्नी  की शरण  में ही  आ  जाता है …. और  पत्नी  अपने  बच्चों  परिवार  समाज तथा  अपनी पराश्रयता  के  कारण  खून  का  घूंट  पीकर  भी  ऐसे  पति  को  क्षमा  कर  देती  है ....... पुरुष  भी सारा दोष  दूसरी  औरत  पर  मढ़  कर  पल्ला  झाड  लेता  है  …….
ऐसे हालातो  के  बाद  उस  दूसरी  औरत  को  क्या  मिलता  है  …. मारी  जाती  तो  वो  दूसरी औरत  ही  है   ……… एक  तो  वो  दूसरी  औरत  पुरुष  के  प्रेम (जो तो  होता  ही  नहीं है, सिवाय  वासना  के) से  वंचित  हो  जाती  है  ,दूसरे  ये  बौना  समाज  उसे  क्षमा  नहीं  करता  …. ऐसे  हालातों  में  उसके  मन  में  ये  अपराध -बोध  आ  जाता  है  कि  वो  एक  पत्नी  से उसका  हक़  छिनने  का कोशिश  की थी  जिसमें  कुछ  समय  के  लिए  कामयाब  भी  हुई  थी ….
इन  सारी  विसंगतियों  के  कारण  दूसरी  औरत  टूटने - बिखरने  लगती  है  और  उसके पास कोई  संभालने  वाला  नहीं  होता  ऐसे  में  वो  मौत  को  गले से  लगा  बैठती  है  ……
एक  स्त्री  को  पुरुष  की  स्त्री  बनने  के  बजाय  पहले  सिर्फ  एक  स्त्री  बनाना  चाहिए एक पूर्ण  आत्मनिर्भर  स्वाभिमानी  स्त्री  ….. तभी  वह  कठपुतलिपन  से  छुटकारा  पा  समाज  से  अपने अधिकार  पा  सकेगी ....
आत्मनिर्भर  स्त्री  ही  बिना  कुंठित  हुये  तीव्रता   और  साहस  के  साथ   समाज   की  बंद  कोठिरियों  की  अर्गलायें  अपने  लिए  खोल  सकेगी  ……..
ऐसा नहीं है कि पहली पत्नी बहुत सुखी होती  है  …. उसकी छटपटाहट का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता .... पर  …. वह  पति  त्याग  का साहस  नहीं  जुटा  पाती  है  .... कुछ विद्रोह  करती है तो अपना घर तबाह कर  लेती है ….
हर हाल में  घर  बनाने  से  लेकर  बिखरने  के   हालात  तक  की जिम्मेवार  एक  औरत ही होती है ?? …………
बस  एक  औरत  ??
दादी को सजना सीखना है
माँ को घर संवारना है
पत्नी को नहीं बिखरना है
औरत को घर बचाना  है
कैसे बचाए .........
??

विभा रानी श्रीवास्तव

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अदर्ज लेखा

“भैया ने मुझे तीन लाख रुपये कब दिए?” “यह किसने कहा?” “आपने छोटी भाभी से कहा है न?” “चुग़लीखोर से मैंने सिर्फ़ इतना कहा था कि गृहप्रवेश पर एक...