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देवनागरी में लिखें

Tuesday, 15 October 2013

ख्याल रखें .... इसलिए ना कहना सीखें .....



नौकरी करी तो ना ,ना करी
ना करी तो नौकरी ना करी

कहने सुनाने में बहुत आसान है
लेकिन
कभी कभी बहुत महँगा हो सकता है .....
सब ख्याल रखें .....
हमारे एक बहुत करीबी ,कई दिनों से सरकारी कार्य से टूर पर थे ….
कल लौटे और कल ही शाम ६ बजे से आज सुबह ८ बजे तक ऑफिस में काम किये ….
फिर ऑफिस से घर आये और घर आते ही उनकी मौत हो गई ….
उन्हें पहले से हार्ट प्रॉब्लम पहले से था ….
 तूफानी  हवा - बारिश और
थकान तथा वर्क प्रेशर या
मानसिक दबाब या
सब का मिला जुला असर उनकी जान ले गई ….
वे तो मुक्त हो गए ....
पीछे छोड़ गए अपनी पत्नी को ....
इस बेदर्द समाज में ….
जहां कोई किसी की नहीं सुनता…
 समझना तो दूर की बात है ….
इसलिए ना कहना सीखें ....

19 comments:

  1. मार्मिक प्रस्तुति. सवाल तो लाजिमी है.

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  2. आज के हालात में वर्क प्रेसर इतना बढ़ गया है कि ऐसी दुखद स्थितियां आम हो गई हैं ...बहुत सार्थक प्रस्तुति

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  3. जीवन सबसे जरूरी है. उसके बाद ही सब कुछ. दुःख हुआ जानकर.

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  4. अत्यंत दुखद स्थिति में जीवन से हाथ धोने वाले महानुभाव को हार्दिक श्रद्धांजली।
    आपका परामर्श बेहद सटीक है कि खास तौर पर नौकरी में 'न' कहना भी आना चाहिए। इसी प्रकार का परामर्श यशवन्त को मेरठ में उसी के एक अधिकारी ने दिया था। मेरठ में ही 1973 में मुझसे हमारे चीफ एकाउंटेंट सरदार अरुण भल्ला साहब ने कहा था कि हम लोग सहयोगी हैं -अफसर या मठट नहीं। नौकरी करते हैं लेकिन दब के नहीं।

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  5. आज के हालात ही कुछ ऐसे हैं..

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  6. आपकी यह रचना आज बुधवार (16-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 147 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
    एक नजर मेरे अंगना में ...
    ''गुज़ारिश''
    सादर
    सरिता भाटिया

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    1. This blog is open to invited readers only

      http://guzarish.blogspot.com/

      मेरे दर्द को साँझा करने के लिए धन्यवाद और आभारी भी हूँ
      हार्दिक शुभकामनायें

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  7. कल 17/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    1. मेरे दर्द को साँझा करने के लिए धन्यवाद और आभारी भी हूँ
      हार्दिक शुभकामनायें

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  8. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-17/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -26 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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    1. मेरे दर्द को साँझा करने के लिए धन्यवाद और आभारी भी हूँ
      हार्दिक शुभकामनायें

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  9. दुखद .. बात सही है नौकरी में भी न कहना सीखना होगा .. साथ ही मालिकान को भी समझना चाहिए की अगर किसी को काम के पैसे दे रहे तो वो उनका जरखरीद गुलाम नही हो गया .. उसके जीवन के वो हकदार नही ..मानवीय मूल्यों को समझना हम सब के लिए जरुरी है ..

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  10. सही बात ...सेहत का ख्याल भी जरूरी है|

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  11. मार्मिक प्रस्तुति !

    @ Raj
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  12. मार्मिक प्रस्तुति

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