Saturday, 20 June 2015

हाइकु








हाइकु के नियम बहुत पहले से थे
मुझे जानने में देरी हुई

विशेषण का प्रयोग ना हो
दो हिस्सों में दो बिम्ब स्पष्ट हो
प्रकृति का मानवीकरण ना हो
पांच इन्द्रियों से जो हु ब हु अनुभव हो उसका ही वर्णन हो


सन्ध्या का आलोक

दिन अपनी अन्तिम देहरी पर ठिठका खड़ा था। पार्क में पुराने नीम के नीचे बैठे लगभग पचहत्तर-सतहत्तर वर्षीय वृद्ध अपने घुटने सहला रहे थे। हर शाम उ...