Tuesday 24 October 2023

घर्षण


"दो बार का मस्तिष्काघात और एक बार का हल्का पक्षाघात सह जाने वाला पति का शरीर गिरना सहन नहीं कर पाया। कलाई की हड्डी टूट गयी। सहानुभूति रखनेवालों का पत्नी के पर कुतरने का प्रयास जारी है।"
"मेरे पति मेरे लिए मित्र से बढ़कर थे। उनके मृत्यु के बाद उनके रिश्तेदारों ने मेरे नौकरी करने, बाहर जाने-आने पर रोक लगाने के लिए रुढ़िग्रस्त पाँच-दस कारणों का आधार बनाने लगे तो मेरे बेटों ने मेरा साथ दिया कि मैं अपने शर्तों पर जीना शुरू कर सकी।"
"वन में सीता का सती अनसूया से भेंट, सीता का अपहरण, अग्नि परीक्षा देने की बातें, वन में लव-कुश का जन्म पालन-पोषण, भूमि में समा जाने की बातें मिथक कथा में फैलायी नहीं गयी होती तो क्या स्त्रियों से इतने धैर्य की उम्मीद की जाती••!"
"मिथक कथानुसार सीता स्वयं रावण का नाश कर सकती थी।लेकिन उदहारण देना था, मुश्किलों में जीवन साथी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। हालात का निडरता के साथ सामना करना चाहिए। एकदम से किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए••!"
"कलयुग के पिता अपनी सुता के साथ खड़े हो रहे हैं। क्या राजा जनक को इतना सामर्थ्य नहीं था कि वे अपनी एक गर्भवती बेटी का साथ दे पाते••!"

Wednesday 18 October 2023

उधेड़बुन : उपचारिका की डायरी : एकालाप शैली

26 जनवरी 2006

पद्मश्री थामते हुए रोयें गनगना नहीं रहे थे। रोयें फ्लोरेंस नाईटिंगेल पुरस्कार छूते हुए भी नहीं गनगनाये थे। चिकित्सा का लाभ उठाने के लिए सुनामी से प्रभावित जनजाति जिन्हें नेग्रिटो नस्लियों स्टॉक कहा जाता था को मनाने में छठी का दूध याद आना हो जाता था। लेकिन चुनौती के दाँत खट्टे कर ही डाली।

25 जून 2014

बता दूँ! नहीं बताती हूँ! झूठ कैसे बोलूँगी... बता ही देती हूँ! लेकिन बता देने के बाद जो परिणाम होगा उसकी जिम्मेदारी किसके कन्धे पर होगी। सेक्सटॉर्शन में फँसकर बुजुर्ग ने आत्महत्या करने का प्रयास किया है। दो दिन के उलझन के बाद आज बुजुर्ग के बेटे को बता ही दिया। उसने वादा किया है। शान्ति से सोच समझ कर समस्या का हल निकालने में मेरी मदद लेगा।

14 अगस्त 2016

आज न्यायालय से हमारी शादी का पंजीयन हो गया। रिश्तेदारों का मानना था कि धनी परिवार की लड़की के लिए उपचारिका का पेशा बिलकुल सही नहीं है। इसलिए मैंने शादी ही नहीं करने का निर्णय लिया था। लेकिन सौगन्ध थोड़े न खायी थी। सेक्सटॉर्शन से उबरे बुजुर्ग और उनके बेटे की ज़िद के आगे मेरा निर्णय टिक नहीं सका।

20 मार्च 2020

आज हमारे अस्पताल में एक आकस्मिक मीटिंग के लिए बुलाया गया था। मीटिंग में हमें बताया गया कि हमारा हॉस्पिटल कोविड के मरीजों को भर्ती करेगा और हमें खुद को इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार करना होगा। हम घर परिवार से दूर होंगे। मेरी बेटी एक साल की रिया को छोड़कर कैसे जाऊँ? अस्पताल ने मेरा नाम पुन: राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए भेजा है। नहीं जाऊँ तो श्रम से की गयी सेवा के बदले जो सम्मान मिला है वह धूल धुसरित हो जायेगा!

Thursday 5 October 2023

धर्म में शर्म नहीं!

मेरी परिचित कहती है, "स्नान नहीं करना, घड़ा, आचार नहीं छूना।"

"आज भी कुछ घरों के मंदिर में मिलता प्रवेश नहीं है, क्या पूर्वजों के बनाए नियम में दोष नहीं है!"

"आराम का संदेश, सभी नियमों में अहित समावेश नहीं है। ये जो हमलोगों को मिली नियति से शक्ति है, क्यों तुम और तुम्हारी सखी झिझकती है!"

"पैड प्रयोग करने की जागरूकता बढ़ी है। लेकिन कूड़ा निपटाने की समस्या ज्यादा सर चढ़ी है।"

"रुढ़ियों को तोड़ों! स्वास्थ्य को बचाना है, पढ़ो-लिखो आगे बढ़ते जाना है।"

"हमारे घरों की सहायिकाओं को स्काउट गाइड में प्रवेश दिलवाना है।"

"अवश्य! उत्तम प्रशिक्षण। ना इसमें ना कोई भेदभाव है ना जातिवाद होता है। क्या समाज को देना है, क्या जीवन से पाना है, तुम सभी का क्या लक्ष्य है?"

"पूछने वाला कोई गाँवों का हाल नहीं है। वहाँ वृद्धाश्रम का चाल नहीं है। मल पर पड़े तन्हा वृद्धों की सेवा करना, हमारा ध्येय है।"

"जब बचाने की बात हो तो वृक्ष छोड़ दिए जाने चाहिए, बीज को कभी भी नहीं छोड़े जाने चाहिए। क्योंकि बीजों से फिर नए वृक्ष हो ही जाते हैं।"



Tuesday 26 September 2023

अभियंता की डायरी : सारथी की यात्रा

मई 1998

बतौर कार्यपालक अभियन्ता गोदाम का दायित्व भार संभालते हुए ही बात समझ में आ गयी थी कि छोटी मछली को लील लेने के लिए व्हेल के संग अजगर मौजूद है। किसी कम्पनी को काली सूची में डलवाने में प्राण खतरे में आ जाना स्वाभाविक था।

जुलाई 2013

ईमानदारी का सूरज भभक गया। दो-चार नहीं, पाँच-छ वरिष्ठ अभियंताओं को दरकिनार कर मुझे पदोन्नति देकर मुख्य कार्य भार दिया गया। जाति विशेष से आक्रांत क्षेत्र को सुरक्षित करने में प्राण जोखिम में पड़ना ही था। इस सरकारी जिम्मेदारी के कारण एक राष्ट्रीय संगठन-बहु-विषयक पेशेवर निकाय के सर्वोच्च पद के लिए पंजीयन नहीं करवा रहा हूँ।

अगस्त 2015

तीन सौ करोड़ में से चुनाव लड़ रहे नेताओं को सौ करोड़ का हिस्सा चाहिए था जो मेरे रहते सम्भव नहीं था तो रातोरात मेरा तबादला पूर्व पद से भी नीचे कर दिया गया। और इस तनाव का असर मुझे मेरे मस्तिष्क आघात के रूप में मिला। एक बार नहीं दो बार।

जुलाई 2017

राम-राम करते मेरी सरकारी नौकरी से बा-ईज्जत सेवानिवृत होकर प्राण सस्ते में सांसत से भी स्वतंत्र हो गया। अब पूरा समय राष्ट्रीय संगठन को दे पाऊँगा। कई बार प्रांत शाखा के उच्च पद हेतु अधिक मत से चयनित हूँ।

जून 2022

सभी ज़िद कर रहे हैं, राष्ट्रीय संगठन के सर्वोच्च पद के लिए चुनाव लड़ लूँ! लेकिन मैं जानता हूँ कि संगठन में हो चुके लगभग पैतीस-चालीस करोड़ के घपले का निपटारा मुझसे नहीं हो सकेगा। रेल के वातानुकूलित कुप्पे में चलना जब जेब को भारी लगे, हवा में उड़ने के सपने देखना मूर्खता है।

सितम्बर 2023

राष्ट्रीय संगठन की प्रान्त शाखा के उच्च पद {लगभग चौदह साल (कोरोना की वजह से अतिरिक्त साल का मौका मिल जाने की वजह से ) के बाद} से मुक्त हो गया। अब राष्ट्रीय संगठन के युवा सदस्यों को योद्धा बनाने में ज्यादा समय लगाऊँगा।

Monday 4 September 2023

कोढ़ में खाज

"नमस्कार राष्ट्रीय संयोजक महोदय! 49897 यानी लगभग पचास हजार सदस्यों वाली आपकी संस्था अपनी 13 वीं वर्षगाँठ मना चुकी है। ५० हजार कलमकारों को एक मंच पर लाना। ७५००० किलोमीटर से अधिक की साहित्यिक यात्रा का किया जाना। उसके लिए और आज होने वाले 'एक शाम माँ के नाम' के ३०२५ वें कार्यक्रम की बधाई स्वीकार करें।"

"नमस्कार के संग आपका बहुत-बहुत धन्यवाद पत्रकार महोदय।"

 "राष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रम में देखा यही गया है कि श्रोता कम होते हैं। वही व्यक्ति साहित्यिक कार्यक्रम में सम्मिलित होना चाहते हैं जिन्हें रचना पाठ करने के लिए अवसर मिल सके। मंचासीन हो जाएँ तो सोने पर सुहागा। इस कार्यक्रम की ऐसी कोई विशेष बात जिसे साहित्य और समाज हित/अहित की हो साझा करना उचित हो।"

"है न! एक प्रतिभागी का औडियो में जानकारी पूछा जाना!"

"कैसी जानकारी"

"उनका कहना था कि आप के द्वारा हमें किस रूप में आमंत्रित किया जा रहा है श्रोता के रूप में या स्पर्धा प्रतिभागी के रूप में। क्या हमलोग अब प्रतिद्वंद्वी प्रतिभागी बनने के योग्य हैं या आने वाली नयी पीढ़ी के बीच स्पर्धा होनी चाहिए!

मेरे पास एक और अति आवश्यक महत्त्वपूर्ण कार्य आ गया है। आपके बताये निर्णय पर मुझे भी चयन करना होगा कि मेरे लिए ज्यादा लाभकारी कौन सा है।"

"ओह्ह्ह,उन्हें चयन करना है कौन ज्यादा लाभकारी है! ऐसे-ऐसे व्यापारी! आयोजक से ऐसी बात कर लेना बौनेपन की निशानी है। ऐसे साहित्यिक दीमक ही बढ़ रहे हैं! अफसोस के साथ विदा होते हैं कि हमारे राज्य की यात्रा में आपको ऐसे अनुभव हुए।

Wednesday 30 August 2023

खीर में नमक

"फजीरे-फजिरे काहे एतना बीख चढ़ल बा?"

"बीख त कालहे चढ़ल रहे रातवए में मेल कर देले बानी। लघुकथा के story लिखाईल बा•••,"

"चर्च में गणेश भगवान के पूजा शोभा ना दिही नु•••!ओहि तरे मंदिर में चादर/फादर ना होखे के चाहीं।अंग्रेजवा चल गईलन स बाकी ऐह लोगन के छोड़ दिहलन स, ललाटवा पे गुलामी लिकखवा ले ले बा लोग"

"मठ चाहीं सभन के एही देश में ••• लेकिन वफादारी निभाई लोग परदेश में••• चाकरी के कवनों हद नईखे! गलीयन में पटटवा भी लटकावला के काम बा।"

"लघुकथा को अंग्रेजी में भी लघुकथा ही कहा जाता है"

StoryMirror Hindi

-हमें जो प्रमाणपत्र मिला उसमें story लिखा हुआ है

-पूरा प्रमाणपत्र अंग्रेजी में है

आपलोगों के द्वारा विधा के संग लेखन का भी अपमान हो गया

 -30 दिनों का समय और श्रम निरर्थक होने का अफसोस नहीं है•••

Thursday 24 August 2023

जलेबी

एक ढांचे में बंधी ज़िंदगी आज कुछ खुल गई है। भादो का कृष्णपक्ष, सूरज अशर्फी सा आकाश के कलश में वापस सुरक्षित रखा जा चुका है। क्षितिज के पश्चिम कोने में इंगुर-सिन्दूर बिखर चुका है। कौवा अबाबील के रंग-बिरंगे और सुंदर पंखों को देखकर मंत्र-मुग्ध हो रहा है।

 “पूरी दुनिया में हमारे द्वारा बनाए नीड़ के भी लाखों-करोड़ों खर्च करने वाले प्रशंसकों की भीड़ हैं और मान लो कि मेरे पंख तुमसे बेहतर हैं ही।” अबाबील चहक रही है।

“वाकई तुम्हारे पंख दिखने में मेरे पंखों से कहीं अधिक सुंदर हैं। लेकिन मेरे पंख ज्यादा बेहतर हैं क्योंकि ये हर मौसम में मेरे साथ रहते हैं और इनके कारण मौसम चाहे कैसा भी हो, मैं हमेशा उड़ पाता हूँ।"

रहिमन निज मन की विथा, मन में राखो गोय।

 सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहै कोय।

किस भाव से ध्यान करे उलझा मरीचि तोय

जपत-जपत अवसाद में काहे न जगत होय।

महत्वपूर्ण ये नहीं है, कि वास्तविकता क्या है… बल्कि, महत्वपूर्ण ये है कि, आप अपनी बात को सही साबित करने के लिए कितने संभावित तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं….!!

बारह मंजिला खिड़की से गिरा दी गई या नशे में गिर गई, सीढ़ी से पैर फिसला या गला दबाने के बाद फेंक दी गई, कुल्हाड़ी से या हथौड़े से मारी गयी•••!

उत्तेजक क्या रहा होगा•••! पोस्टमार्टम रिपोर्ट कौन बदल रहा•••! कैसे दुनिया जानेगी कि मनमोहना ने प्रेमी के संग मिलकर हत्या की या झूठा दहेज उत्पीड़न में आत्महत्या कर लेने हेतु उकसाया गया•••!

 गले में नाग की तरह परिश्रावक/स्टेथॉस्कोप को लटकाये तहबंद/एप्रन को चढ़ाए चिकित्सकों-उपचारिकाओं और काले कोट धारक अधिवक्ताओं की हड़ताल पर बैठी भीड़ में बहस जारी है।

चिकित्सक-साहित्यकार पत्नी और उच्च पदाधिकारी- अधिवक्ता पति की लाश, समाज को मनुष्यता विमर्श के कटघरे में ला पटकी है। आगे प्रतीक्षा है न्याय क्या होता है•••!

  छायाचित्र उतारनेवाले मित्र-बन्धु राजेन्द्र पुरोहित और अनिल मकरिया के संग सोशल मिडिया से आपकी खबरी विभा रानी श्रीवास्तव का नमस्कार और अब हम विदा लेते हैं!

Wednesday 23 August 2023

सूरज डूब रहा

"सुनों ना! कुछ कहना है•••"

"कहो ना! हम सुनने ही जुटे हैं। अब सोना ही तो है••"

"गज़ल बेबह्र है काफ़िया भी भगवान भरोसे है"

"चलता है!"

"दोहा में चार चरण कहना है लेकिन चार भाव नहीं है"

"चलता है!"

"मशीनगण से निकला हाइकु है। ना अनुभूति है ना दो बिम्ब है"

"चलता है!"

"लघुकथाओं में ना शीर्षक का सिर-पैर और ना शैली का ओर-छोर, भंग अलग"

"चलता है! क्यों तुम्हारा खून जल रहा और हमारा सर•••"

"कैसे पता चले साहित्य में घुन लगा कि दीमक!"

"पुरानी राह को छोड़कर आगे बढ़ने पर शून्य से शुरू करना पड़ता है। तुम भी सोचो, अथाह संचय को छोड़ना क्या सम्भव है?"



Wednesday 16 August 2023

जमात करामात


जमात करामात

ट्रिन••• ट्रिन••• ट्रिन•••

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क्या मेरी बात रानी जी से हो सकती है?
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जी! जी नमस्ते! मेरा नाम डॉ सुनील दत्त मिश्र है। मैं आपसे मिलना चाह रहा था। आपने कहा था कि हम जब कभी आपके शहर में आयें तो आपको सूचित अवश्य करें।
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पूरी पढ़ाई करने के बाद, नौकरी करने जो बच्चे विदेश चले जाते हैं उन बच्चों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए क्योंकि वे बच्चे समाज के ऋण को लेकर भगोड़ा हो जाते हैं। महोदया दूसरे राज्य के साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच से ऐसी माँग को रखने वाली दिलेर माँ को कोई कैसे भूल सकता है!
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क्या फर्क पड़ा? मेरे गाँव में भी खुशियों की लहर दौड़ रही है!
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हम सब यानी मेरा भाई, बेटा, भतीजा, भगिना उस कार्यक्रम में उपस्थित थे जो दुबई के संग विदेश के अनेक राज्यों में धन उगाई करने वाले आपकी ओज से ओत-प्रोत वाणी सुनकर इतने प्रभावित हुए कि धीरे-धीरे देश वापसी कर रहे हैं! सोने पर सुहागा कि गाँव के अन्य युवा नहीं जाने का सोच रहे हैं, जबकि गाँव शहर के बच्चों में पहले होड़ मची थी•••!
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सच में! इसलिए तो मैं आपसे मिलकर आपको धन्यवाद देना चाह रहा था।
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अच्छा! अच्छा आप आ रही हैं और शहीद स्मारक (सात शहीदों की एक जीवन-आकार की मूर्ति है) के पास होने वाले कार्यक्रम में आमंत्रित कर रही हैं!
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पूछ रही हैं कि आऊँगा? सर के बल दौड़ा आऊँगा! मेरे मन के थल पर अँकुरा आपके लिए सम्मान का बीज आपके इस स्नेह के जल, पवन, किरण पाकर बने वट को और कुछ नहीं चाहिये...! जय हिन्द!

Thursday 10 August 2023

धोखा

 Padam Godha :- आजकल छोटे छोटे बच्चे भी स्कूल बस से मां को फ्लांईंग किस करते हैं। समझ नहीं आता दूसरे का पति उड़ाना ज्यादा अनैतिक है या फ्लांईंग किस?

सुनीता त्यागी :- 1. दूसरे का पति कोई मिट्टी का पुतला नहीं था कि उड़ा लिया।
2. संसद सदस्याएं राहुल नाम के बालक की मां नहीं थीं।
Roopal Upadhyay :- सुनीता त्यागी जी मतलब अपनी मित्र जिसने गरीबी पर दया कर के अपने घर में जगह दी उसी के पति को पटाना गलत नही और फ्लाइंग किस देना गलत वाह ये दोगुली मानसिकता ही भारत को पिछड़ा रही है। सच में शिक्षा का बहुत ज्यादा अभाव है।लोगी को इतना तो पता होना चाहिए कि  comminunication में non verbal communication का एक part है gesture जिसके अंतर्गत flying kiss आता है जिसका अर्थ होता है i love you all इसमें क्या गलत है। सभी बोलते है i love you all, public figure है लोगो को प्यार करना क्या गलत है, मुझे तो समझ नही आता...
सुनीता त्यागी :- Roopal Upadhyay आदरणीय उच्च शिक्षिता जी मुझे आप को कोई सफाई नहीं देनी।
विभा रानी श्रीवास्तव :- शाबास सुनीता त्यागी जी! क्या उपमा दिया मिट्टी का पुतला! मिट्टी का पुतला नहीं था इसलिए उड़ाया जा सका...
सुनीता त्यागी :- ओहो तीर निशाने पर जाकर लगा है तभी तो अंध चमचे सफाई देने के लिये मैदान में कूद पड़े हैं। विभा रानी श्रीवास्तव जी मिट्टी का पुतला नहीं था, तो चौपाया भी नहीं होगा वो कि हांक कर ले गयी। अपनी इच्छा से ही अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी के पास गया होगा।
विभा रानी श्रीवास्तव :- सौ फी सदी सत्य कथन सुनीता त्यागी जी! बिलकुल सहमत हूँ आपसे। 'अपनी इच्छा से ही अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी के पास गया होगा।' ये 'दूसरी' आसानी से उपलब्ध जो होती है...! यह दूसरी ना जाने कितनों की दूसरी, अन्य की दूसरी, अन्यों की दूसरी होती होगी...
सुनीता त्यागी :- विभा रानी श्रीवास्तव इस बात का राहुल के फ्लाइंग किस से क्या रिलेशन है समझ नहीं आया। राहुल को तै पहली ही नहीं मिली है दूसरी की उम्मीद छोड़ दे। वैसे वो पहली है या दूसरी ये उनका व्यक्तिगत मैटर है।
विभा रानी श्रीवास्तव :- सुनीता त्यागी जी ना तो राहुल के फ्लाईंग किस से मतलब है, राहुल को पहली नहीं मिली दूसरी की उम्मीद छोड़ दें जिसे पहली मिली उसको छोड़ वो दूसरी से मिले। ये हमारे चिन्ता का विषय है ही नहीं। यह राजनीति गलियारा है जहाँ दिन में झगड़ते हैं तो रात में गलबहियाँ दिए दिख जायेंगे। एक दूसरे को भक्त और चम्मच कह जो अपनी-अपनी पसंद की पार्टी का समर्थन करते दिखते हैं। समय के सत्ता बदलती रहती है। काँग्रेस नहीं रहा तो कुछ वर्षों में भाजपा भी नहीं रहेगी। देश रहेगा, मुद्दे रहेंगे, समस्याएँ रहेंगी और सवाल उठाते साहित्यकार रहेंगे...!

Wednesday 9 August 2023

धर्माधिकारी

ट्रिन••• ट्रिन••• ट्रिन•••

हैल्लो!

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हाँ! हाँ, सब कुशल मंगल!

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अरे•• हाँ! नहीं गया था जंगल। लम्बी कतार थी। तुम्हारा मिस्ड कॉल दिखा। तुम्हारी माँ पूछ रही है; तुम्हारे मित्र संग भेजा गया सामान, क्या तुमने चखा?

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बच्चों से दूर रहना हमारा निर्णय था यारा! जीवन सन्ध्या के वक्त और भविष्य ने हमें नहीं मारा। 

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खिलखिलाती जिन्दगानी तेरी-मेरी कहानी रहनी चाहिए। अच्छी हो या बुरी, खतरे के निशान से ऊपर क्यों बहनी चाहिये!

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यहीं सभी चूक जाते हैं। क्योंकि हम मूक पाते हैं। मान लेते हैं विधि का विधान,, जबकि हो सकता है निति से निदान।

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बता ही तो रहा हूँ! बाबा अपने डगमगाते कदमों के लिए आपको सहारा लेनी चाहिए, ए टी एम से राशि निकालने गया तो गार्ड ने कहा। क्या उसे प्रिया की फाइलेरिया की लाचारी कहनी चाहिए!

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अरे नहीं! नहीं कहा। कह दिया, अभी तो पैसठ को कब्जा रहा हूँ। दूसरे पचहत्तर का सहारा बनने जा रहा हूँ।

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वृद्धश्रम वालों ने नगद राशि की माँग रखी थी। तुम्हारी माँ की ज़िद थी कि वृद्धावस्था वृद्धों के संग गुजारेंगे। पहले वृद्धाश्रम का स्वाद नहीं चखी थी। वहाँ की स्थिति देख जिद पकड़ ली वहाँ से निसंतान वृद्ध को घर लानी चाहिए।

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उसका सपना तो अब धरा का धरा नहीं रह गया। हमलोग निसंतान दम्पत्ति को घर ले आने वाले हैं। वे अनाथाश्रम में पले थे। हमारे साथ रहने से, वहाँ से मुक्त हो जाने से वृद्धाश्रम ग्रह गया।


Wednesday 2 August 2023

पुनरुत्थान : डायरी शैली

शुभेच्छु की डायरी

22 सितम्बर 2014

"एक पुस्तक को प्रकाशित करवाने में न जाने कितने वृक्षों को काटना पड़ता है इसलिए प्रकाशित करवाने के पहले पुस्तक के उद्देश्य और सार्थकता पर गंभीरतापूर्वक सोचना जरूर चाहिए।" कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अतिथि लोकार्पणकर्त्ता ने कहा। जो मुझे सुनकर उचित-सही नहीं लगी।

 किसी लोकार्पण में यह कहा जाना अशोभनीय था। पुस्तक लोकार्पण को दुल्हन की मुँह दिखाई कहा जा सकता है••• घूँघट उठाकर कहा जाये कि इससे शादी के पहले सोच-विचार करना चाहिए था•••

कटाक्ष को सहजता से नहीं लेकर हताश होकर साहित्य से विमुख हो जाना रेशमा के लिए स्वाभाविक रहा।

"आसान तो नहीं होता होगा! बीज शोधन, बीज का बोरे में अंकुरण, घनघोर घने रूप में बिजड़ा होना तब फसल में परिवर्तित होकर, पुष्ट दानों की सुनहले बालियों के रूप में झूम जाना।" यह बात, रेशमा को बार-बार याद दिलाते रहना पड़ेगा।

22 जनवरी 2016

रेशमा द्वारा आमंत्रित करने पर वसंतोत्सव में शामिल होना अच्छा लगा। उनका अपनी मंडली के संग उल्लास से सरस्वती पूजा करना और गुलाल लगाना रोमांचित कर रहा था।

"शहर से थोड़ा बाहर है लेकिन शोरगुल से भी दूर होना अच्छा लग रहा है। तुम्हारे लिए विशेष रूप से••" मेरे कहते रेशमा चहकने लगी।

"इसी भवन में सभी तरह की कलाओं के कार्यशाला भी चलते हैं और हम जैसे यहाँ ससम्मान टीक भी सकते हैं•••। यह सरकार से हमें आवंटित किया गया है।"

उनके लिए खुले आकाश के संग घोसले की चाहत पूरी हो जाना बड़ी बात थी।

09 नवम्बर  2019

पुस्तक मेला में घूमते-घूमते प्यास लग गयी थी। चाय-पानी की तलाश हमें एक स्टॉल पर ला खड़ा किया।

 "आप सभी का स्वागत है! इनसे पैसा नहीं लेना। ये हमारे विशेष अतिथि हैं।"

"घोड़ा घास से यारी करेगा•••।"

"अरे! यह यहाँ अनुकूल नहीं है। आपने ही कहा था जीविका के लिए कुछ ठोस करो। हमने भोजनालय खोल लिया•••!"

"हाँ लेकिन अपने प्राकृतिक गुण को भी नहीं छोड़ना••,"

"मिले एक दराती से काबिलियत का परिचय द्वारा माता ने अपने पुत्र के गुणों को भाप लिया और एक संदेश भी दिया कि किसी की महानता का पता उनके व्यवहार अर्थात जीवन शैली से ही चल जाता हैं। आप मेरे लिए वही माँ हैं।"

"बिना तपे कुन्दन•••!"

23 जुलाई 2023

चार दिनों से रेशमा का अपनी मंडली के संग अपने विशेष अंदाज में ताली बजा-बजाकर 'बेसरा माता'(जिनकी सवारी मुर्गा है) की पूजा की जगह कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, सतत्रिया, मोहिनीअट्टम नृत्य करती अचंभित कर रही थी। सभी को शिव तांडव, माँ दुर्गा का भजन, माँ काली का रौद्र नृत्य की जीवंत प्रस्तुति भी पसन्द आए। जीने की चाह का पराकाष्ठा है राख़ से पुन: खिल जाना...!

Wednesday 19 July 2023

उधेड़बुन

झूला कजरी-

बटोही संगे संगे

धावे गोरिया

सावन की दोपहरी! झटके में आसमान कैनवास पर हल्के-मध्यम-गाढ़े, काले-भूरे-सिन्दूरी विभिन्न मिश्रित रंगों का आधुनिक कलात्मक आंदोलन का संदर्भ देता और उस काल की शैली और दर्शन को दर्शाता लुभा रहा था या डंक मारने में सफल हो रहा का आकलन करने की मनोदशा को घनवादी (क्यूबिस्ट) साबित कर रहा था।

खेत-गड्ढे-ताल फूलकर गुप्पा हो रहे थे। उनके पपड़ी पड़े होठों पर प्रसाधन के लेप चढ़ गये थे तो नदी के शरीर में कुछ ज्यादा ही चिकनाहट दिखने लगी थी। एक दूसरे को कनखियों से देखकर मुस्करा रहे थे। मेघ के परिग्रह में उतावलापन को देख मेड़-तट चिन्ताग्रस्त हो रहे थे। उनके किनारे-किनारे बसे घरों के बुजुर्ग-बच्चे मस्ती कर रहे थे।

"सपने में बंदरों का झुंड देखना शुभ होता है। मान्यता है कि इससे आर्थिक लाभ होता है। परिवार में खुशहाली आ सकती है।"

"सपने में बंदरों के झुंड को खेलते देखने का अर्थ होता है कि घर में चल रहा क्लेश खत्म हो सकता है।"

"शुभ संकेत समझ रही हूँ रात मेरे सपने में बंदर को खाना चुराते देखा, स्वप्न शास्त्र के अनुसार हमें अचानक कोई लाभ हो सकता है।"

"मेरे सपने में अक्सर बंदर अथाह पानी में तैरते दिखता है। जिसका मतलब होता है कि जल्द ही समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। हम पा भी जाते हैं।"

"चल पुछ्ते हैं हम इनके इतने सहायक हैं तो क्या ये हमें घर बनाना सिखला देंगीं!"

महिलाओं के झुण्ड को गप्पबाजी में मशगूल देखकर बन्दर दल के मुखिया ने कहा।

Wednesday 5 July 2023

...कृषि सुखाने...


छन छन छन् न् छन् न् छन जल प्रपात का संगीत गूँज रहा था और उसके जल पर सूर्य की किरणें इंद्रधनुष बना रही थी। लाखों पर्यटकों की भीड़ इकेबना की तरह सजी हुई थी। एक नाम को सभी पुकार रहे थे। वही इस जल प्रपात को ढूँढ़ निकालने वाला और संरक्षक था। पिछ्ले दिनों आई बाढ़ में लगभग सौ लोगों की जान बचा लेने वाला, स्व अपनी जान बचा लेने का गुहार लगा रहा था। उसे पुलिस दबोच ले गयी थी।


"जी हजूर! आप किस आधार पर त्रिवेणी को कोतवाली उठा लाए हैं?" पत्रकार ने पुछा।


"त्रिवेणी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवायी गयी है कि वह जल बाँटने में, आस-पास लगे दुकानों से अनाधिकार वसूली करता है।  नक्सलियों के गढ़..." थानेदार अपनी बात पूरी नहीं कर सका।


"वह वसूली करता है या आपलोगों की वसूली नहीं हो पा रही है?वह दिन गए जब खलील खां फाख्ता उड़ाते थे...।" भीड़ से सवाल उछ्ला।


"कौन बोला? कौन•••," थानेदार की कलई उतर रही थी तो वह तेज गरम होने लगा था।


"सवाल यह नहीं है कि कौन बोला। माँग यह है कि आप त्रिवेणी को अविलंब छोड़ रहे हैं। पदच्युत नहीं ही होना चाहेंगे, उसके समर्थन में जुटी भीड़ का आकलन कर लिजिए। ऐसा ना हो कि दंगा छिड़ जाये।" पत्रकार ने कहा।


"आप थानेदार को धमकी दे रहे हैं।" थानेदार की घिघ्घी बन्धने ही वाली थी।


"धमकी नहीं दे रहा हूँ, सम्भल जाईये, चेता रहा हूँ। दोबारा ऐसा ना हो। अजगर के पेट में नीलगाय का छौना नहीं अटता।" त्रिवेणी को साथ लेकर निकलता पत्रकार ने कहा।

Sunday 25 June 2023

किस्सा की कहानी


किस्सा की कहानी : डायरी में दर्ज

नवम्बर 1993

छठवीं बच्ची की भी शादी हो गयी। चिकित्सक पिता के लिए आसान नहीं था दो बेटों और चार बेटियों की अच्छी परवरिश और उच्च स्तर की पढ़ाई करवा लेना। समय पर सबकी शादी करवा गृहस्थी बसा देना। कभी-कभी पहाड़ को स्पर्श पाकर फफ़क पड़ते देखा गया।

अगस्त 1980

बड़ा बेटा चिकित्सक की पढ़ाई छोड़कर माँ के पास आ गया। उसे खर्च के लिए पिता पर बोझ नहीं बनना है। अपनी बहनों की पढ़ाई और शादी के खर्चों में सहयोग कर सके इसलिए खेती और व्यापार पर ध्यान देना है। मौसी माँ की छोटी बेटी चिकित्सक बनने की तैयारी कर रही है। उनके बेटे को भी चिकित्सक बनने हेतु प्रेरित करना है। जिम्मेदारी की दवा की कुछ खुराक ज्यादा ली है।

जून 1963

हैजा महामारी विकराल रूप धरे हुए है। ना जाने क्या विचारकर वादी-प्रतिवादी सलट लिए और उनका आपस के समझौता पत्र के साथ अदालत में मुकदमा वापस लेने की अर्जी लग गयी। अधिवक्ताओं में खलबली मच गयी वे भौंचक्क रह गए। वाद निरस्त करने का फैसला सुनाते हुए न्यायधीश ने कहा, "खुशी की बात है। जीवन में बदलते वक़्त के साथ विचारों में बदलाव हो जाता है। कई बार जिंदगी में समझौता करना पड़ता है। अगर समझौते से रिश्ता बचता है, जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है, किसी का भला हो जाता है और नफरत मिट जाती है तो समझौता कर ही लेना चाहिए। और सुलह इस आधार पर हुई कि तीन दिन पति एक पत्नी के साथ और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। रविवार और पर्व वाले दिन पूरा परिवार एक को साथ, यदि चाहें  मिलते रहेंगे और कोई भविष्य में किसी पर किसी तरह का मुकदमा नहीं कर सकेगा।

मार्च 1960

माता-पिता की पसंद से बड़ी बहन से शादी किया था।तीसरे प्रसव के समय बच्चों का ख्याल रखने के लिए बहन आयी थी। उसके गर्भ ठहर जाने के कारण बहनोई से शादी करनी पड़ी। दोनों ने मिलकर अदालत में पहली पत्नी से तलाक का मुकदमा दायर कर दिया। फिर प्रयत्नशील हुआ गया,  संघर्ष की लंबी और अंधेरी रात काटकर सफलता की प्रकाशित भोर सबके हिस्से में लाया जा सके।



Wednesday 21 June 2023

जैसी दिशा वैसी दशा


"कोई कार्य शुरू करने से पहले हमें मेहनत बहुत करनी पड़ती है। अपना और आपके दिल-दिमागों की धुलाई करनी पड़ती है।और साथ ही नजरों से धुँध छाँटनी पड़ती है। जी हाँ, मित्रों! वैद्युतकशास्त्र संचार माध्यम (इलेक्ट्रानिक मीडिया) से मैं आपकी पत्रकार मित्र मानवी और मेरे संग हैं चलचित्रकार चेतन

फोटोग्राफी का मजा बढ़ जाएँ,

अगर कोई दृश्य दिल में उतर जाएँ

आज योग दिवस है और आप तक विस्तृत सूचना पहुँचाने के लिए हम अस्पताल में आ पहुँचे हैं। आइए आज जानते हैं दो महोदय से योग से लाभ और हानी के बारे में। जी हाँ! आप बताएँ अरुण जी•••

"मैं अपने युवाकाल शायद उच्चतर माध्यमिक विज्ञान (intermediate science) का छात्र था तभी से नेति क्रिया, मयुरासन, पैर से पीछे का जमीन छू लेना इत्यादी अनेको आसान करता रहा। मेरे लिए समय बेहद महत्त्वपूर्ण रहा रात में 9 बजे तक सो जाना और प्रातकालीय 5 बजे उठ जाना।सुबह खाली पेट चाय नहीं लेना। दो बार ब्रेन स्ट्रोक हुआ और एक बार हल्का पक्षाघात लेकिन ना मुझे पता चल पाया और ना और किसी को शायद कारण योग ही रहा हो जी। सेवा निवृति के छ सात के बाद आज मैं अस्पताल में हूँ। ठीक से बोल नहीं सकता ठीक से चल नहीं सकता। बेहद गुस्सा आता है। समय है•••,"

"आप बताएँ मोहन जी! आप अस्पताल के बिस्तर पर क्यों पड़े हैं?"

"मैं योग को अपनी दिनचर्या में कभी भी शामिल नहीं किया। योग जरूरी है यह कभी समझ ही नहीं पाया। दो-दो पाँच के चक्कर में रहा। अपने पैसों के बल पर स्व के बल को इक्कीस समझता रहा। मुझसे उम्र में बीस और आर्थिक रूप से उन्नीस सरपट दौड़े जा रहे हैं। और मैं•••,"

"अच्छा, तो आज आपको यह दिन नहीं देखने पड़ते अगर समय से आप योग कर लिए होते? लेकिन आपके संग रह रहे अरुण जी तो सारी जिन्दगी योग करते रहे।? फिर?"

"मैं बताता हूँ। योग के अभ्यास के माध्यम से, व्यक्ति आंतरिक शांति पैदा करने, तनाव का प्रबंधन करने और अपने आध्यात्मिक क्षितिज का विस्तार करने के लिए सशक्त हो सकते हैं।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर क्या••, प्रतिदिन उन प्राचीन ऋषियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना आवश्यक है, जिन्होंने निस्वार्थ रूप से पूरी मानवता के लाभ के लिए अपने ज्ञान को साझा किया। संगीत और मन का भी योग करें फल शान्ति मिलेगा। रोज संगीत दिवस भी मनाएँ।"

 "चिकित्सक के दिए सुझाव सभी को मानने चाहिए और हमें अब आप जनता से विदा लेनी चाहिए।"

Tuesday 20 June 2023

मृगमरीचिका

"विदेश में नाम कमाता, शिखर पर पहुँचता बेटे की माँ होकर आप कैसा अनुभव कर रही हैं?"

"नजर रही वही पुरानी

दुनिया बिखर जायेगी

नजरिया बदल गया

दुनिया सँवर जायेगी

पापा आपके सेवा निवृति में अभी डेढ़ साल बाकी है। मैं यूँ गया और यूँ आया।आजाद परिंदों की रुकती नहीं परवाजे

जाते हुए कदमों से आते हुए क़दमों से

भरी रहेगी रहगुजर जो हम गए तोह कुछ नहीं

इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तोह कुछ नहीं

यह कदम किसी मुकाम पे जो जम गए तोह कुछ नहीं। विदेश में रहने का अवसर आसानी से कहाँ मिलता है! वेतन वृद्धि का अवसर खोना नहीं चाहता।"

"मेरे बाद भी इस दुनिया में

जिन्दा मेरा नाम रहेगा

जो भी तुझको देखेगा

तुझे मेरा लाल कहेगा

तेरे रूप में मिल जायेगा

मुझको जीवन दोबारा

–जाओ जी लो प्राण धारण अत्यधिक प्यारा!"

"पिता लू भरी दोपहरी में यह काम किया पूत के लिए छाँव ढूँढ़ने का वह वट बना।

ओझल होना ना था एक पल भी गंवारा

पिता ही साथी रहे हैं, पिता ही थे सहारा।

आज आठ साल के बाद भी पिता दिवस के दिन प्रवासी पूत का मुझ माता को विडियो कॉल आया, इतनी सुबह? अभी तो वहाँ 5 ही बजे होंगे न!"

"वहाँ तो शाम है न। मैं अन्य कॉल पर व्यस्त हो जाऊँगा। पापा से बात करवा दो। आज पापा दिवस है।"

"इकलौता बेटे का वहाँ विदेश में पिता के दर्शन से ही दिन शुरू और यहाँ शामें ख़त्म अन्धेरा शुरू।"


Friday 16 June 2023

मेड़कटवा

मेड़कटवा

"तुमने सुना, मुन्ना ने चाचा को डंडे से पीटा और दीवाल पर ढ़केल दिया। सर में गुमड़ निकल गया है।"

इस सूचना से मुझे स्तब्धता होनी चाहिए थी क्या•••! बिलकुल नहीं होनी चाहिए थी। यादों के गुफा में बहुत दंश छुपा हुआ था।  हमारा संयुक्त परिवार था। चाचा की जब शादी हुई तो चाचा ससुराल के गाँव के किनारे नहीं जाते थे। कुछ सालों में ऐसा हुआ कि वे केवल ससुराल के होकर रह गये। चाची शहर में पली हैं तो अन्य बड़ी माँ, माँ से तुलना में श्रेष्ठ समझी जातीं। गृहस्थी के सामान्य कार्य में सहयोग नहीं लिया जाता। चाची की पढ़ाई चलती रहती लेकिन कोई मंजिल नहीं मिला। चाची को शिकायत थी कि महानगर में बसी होतीं तो सफल होती। अच्छे बड़े शहर में भी होती तो चलता। चाची शादी के बाद उस संयुक्त परिवार में बिना सर पर पल्ला रखे जेठ लोगों के संग बहस कर लेतीं जबकि उनकी जेठानियों की परछाई जेठ के सामने से नहीं गुजरती। गाँव के घर में चाची को कम ही रखा गया। 

चाची के बच्चे हुए तो वे ननिहाल को जानते थे। मामा मौसी नानी इतने ही रिश्ते पहचाते थे।

दादा-दादी के पास नहीं आते थे कि दाल-सब्जी तो ठीक है गाँव का चावल मोटा होता है, शहरी बच्चे हैं ठीक से खा नहीं सकते हैं। समय के साथ गाँव में चावल के किस्म में बदलाव होता गया। 

उनके बच्चे पढ़ने में बहुत होशियार हैं, यहाँ उनके स्तर का कोई नहीं मिलता है। अन्य बच्चे अपनी-अपनी मंजिल पाते गये। उनकी तुलना में बीस ही साबित हुए।

चाचा-चाची के नजरों से सबसे ज्यादा होशियार मुन्ना घर में भी सबका दुलारा। मुन्ना की शादी सफल नहीं हुई कि उसे अपने पिता के बनाए मकान में रहना और उनके पेंशन पर मौज मस्ती से जीवन गुजर-बसर करना था। 

बुजुर्ग की दशा ऐसी•••!

Wednesday 14 June 2023

समर कैम्प

समर कैम्प
"हाँ तो बिग ब्रेव गाइज़! आपसे एक सवाल पूछती हूँ, आपकी मामी की ननद की ननद की गोतनी के बेटा या बेटी से आपका क्या रिश्ता होगा?"

"••••••"

"अर्ली मॉर्निंग ऐण्ड इन इवनिंग में सूरजमुखी का फेस किधर होता है?"

"••••••"

"यह तो झोके हैं पवन के

हैं यह घुंघरू जीवन के

यह तो सुर है चमन के

खो न जाऐ

तारे ज़मीन पर

इसलिए मैं मनाकर रहा था कि इसे यहाँ मत भेजो। उसे माता-पिता के संग पहाड़ों पर घूमने जाने दो। लेकिन ना! तुम्हारी ज़िद थी। अब वो भुगते।"

"इसमें भुगतना क्या है! समय के साथ धीरे-धीरे सब सीख जायेगा।"

दुनिया की भीड़ में क्यों खो रहा

मिलेगा कुछ भी न फल जो बो रहा

तू आँखें अब खोलकर सब जाँच ले

तू अब सच और झूठ के बीच खाँच ले

जब तक सीख पायेगा तब तक••• और ना सीख पाया तो•••?"

"इसका उत्तर तुम्हें तब सोचना चाहिए था, जब तुम 'एकल परिवार में एक बच्चे' का झण्डा उठाये हुए थे। हमलोगों की पीढ़ी के बच्चे गर्मी की छुट्टी में दादी-नानी के गाँव जाते थे। तीस-चालीस बच्चों का समूह दिन में अमराई, ताल किनारे और रात में छत को भींगाकर तारों के चँदोआ तले ना जाने कितने रिश्ते जिए जाते थे और ना जाने कितने किस्से गढ़े जाते थे।"

"••••••"

"ये बचपन का प्यार अगर खो जाएगा

दिल कितना खाली खाली हो जाएगा

तेरे ख्यालों से इसे आबाद करेंगे,

तुझे याद करेंगे

मामी का भतीजा, बुआ की जयधी गुनगुनाते•••।"

Sunday 11 June 2023

अपाहिज

 अपाहिज


"अपरिहार्य कारणों से मेरी शादी स्थगित हो गई है। मानसिक स्थिति ठीक होते ही मैं खुद बात करूँगा।"

"धैर्य बनाए रखना•••,"

"लड़कीवाला सब फ्रॉड निकला। शादी बड़ी बेटी से करवाना था। फ़ोटो छोटी बेटी का भेजा। फ़ोन और वीडियो कॉल पर छोटी बेटी रहती थी। बड़ी बेटी बचपन से पागल है। छोटी सुंदर है तो उसकी शादी पहले से फिक्स है। लेकिन बड़ी बेटी के कारण उसकी शादी हो नहीं रही थी। तो उन लोगों ने मेरे पर एटेम्पट लिया कि हो जाये तो हो जाये।"

"लड़की वालों पर सब दया दिखलाते हैं। जबकि जितना कांड हो रहा है, लड़की वाले करते हैं और आजकल लड़की की होशियारी का तो कुछ हद ही नहीं है•••। स्त्री विमर्श का काला पक्ष।"

"प्लानिंग था कि शादी छोटी से करवाया जाता और विदाई के समय बड़ी को भेज दिया जाता।"

"वक्त के खेल के आगे सबकी जो मजबूरी हो जाए••।"

"छेका के अगले दिन ही पता चल गया।"

"कोई अगुवा होगा?"

"मेरी अपनी मौसी की बड़ी गोतनी की छोटी बहू लड़की की अपनी चेचेरी बहन है।उसने पहले कहा था कि लड़की बहुत अच्छी है।"

"पिटाने लायक तो वही है। उसकी ऐसी क्या मजबूरी थी जो इस साज़िश का हिस्सा बन गयी?"

"और जिस दिन कैंसिल हुआ उस दिन मुकर गयी कि आप लोग खुद पता कर लिए होते। कल उसको फोन किये और बोले कि आपके पूरे परिवार का खून खराब है। और आपके घर मे जितनी भी बेटी और बहन सबको कोठा पर बैठा देंगे। और अगले बार से मेरे बारे में पता करने का कोशिश कीजियेगा तो बीच से चीर देंगे। उसके बाद मेरी मौसी मुझे फ़ोन पर डांटने लगी

"अपशब्द बोलने से अपना संस्कार खराब होता है। कोई गाली ऐसी नहीं बनी है जो दोषी/अपराधी को सीधे-सीधे कहा जा सके। शादी और बहूभोज की तैयारी में पैसा तो बहुत बर्बाद हो गया लेकिन भविष्य की परेशानियों से बचना हो गया। स्त्री विमर्श का काला पक्ष है, कानून का दुरुपयोग और स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छन्दता समझ लेना•••।"


Thursday 8 June 2023

समृद्धि

 समृद्धी

पाँच-सात पसेरी सट से पसर गया

दो-तीन पन्नी की थैली में ससर गया

सबरे के आठ बजे सब्जी लेने इतनी जल्दी पहुँच गये कि सब्जी विक्रेता की सपने से विमुखता ही नहीं हुई थी। सड़क पर झाडू लगाने वाला साँकल बजा रहा था। दूकान से सटकर खड़ी गाड़ी को पीट रहा था। सब्जी लेने आई अन्य महिला शोर कर रही थी। कुम्भकरण से बाज़ी लगाये युवा विक्रेता के जागने की प्रतीक्षा करुँ या लौट जाऊँ मेरे लिए निर्णयात्मक क्षण उलझन वाला था। घर वापसी पर 'क्या पकाऊँ?' वाला सौ अँक वाला प्रश्न के लिए सीमांत पर लड़े जाने वाले जंग से कम कठिन जंग नहीं होने वाला था।

लगभग बीस वर्षों से उसी दूकान से सब्जी-फल आ रहे हैं। अक्सर शाम में ही लाती रही। सुबह का यह दृश्य पहली बार की अनुभूति थी। कोरोना काल की रात्रि में सब्जी पहुँचा देता था।

आधे घन्टे के शोर के बाद हलचल दिखी। लगभग चौदह ताले खोले गये जिससे बाँस के बने चार पल्ले हटे। उसके अन्दर मोटरसाइकिल भी था और सब्जियों के ढ़ेर के बीच बिछावन। सब्जी और चूहे के  बीच की गहरी दोस्ती(दाँत कटी रोटी वाली) के साक्षात्कार दिखे।

"बिन बुलाए मेहमानों का कोई इलाज़ क्यों नहीं करते हो?" मैंने विक्रेता से पूछा।

"मेरे अतिथियों को प्याज की बदबू से चिढ़ है क्योंकि यह उनके लिए टॉक्सिक साबित होती हैं। इनके प्रवेश द्वार पर जहाँ भी उनका ठिकाना है वहाँ चिली फ्लेक्स या लाल मिर्च पाउडर छिड़क दिया जाता है। किसी ने कहा छीला लहसुन परोसा जाए। अति से अभ्यस्त हो जाना भी कोई चीज होती है न?" युवा विक्रेता ज्ञानी ने कहा।

तबाही अभ्यस्त विध्वंसक पुजारी

राख़ में जिसे दिख गया हो चिंगारी।" किसी के शब्दों को भुनभुनाती मैं सब्जियाँ छाँटने लगी।

दाँव का गणित

यादें बिसर गया ठूँठ सँवर गया

वक्त गुज़र गया.. दुःख मुकर गया

सम्पूर्ण क्रान्ति और पर्यावरण दिवस मधु जी के आवास पर नमन कार्यक्रम और काव्य गोष्ठी लोकनायक जयप्रकाश विश्व शान्ति प्रतिष्ठान द्वारा मध्याह्न में आयोजित की गई थी। भट्ठी बने भुवन में मेघोत्प्लावित देखकर भी परिंदे छिपे हुए थे। लम्बी प्रतीक्षा के बाद इ रिक्शा युवा चालक के संग दिखा। सौ की जगह दो सौ लेकर पहुँचाने के लिए तैयार होता हुआ बोला, "आप आंटी माँ जैसी हैं इसलिए इतने कम में पहुँचा दे रहा हूँ।"

"अगर सवारी कोई युवती होती तो शायद मुफ़्त में पहुँचा देते तीन सौ लेकर।" मेरी बात सुनकर चालक छलछला आये पसीना पोंछने लगा।

कार्यक्रम समाप्ति कर घर लौटने में अन्धेरा और हड़बड़ी उबर कार का पिछला गेट खोलकर ज्यों उतरना चाही त्यों पीछे से आता साइकिल सवार गेट से टकरा गया। बगल में ठेला था जिसको साइकिल सवार पकड़ लिया और वह गिरने से बच गया तथा चोट नहीं लगी। फिर भी वह उत्तेजित होना चाहा लेकिन मुझे देखकर आगे बढ़ने लगा लेकिन सामने से गलत दिशा में आती महिला जोर से बोलने लगी "गाड़ी वाले बड़े लोग रास्ते पर चलने वाले को कुछ समझते ही नहीं हैं। बस अपने जल्दी में सबको कुचलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।"

महिला को बोलते देखकर सामने खड़े मजदूरों की भीड़ से एक बोलने लगा "दायें-बायें देखकर गाड़ी रोकना और उतरना चाहिए। इल्जाम बड़े लोग पर ही लगता है। गनीमत है कि भीड़ नहीं जुटी नहीं तो अभी पता चल ही जाता।"

"आपदा में अवसर देख लेते हो आपलोग। परबचन-परोपदेश देना जरूरी लगा। पीछे से आने वाले को नहीं दिखी कि सामने गाड़ी रुकी है और उसमें से कोई उतरेगा। उतरने वाले को पीछे से आता सवार दिख जाना चाहिए। वर्तुल घूमने वाला गर्दन होता।"

 असमंजस में थे विरोध धर्मी

मिट रही थी उनकी बेशर्मी


Tuesday 6 June 2023

जाल से फिसली

जाल से फिसली

ट्रिन ट्रिन ट्रिन

"हैल्लो"

"................"

"हाँ! इतनी भोर में जगी हूँ। रात में लगभग एक-डेढ़ बजे आँखों का लगना और भोर चार बजे नींद का उड़ जाना रोज का नियम हो गया है...!"

"................"

"नहीं! मेरी तबीयत नहीं खराब होगी,"

"................"

"नहीं! मैं फ़ौलाद की नहीं बनी हूँ। सब जानते ही हैं, जब बच्चों के दादा बीमार रहे तो रात-रात भर जगना पड़ता था तो आदत लग गई। बचपन से कम सोने की आदत भी रही।"

"................"

"करना क्या है! कभी लॉकर का कागज ढूँढ़ते हैं, कभी एटीएम का पासवर्ड, कभी गाड़ी का पेपर, कभी बैंक का..., पता चला, शहर का कोई बैंक नहीं बचा था जिसमें अकाऊंट ना खोला गया हो!"

"................"

"हाँ! लॉकर खाली हो चुका है। सारे बैंक अकाऊंट भी...! गाड़ी बिके सालों गुजर गए, लेकिन उन्हें याद नहीं रहता न!" 

"................"

"हाँ! तुम्हें नहीं पहचानते! इसलिए तो तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहते। हमारी शादी दस साल ही निभ पायी थी, यह भी इन्हें याद नहीं।"

"................"

"बच्चे तो चाहते ही हैं लेकिन एनआरआई बच्चों के पास रहने से भौतिक सुखों का अतिरेक, एकांत दमघोंटू परिवेश से भाग कर ही तो वृद्धाश्रम में सुकून से हैं...!"

"................"

"तुम्हारे साथ रहने के अनुरोध को स्वीकार करना कठिन है। चिन्ता नहीं करो, यहाँ समवयस्क लूडो, कैरमबोर्ड, शतरंज के संगी-साथी...,"​ 

"................"

"इस जन्म के लिए मेरे हालात को तुम्हारी मित्रता और तुम्हारी सहनशक्ति को आजमाने की जरुरत नहीं लग रही है। मित्रता प्यार में बदल सकता है लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि प्यार मित्रता में बदल जाए?"

"................"

"सही कहा! बिसात बिछा रह जायेगा। कौन पँछी पहले उड़ेगा यह कौन जान सका है...! लेकिन मैं पहले जाना ही नहीं चाहती।"



Sunday 4 June 2023

आग्नेयगिरि पर गौरेया (डायरी शैली)

10 अक्टूबर 1982

दशहरे की पूजा में घी-चीनी की जरुरत पड़ी तो आज पुन: माँ ने अपने अलमारी में टँगी साड़ियों के पीछे से डिब्बों को प्राप्त कर लिया। यह वही सामग्री थे जिन्हें भोग लगा जाने की जिम्मेदार हम बहनों को माना गया था।

30 जून 1985

आज माँ-पापा गर्मी की छुट्टियाँ बिताकर लौट आये। हम बहनों ने राहत की साँस ली। दोनों छोटे भाईयों के संग डेढ़-दो महीने के लिए पहाड़ों-ताल-झील के शहरों में रहने जाते हैं तो हम तीन बहनों को सौ-डेढ़ सौ रुपया दे जाते हैं। घर में थोड़ा आटा-चावल रहता है।

15 मई 1990

"सुबह हम बहनें विद्यालय-महाविद्यालय जाती हैं घर के और दोनों भाईयों के कार्य पूरा करते-करते। हम नाश्ता नहीं कर पातीं और वापसी पर कुछ नहीं मिलता। हमारे पास दो रुपया भी नहीं होता कि हम बाहर कुछ खा लें!" आज पापा से मैंने कह दिया। कहा तो पहले भी बहुत बार था।

"तुमलोग समझौता करना सीखो। तुम्हें यहीं सदा नहीं रहना है। यहाँ के लिए तुमलोग परदेशी हो।" पापा ने कहा।"

काश! परदेशी की जगह अतिथी ही मान लिया जाता।

22 फरवरी 1991

आज दीदी के संग मैंने युवा-बुजुर्गों के लिए सन्ध्या-रात्रि कोचिंग सेन्टर खोल लिया। अत्यधिक युवती-स्त्री-महिलाओं की उपस्थिति देखकर अच्छा लगा। पापा पर भार कम होगा और अब हम तीनों बहनें अपना पेट भर पायेंगीं। पापा के स्तर को देखते हुए कोई कल्पना भी नहीं करता होगा कि हमारे पेट में दाना नहीं होते!

17 नवम्बर 2000

आज माँ-पापा के घर गई तो पता चला बड़ी बुआ आई थीं। महीना दिन रहीं। कुछ महीने पहले छोटी बुआ भी आई थीं। बुआ-चाची लोग जब माँ के पास आती हैं तो महीना भर जरुर रुकती हैं। माँ के संग बाज़ार जाना। माँ से पसन्द की चीजें खरीदवा लेना। रोज मीट-मछली बनवाना बहुत सरल काम है। ननद-भाभी की मस्त जोड़ी। बुआ-चाची को हम बहनों के अंग वस्त्रों के छेद नहीं दिखलाई देते। पापा की दूसरी पत्नी को खुश रखना भली-भाँति जानती हैं।

23 अप्रैल 2008

आज छोटी की भी शादी हो गयी। दीदी की शादी 2004 में हो चुकी है। ससुराल से माँगकर ले गयी बहनें मायके के हिस्से का सुख पा रही हैं। दीदी और छोटी दोनों बहनों की जिम्मेदारी अच्छे से निभा लेने का सुकून है। आसानी से दोनों का पेट भर रहा है

बस! अब अपनी नौकरी से केवल अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी है। शादी में आए नकारा चचेरे भाईयों ने संग रहने की इच्छा प्रकट की। सोचना होगा क्या किया जाए। माँ के दोनों लाड़ले फ़ुर्र हो चुके हैं। जबसे संघ लोक सेवा आयोग में मेरी नौकरी लगी है तबसे मैं पूजनीय हो गयी हूँ। क्या सच में दया का सबसे छोटा कार्य सबसे बड़े इरादे से अधिक मूल्यवान है!

Friday 2 June 2023

सहयोग

 Rajnish Dixit :- लेखक/पाठक कृपया ध्यान दें। 🙏🏼🙏🏼 जानकारी भेजने की अंतिम तिथि 30 जून 2023 कृपया पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। मुझे 100 से अधिक वरिष्ठ लेखकों के बारे में जानकारी चाहिए। एक बड़ी योजना है। वरिष्ठता का आशय सिर्फ उम्र से नहीं है।

विभा रानी श्रीवास्तव :- लगभग चार साल पहले लू दोपहरी में मोबाईल बजा, गुरु पुष्करणा जी का फोन था

हैलो कहते

जोरदार डाँट पड़ी

हुआ यूँ था•••

आदरणीय मधुदीप गुप्ता जी फेसबूक पर पोस्ट बनाए थे कि "अपनी पसन्द की दस (या पन्द्रह था) लघुकथाओं का शीर्षक और लेखक का नाम लिखें।"

अपनी पसन्द की दस लघुकथाओं का शीर्षक और लेखक का नाम तो चुटकी बजाते लिखा जा सकता और लिखकर खुश भी हो रही थी। डाँट इसलिए पड़ी कि उसमें वरिष्ठ लेखकों के एक दो ही नाम थे। मधुदीप भाई अपने मित्र से सवाल किया कि "विभा वरिष्ठ लेखकों को नहीं पढ़ती है क्या?"

गुरु पुष्करणा जी ने पूछा "हुआ क्या है?"

"फेसबूक पर बनाए मेरे पोस्ट पर उसके उत्तर देख लो। उसे कहें वो पढ़े। आपके मार्गदर्शन में उसे बड़ा काम करना है।"

आज पुन: उन दोनों के मार्गदर्शन की तलाश है•••

दस की जगह तीस देखकर सर मत ठोकियेगा••• आज फिर डाँटने वाला कोई तो हो•••

Er Ganesh Jee Bagi :- विभा रानी श्रीवास्तव! इस टिप्पणी पर बहुत कुछ कही जा सकती है, किन्तु बेवजह विवाद होगा। बस इतना कि उन्हें यह बात बर्दास्त नही हुई कि विभा को नए लिखने वालों की लघुकथा ही पसंद क्यों आयी!!

Er Ganesh Jee Bagi :- विभा रानी श्रीवास्तव! जो नही रहे उनके e mail का क्या प्रयोजन ?

विभा रानी श्रीवास्तव :- जो हैं उनका सम्पर्क सूत्र आयोजक के पास ना हो यह ही विश्वास करने की बात नहीं। वैसे भी डाँट खाना है ऐसे भी डाँट खाना है भाई Er Ganesh Jee Bagi जी

विभा रानी श्रीवास्तव :- और माँगी गई है सूची में दस वरिष्ठतम और कहा जा रहा है कि अपना नाम लिख सकते हैं

अब अपना नाम लिखने पर सवाल होगा न दस वरिष्ठतम की कमी कैसे हो गई? और दसवें नम्बर पर होने पर वरिष्ठतम में पासंग ना हो जाए भाई Er Ganesh Jee Bagi!

Wednesday 31 May 2023

शुभेक्षु


"आपको सर्वोच्च शैक्षिक डिग्री अनुसन्धान उपाधि प्राप्त किए इतने साल गुजर गये! अब आप नौकरी करना चाहती हैं। आपने अब तक कहीं नौकरी क्यों नहीं कीं?"

"बहुत जगहों पर आवेदन फ़ार्म भरा लेकिन साक्षात्कार के समय छँटनी हो जाती रही।"

"क्यों छँटनी हो जाती रही? आपके पास अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं फिर उम्मीद करती हैं कि हम आपको नौकरी पर रख लें?"

"मेरी कुरूपता सबसे बड़ी बाधा रही मेरी नौकरी में!"

"आप इतनी कुरूप हुईं कैसे?"

"उछाले गये खौलते पानी की राह में मेरा चेहरा आ गया!"

"किसने ऐसा दुःसाहस किया? आपका जीवन नरक...,"

"कोई अपना! परन्तु, इतने वर्षों तक ना जाने कितने लिजलिजे ग़लीज़ स्पर्श से बचाव का उपाय भी रहा।"

"यहाँ आपकी नौकरी पक्की की जाती है।"

Tuesday 30 May 2023

षडयंत्र


[30/05, 8:21 am] विभा रानी श्रीवास्तव: प्रियंका श्रीवास्तव की रचना के शुरू में ही लेखकीय प्रवेश है।

[30/05, 8:40 am] सिद्धेश्वर : 🔷 आज अधिकांश लघुकथाएं, लघुकथा के मानक पर खरी नहीं उतर रही। हम लोग प्रोत्साहित करने के लिए प्रकाशित कर देते हैं, किन्तु उन्हें लघुकथा लिखना सीखना चाहिए।
[30/05, 8:49 am] विभा रानी श्रीवास्तव : प्रकाशित हो जाने के बाद लेखक कैसे समझे कि उसे सीखना बाकी है?
[30/05, 8:53 am] सिद्धेश्वर: जिस तरह स्पंदन में कई लघुकथाएं भी लघुकथा के पैमाने पर खड़ी नहीं उतरती। और तो और अन्य कई द्वारा संपादित लघुकथा पुस्तकों में  कई लघुकथाएं लघु कहानी के रूप में प्रस्तुत हुई है। आपका सुझाव बेहतर है और मैं कोशिश करूंगा कि ऐसी लघुकथाएं जल्द प्रकाशित ना हो। दैनिक हिंदुस्तान तो फुर्सत पेज पर लघुकथा को लघु कहानी के नाम पर प्रकाशित किया है। लघुकथा में पहले से अधिक कूड़ा करकट आ गया है। हम लोगों को बहुत मेहनत करने की जरूरत है।🙏🙏
[30/05, 8:59 am] विभा रानी श्रीवास्तव: स्पंदन में छपने के बाद भी सदस्यों की लेखनी का रगड़ना चलता रहता है उन्हें पता है कि यहाँ छप जाना प्रमाण नहीं मिल रहा कि वे सिद्ध हो गये••• यहाँ इसलिए छप गये क्योंकि पत्रिका उनके छपने के लिए ही है•••
[30/05, 9:05 am] सिद्धेश्वर: जी। मैं आपकी इन बातों से सहमत हूं l

[30/05, 9:14 am] राजेन्द्र पुरोहित: स्वीकारोक्ति है या विवशता? या दोनों? 🙏
[30/05, 9:28 am] विभा रानी श्रीवास्तव: 🤔क्या मेरी ❓
[30/05, 9:30 am] राजेन्द्र पुरोहित: या दोनों की? 😢
[30/05, 9:33 am] विभा रानी श्रीवास्तव: मेरी क्या विवशता हो सकती है? क्या मेरा कहा गलत है?
[30/05, 9:54 am] राजेन्द्र पुरोहित: बिल्कुल नहीं।
परन्तु जो आपने कहा, वही आपके प्रश्न का उत्तर भी है।
सामने वाला भी यही कहेगा कि जो छप रही है, ज़रूरी नहीं कि लघुकथा हो, लेखक कलम रगड़ते रहेंगे लघुकथा के मानक तक पहुंचने के लिये। फिर प्रश्न करने का क्या प्रयोजन?
[30/05, 10:06 am] विभा रानी श्रीवास्तव: 😄काश! जो मैंने कहा सामने वाला भी कह पाता•••

काश! अन्य जगहों पर छपने के बाद, विजेता रचना होने के बाद लेखक को यह याद रह जाता कि कलम रगड़ना बाकी है•••
[30/05, 10:07 am] राजेन्द्र पुरोहित: स्पंदन तो इसके लिये कुछ करे। आप नहीं, हम सभी।
मैं भी।
सीधे PHD नहीं होगा, बारहखड़ी पर श्रम आवश्यक है।
[30/05, 10:14 am] विभा रानी श्रीवास्तव: धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए।
माली सींचे सौ घड़ा•••।।

[30/05, 9:16 am] राजेन्द्र पुरोहित: आपके दूसरे कमेंट में पहले वाले पूछे गये प्रश्न का उत्तर आ गया।
जो उत्तर आपने दिया, वही सामने वाला भी दे सकता है।
🙂🙏
[30/05, 9:34 am] विभा रानी श्रीवास्तव: 🤔क्यों नहीं दिया?
[30/05, 9:57 am] राजेन्द्र पुरोहित: यह बात सही है।
देना चाहिये था।
जो लॉजिक स्पंदन के लिये न्यायोचित ठहराया गया, वह शेष पत्रिकाओं पर लागू क्यों नहीं हो सकता?
बात केवल लॉजिक की कर रहा हूँ। स्तर, परिश्रम या ईमानदारी की नहीं।
[30/05, 10:01 am] विभा रानी श्रीवास्तव: अन्य पत्रिकाओं से लेखकीय प्रति की उम्मीद की जाती है लेखन श्रम से अर्थ पाने की आकांक्षा।

स्पंदन प्रकाशित करने के लिए कुछ लोग सदस्य बनते हैं लेखक की सदस्यता राशि तो कुछ भी छापा जाए तय है।

दोनों में क्या यह अन्तर काफी नहीं कि स्पंदन का सम्पादक सदस्यों के मर्जी से होता है
[30/05, 10:06 am] राजेन्द्र पुरोहित: यह बात सही है।
निष्कर्ष यह कि लघुकथा को उसके वांछित स्तर तक ले जाने में दोनों को बाधा है।
उनकी बाधा अलग तरह की है और हमारी बाधा अलग तरह की।
[30/05, 10:10 am] विभा रानी श्रीवास्तव: हमारी बाधा तो हम दूर करने का प्रयास करते हैं सदस्यों की रचनाओं पर विमर्श कर

क्या तुम्हारी रचना पर बात नहीं होती?

रचनाओं पर बात करने से ही तो खड़ूस हूँ वरना किसी के खेत-गहना पर कर्जदारी थोड़े न है

इस बार सीमा जी की लघुकथा प्रकाशित नहीं की जा रही। हट जाने का डर खत्म हो रहा है। उनसे बात करने का प्रयास किया गया लेकिन वे मेल का उत्तर ही नहीं दीं।

[30/05, 11:11 am] विभा रानी श्रीवास्तव: अपने वकालत की पढ़ाई का उपयोग इसी में तो कर रही हूँ। मुझे पता है अगर सामने वाले की गलती पर इशारा की तो वो मेरे जले पर नमक छिड़केगा। फिर क्या होगा•••! डम डम डिगा डिगा•••।

Monday 22 May 2023

अमर धन

"उगता नहीं तपा, तो डूबता क्या तपेगा! अपने युवराज को समझाओ पुत्र तुम्हारे कार्यालय जाने के बाद दिनभर उनके दरवाजे, खटिया पर पड़ा रहता है जिनके बाप-दादा जी हजूरी करते रहे। किसी घर का बड़ा बेटा चोरों का सरदार है। किसी घर की औरत डायन है,"

"जी उससे बात करता हूँ।"

"उसे समझाना पंक भाल पर नहीं लगाया जा सकता।"

"कहाँ खो गये पापा?" 

"अतीत में! तुम्हारे देह पर वकील का कोट और तुम्हारे मित्र की वर्दी तथा तुम्हारे स्वागत में आस-पास के कई गाँवों की उमड़ी भीड़ को देखकर लगा, पंक में पद्म खिलते हैं।"

"फूलों की गन्ध क्यारी की मिट्टी से आती ही है।"

Sunday 14 May 2023

02. तमिस्राक्षत

02. तमिस्राक्षत

"कितना सुंदर कार्यक्रम हुआ है, सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ... काश! अन्य राज्यों में भी ऐसा कार्यक्रम हो जाता...!"

"महाधिवेशन के ऐसे क्रार्यक्रम को वर्तमान और भविष्य दोनों याद रखेगा। अन्य राज्यों में सम्मेलन की व्यवस्था कौन करेगा?"

"लाखों सहयोग राशि देकर विदेशों में सहभागिता कर रहे हैं साहित्यकार। संस्था के पास करोडों में अनुदान राशि जमा हो रही है। कुछ से खर्च, कुछ से स्व का जेब गरम। क्या राज्यों के कार्यक्रम में सहयोग राशि देकर साहित्यकार सहभागिता नहीं करेंगे?"

"कार्यक्रम में दो-तीन सितारों को बुला लिया जायेगा। धन उगाही का आसान तरीका। शायद उससे आज का साहित्य भी चमक जाए...!"

"हाँ! जैसे राजनीति के कलाकार को बुलाकर...,"

Wednesday 10 May 2023

01. तमिस्राक्षत और भोर का सपना

 तमिस्राक्षत

पटना

5मई 2023

प्रिय भतीजी

सदा खिलखिलाती रहने वाली तुम्हारी लाड़ली बहन के आँखों में ज्वालामुखी का साया और चेहरे पर अलावोष्णिमा देखकर, परिस्थिति का आकलन करने से अच्छा लगा कि पूछ लिया जाए कि किस सुनामी का सामना कर लौटी है।

पूछने पर उसने बताया कि अनेको बार आने का अनुरोध किया गया था। अनेक तरह से भागीदारी का प्रस्ताव मिला था जैसे मंच संचालन कर लें, पुस्तक के विमर्श में भागीदारी कर लें, धन्यवाद ज्ञापन कर लें। लेकिन उसने सिर्फ श्रोता बनकर पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम में शामिल होना स्वीकार करते हुए, बहुत विलंब से कार्यक्रम में पहुँची थी। सभी से मिलना जुलना हुआ। कार्यक्रम समाप्ती के बाद सबके संग वो भी वापिस होने लगी तो उसे अनुरोध से रोक लिया गया कि विलम्ब से आयी है, अत: थोड़ा और समय ठहरे।

समान्य बातचीत के क्रम में उससे पूछा गया कि "आप सभी जगहों पर चली जाती है! आप आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं! अकेली औरत रह जाने का मजा ही मजा है।"

घर में सभी को यथायोग्य

प्रणामाशीष

तुम्हारी बुआ

■■

भोर का सपना

हैदराबाद 

15 मई 2023

आदरणीया बुआ

आपका पत्र पाकर बेहद क्षोभ हुआ। दुनिया का कथन 'औरत ही औरत के राह में रोड़ा अटकाती है' से औरत होने के नाते मेरी सहमति नहीं होती है लेकिन

मेरी लाड़ली बहन के आँखों में ज्वालामुखी का साया और चेहरे पर अलावोष्णिमा होना स्वाभाविक था, किसी के यह कहने पर 'अकेली औरत रह जाने का मजा ही मजा है'। इसे कहते हैं किसी के पाँवों के नीचे अंगारों का दरिया बिछाना।

मेरी प्यारी बहना का ज्वालामुखी बन उसके ऊपर ही फट पड़ना चाहिए था। उसका अकेले रहने का निर्णय उसका अपना चयन है। किसी के द्वारा उसपर लादा गया मजबूरी नहीं। ये चेहरे को चमकाए रातों के घाव को क्रीम के नीचे छुपाये तितली बनी बिचरती हैं उनकी हँसी के पीछे छिपे मजबूरी को बाखूबी जानती है किटी पार्टी की जनता। ऐसी महिलाओं के लिए साहित्य किटी पार्टी ही तो है। संवेदनहीन रबड़ की गुड़िया सी सजी शीशे के पीछे से झांकती। आजकल के रोबोट उनसे बेहतर हो रहे हैं।

बहना का ख्याल रखियेगा और उससे कहियेगा कि ऐसी बातों के लिए ही इन्सानों को दो कान मिले हुए हैं। जिनका सिरा ना तो दिल की ओर जाता है और ना दिमाग की ओर। उसके इतने अपने हैं इसलिए वह बिना बाजू के पोशाक पसन्द करती है। राह में मिले छोटे-छोटे रोड़े, पहाड़ के शीर्ष पर चढ़ने के माध्यम होते है। उदाहरण यूँ ही थोड़े न बना जाता है।

सभी को यथायोग्य प्रणामाशीष

आपकी भतीजी


परिहार्य

 परिहार्य

सम्पादक :-"अ र् र् रे! अरे, देखिए! वे साहित्यकार महोदय राज्यपाल के अंगरक्षकों के द्वारा कितनी बेदर्दी से रपेटे गये! ओह्ह! घसीटाते हुए भी राज्यपाल के संग अपनी तस्वीर खिंचवा लेने की तृष्णा की डोर नहीं काट पाए।"

पत्रकार :- आप दर्शक दीर्घा में उपस्थित थे और मंच पर आपकी पुस्तक का राज्यपाल के हाथों लोकार्पण हो रहा था। द्वी सम्पादक, तो दोनों की उपस्थिति होनी चाहिए थी।आपका मंच पर नहीं जाने की कोई खास वजह?"

सम्पादक :- "क्या इस लोकार्पण से पाठक की संख्या में बढ़ोतरी हो जायेगी या अधिक रॉयल्टी मिलने लगेगी!"

पत्रकार :- "किसी एक विशेष लिंग के लेखन पर पुस्तक निकालने के पीछे की मंशा क्या हो सकती है?"

सम्पादक :- आप इस पुस्तक के मेरे द्वारा लिखी गयी सम्पादकीय में पायेंगे, धर्म-जाति-लिंग के आधार पर बाँटकर लेखन से मेरी निजी सहमति नहीं है।"

पत्रकार :- धर्म-जाति-लिंग के आधार पर बाँटकर लेखन से तो समय-श्रम लगाकर समाज की बर्बादी है।"

सम्पादक :- "आपका कथन सत्य है। कागज के सृजक का बलिदान कर उनके विलीन होने का हमारा गवाह बनना त्रासदी है। इसलिए तो लेखनी की यात्रा आरम्भ ही होनी चाहिए जीवन के पक्ष से, मृत्यु के विरोध में...!"


नंगा से गंगा हारी

 नंगा से गंगा हारी

[08/05, 9:54 am] पूर्णिमा : एक बार पुनः सम्मेलन की कार्यसमिति और स्वागत समिति ने अपने श्रम-सामर्थ्य, सम्मेलन और साहित्य के प्रति अपनी महान निष्ठा तथा मेरे प्रति प्रेम का प्रणम्य परिचय दिया है। तभी तो सम्मेलन का सद्यः संपन्न 50 वाँ महाधिवेशन भव्य रूप में आयोजित हो सका। हम अपने सभी सहयोगी विद्वानों और प्रणम्य विदुषियों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करते हुए, महाधिवेशन की अपार सफलता के लिए बधाई देता हूँ! इसी माह हम एक भव्य आनन्द-उत्सव का भी आयोजन करेंगे, जिसमें हम अपने सभी सहयोगियों का अभिनन्दन करना चाहेंगे! एक बार पुनः हार्दिक बधाई !

[08/05, 10:14 am] अर्चना : खुलासा जब होगा तब सफलता का एहसास होगा...  वो आइना हम दिखाएंगे..  मेरे पास भी हर चीज का लेखा-जोखा है। पूरा रिकॉर्ड है मेरे पास, कितना सफलतापूर्वक कार्य होता है सम्मेलन में

[08/05, 10:24 am] अर्चना : अध्यक्ष जी का दुबारा जीतने के बाद बुद्धि भ्रष्ट हो गया है।

[08/05, 10:29 am] विभा रानी : किसी बात का शिकायत होना अलग बात है। अशोभनीय बात करना अलग बात है। क्या आप अपने घर की मुखिया के लिए ऐसी अशोभनीय बात कह सकती हैं?

[08/05, 10:33 am] विभा रानी : हमारे शब्द हमारे संस्कार, परवरिश, परिवेश के परिचायक होते हैं। किसी का सम्मान या किसी का अपमान हमारे शब्द कर ही नहीं सकते।

[08/05, 10:41 am] अर्चना : हम जहाँ गलत होता है उसको गलत ही कहेंगे, आप की परिभाषा के अनुसार मुझे नहीं चलना है।

[08/05, 10:47 am] विभा रानी : गलत को गलत कहना बड़े साहस की बात है। आपके साहस को सलाम करते हैं।लेकिन कोई भी बात कहने का एक ही सही तरीका होता है। शिकायत करने की भी मर्यादा होती है। बड़े-छोटे का लिहाज करना अपना संस्कार होता है। खैर! मैंने भी गलत तरीके से बात कहने का विरोध किया, नहीं तो मूक साक्षी होने से गलत बात में साथ देना हो जाता।

[08/05, 11:23 am] अर्चना : आप हमारी तुलना अपने से ना करें आप एक साहित्यकार हैं और हम गलत जहां होता है उसका आवाज उठाते हैं बस एक ही मकसद है मेरा ... थोड़ा बहुत लिख लेते हैं। आपके जैसे विद्वान तो नहीं है, लेकिन अच्छे-अच्छे विद्वान लोगों का भी छक्का छुड़ाते हैं

[08/05, 12:02 pm] विभा रानी : सच ही दुनिया कहती है,'कहीं-कहीं राय देने से अच्छा है पाँच पैसा दे देना। मिथक रावण का उदाहरण देने का कोई लाभ नहीं, वहम से हुए अहम का कोई निदान नहीं। संयम और संवेदनशीलता ना हो तो ना तो साहित्यकार और ना आदमी बनने का कोई मोल होगा।

अब मौन साधा जा सकता है, वरना कीचड़ में ढ़ेला फेकना हो जायेगा ...!

Sunday 7 May 2023

तमिस्राक्षत

 तमिस्राक्षत

प्रियतम पावेल !

मधुर याद...

राजी खुशी के साथ मन की बैचेनियों को बता रही हूँ। जबसे पता चला है कि आपका निर्णय राजनीति को छोड़ कर नौकरी सरकारी गुलामी करने का हुआ है तब से व्यथित हूँ। जनता के बीच रह कर जनता के लिए जीने का इरादा इतना कमजोर क्यों हुआ! सगुन उठाने के समय भैया से आपका सवाल था 'आपको पता है न मुझे नौकरी नहीं करनी है...? आपकी बहन के सुख सुविधा का ख्याल उसे खुद की कमाई से करनी होगी!'

बड़े भैया के संग पापा भी थे जो बेहद चिंतित हो गये थे। तब बड़े भैया ने उन्हें समझाते हुए कहा था," चिन्ता नहीं कीजिये, अभी बाघ के मुँह में खून नहीं लगा है। राजनीत का भूत उतर जायेगा बहुत जल्द।

क्या ऐसा ही कुछ हुआ जो आपका विचार बदल गया? अभी-अभी तो चंद दिन गुजरे.... सरस्वती पूजा को शादी हुई और प्यार दिवस पर ऐसे सौगात की उम्मीद तो न थी। वेणी, बेड़ी नहीं हो सकती...। अगर ऐसा हुआ होता तो रामायण नहीं लिखा गया होता!"

आपकी पुराने विचारों पर वापसी की प्रतीक्षा में सुख - दुःख की साझेदार

आपकी पगली

विभा रानी श्रीवास्तव, पटना

Friday 5 May 2023

निर्विष

 निर्विष

"बड़ी अम्मा! बड़ी अम्मा, आपको दादी बुला रही हैं।"
"क्यों बुला रही हैं तेरी दादी? चल भाग! मैं तेरी बड़ी अम्मा नहीं हूँ। जाकर कह दे मैं नहीं आ रही हूँ।"
"क्यों नहीं आयेंगीं जीजी। जरा अम्मा के बारे में सोचिए, कुछ दिनों के अन्तराल में उन्होंने अपने दोनों बेटों को खो दिया।"
दो बेटा, एक बेटी और पति के संग मालतीदेवी बेहद खुशहाल जीवन बिता रही थीं। लेकिन हथेली पर रखा जलता कोयला सी अनुभूति का सच सबके सामने आ रहा था, छोटा बेटा मानसिक और कद-काठी में बेहद कमजोर पनप रहा था••। समयानुसार बेटी की शादी हो गयी। बड़ा बेटा नौकरी करने लगा। उसकी भी शादी हो गई। बड़ी बहू को देवर का संग पसन्द नहीं था। ननद का मायके आना उचित नहीं लगता। अब एक ही मकान के दो हिस्सों में दो चूल्हे जलने लगे। कालान्तर में छोटे बेटे की शादी एक पैर और एक आँख वाली कन्या से हो गयी। बड़ी बहू को अपने अलग हो जाने के फैसले पर बेहद खुशी होती लेकिन कुढ़न में जलती भी रहती। छोटी बहू के बनाए खाने के प्रशंसकों की संख्या बढ़ती जा रही थी। उसके चार-छ: सहयोगियों का परिवार भी पलने लगा था। अचानक हुए दुर्घटना ने पहले छोटे बेटे को तो कुछ दिनों के बाद बड़े बेटे को अपना ग्रास बना लिया।
"हमारा दु:ख एक बराबर है जीजी। इससे साझा लड़ने के लिए हम कन्धा से कन्धा मिला लेते हैं।" 
"प्रेम के संग-साथ दबे पाँव क्रांति को आ जाना हो ही जाता है .. !" कहते हुए अनुरागी मालतीदेवी ने दोनों बहुओं को अपने अँकवार में भर लिया।

मानी पत्थर

 “दो-चार दिनों में अपार्टमेंट निर्माता से मिलने जाना है। वो बता देगा कि कब फ्लैट हमारे हाथों में सौंपेगा! आपलोग फ्लैट देख भी लीजिएगा और वहीं...