Wednesday 10 May 2023

01. तमिस्राक्षत और भोर का सपना

 तमिस्राक्षत

पटना

5मई 2023

प्रिय भतीजी

सदा खिलखिलाती रहने वाली तुम्हारी लाड़ली बहन के आँखों में ज्वालामुखी का साया और चेहरे पर अलावोष्णिमा देखकर, परिस्थिति का आकलन करने से अच्छा लगा कि पूछ लिया जाए कि किस सुनामी का सामना कर लौटी है।

पूछने पर उसने बताया कि अनेको बार आने का अनुरोध किया गया था। अनेक तरह से भागीदारी का प्रस्ताव मिला था जैसे मंच संचालन कर लें, पुस्तक के विमर्श में भागीदारी कर लें, धन्यवाद ज्ञापन कर लें। लेकिन उसने सिर्फ श्रोता बनकर पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम में शामिल होना स्वीकार करते हुए, बहुत विलंब से कार्यक्रम में पहुँची थी। सभी से मिलना जुलना हुआ। कार्यक्रम समाप्ती के बाद सबके संग वो भी वापिस होने लगी तो उसे अनुरोध से रोक लिया गया कि विलम्ब से आयी है, अत: थोड़ा और समय ठहरे।

समान्य बातचीत के क्रम में उससे पूछा गया कि "आप सभी जगहों पर चली जाती है! आप आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं! अकेली औरत रह जाने का मजा ही मजा है।"

घर में सभी को यथायोग्य

प्रणामाशीष

तुम्हारी बुआ

■■

भोर का सपना

हैदराबाद 

15 मई 2023

आदरणीया बुआ

आपका पत्र पाकर बेहद क्षोभ हुआ। दुनिया का कथन 'औरत ही औरत के राह में रोड़ा अटकाती है' से औरत होने के नाते मेरी सहमति नहीं होती है लेकिन

मेरी लाड़ली बहन के आँखों में ज्वालामुखी का साया और चेहरे पर अलावोष्णिमा होना स्वाभाविक था, किसी के यह कहने पर 'अकेली औरत रह जाने का मजा ही मजा है'। इसे कहते हैं किसी के पाँवों के नीचे अंगारों का दरिया बिछाना।

मेरी प्यारी बहना का ज्वालामुखी बन उसके ऊपर ही फट पड़ना चाहिए था। उसका अकेले रहने का निर्णय उसका अपना चयन है। किसी के द्वारा उसपर लादा गया मजबूरी नहीं। ये चेहरे को चमकाए रातों के घाव को क्रीम के नीचे छुपाये तितली बनी बिचरती हैं उनकी हँसी के पीछे छिपे मजबूरी को बाखूबी जानती है किटी पार्टी की जनता। ऐसी महिलाओं के लिए साहित्य किटी पार्टी ही तो है। संवेदनहीन रबड़ की गुड़िया सी सजी शीशे के पीछे से झांकती। आजकल के रोबोट उनसे बेहतर हो रहे हैं।

बहना का ख्याल रखियेगा और उससे कहियेगा कि ऐसी बातों के लिए ही इन्सानों को दो कान मिले हुए हैं। जिनका सिरा ना तो दिल की ओर जाता है और ना दिमाग की ओर। उसके इतने अपने हैं इसलिए वह बिना बाजू के पोशाक पसन्द करती है। राह में मिले छोटे-छोटे रोड़े, पहाड़ के शीर्ष पर चढ़ने के माध्यम होते है। उदाहरण यूँ ही थोड़े न बना जाता है।

सभी को यथायोग्य प्रणामाशीष

आपकी भतीजी


2 comments:

  1. चाहरीदीवारों के भीतर की सुनामीया एक नहीं कई जज्ब कर लेती हैं दीवारें| गजब नहीं है क्या?

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

लड्डू : फूटना मन का!

जॉर्ज बर्नाड शॉ ने कहा है, “दुनिया में दो ही तरह के दु:ख हैं —एक तुम जो चाहो वह न मिले और दूसरा तुम जो चाहो वह मिल जाए!” हमलोग कामख्या मन्दि...