Thursday, 24 March 2022

'हाइकु लेखन जुनून मांगता है'


गूगल में लिंक्स ढूँढने के क्रम में (सन् 2012 में) हाइकु विधा का पता चला..। बहुत आसान 'खेल' लगा पाँच, सात, पाँच सत्रह वर्ण में अपनी बात कहना। कुछ महीनों में तीन फेसबुक ग्रुप से जुड़ गयी। जोड़ने का काम डॉ. सरस्वती माथुर जी द्वारा हुआ। एक समूह के एडमिन श्री पवन जैन जी (लखनऊ), एक समूह में अनेक एडमिन श्री महेंद्र वर्मा जी, श्री योगेंद्र वर्मा जी, Arun Singh Ruhela जी(भाई अरुण रुहेला जी हम निशाचरों से बहुत परेशान रहे) एक समूह के एडमिन डॉ जगदीश व्योम जी मिले। तभी पता चला हाइकु लिखना खेल नहीं है।

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हाइकु लेखन में जो मुख्य आधार का पता चला

–अनुभूति का विशेष क्षण हो

–उसपर चित्रकार द्वारा चित्र बनायी जा सके

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व्योम जी के फेसबुक ग्रुप में हमारी कोई रचना पास हो जाती तो हम खुश हो जाते। उसपर चर्चा चलती। यात्रा लम्बी चली उनका कारवाँ बढ़ता रहा। और आज लगभग पन्द्रह साल से चल रहे उनके अथक श्रम से तीन पंक्तियों में सत्रह वर्णों के साथ रची जाने वाली, विश्व की सबसे लघु रचना 'हाइकु' को लेकर संपादित की गई पुस्तक में ७२८ पृष्ठों वाले इस वृहतकाय 'हिंदी हाइकु कोश' में देश-विदेश के १०७५ हाइकुकारों के कुल ६३८६ हाइकु संकलित हैं।

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किसी काल में देश के गाँव-शहर के क्या हाल थे..

सवेरा हुआ

लोटे निकल पड़े

खेतों की ओर

–डॉ. जगदीश व्योम

पृष्ठ-613

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गोधूलि वेला

गजरा बेच रही

दिव्यांग बाला

–सविता बरई वीणा

पृष्ठ-181

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जीवन की सच्चाई समझाने वाले..

आखिरी पत्ता

हवा में लहराया

मौन विदाई

-डॉ. सरस्वती माथुर

पृष्ठ-63

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आँगन रीता

अकेला बूढ़ा जन

कैसे जी लेता

–डॉ. राजकुमारी पाठक

पृष्ठ-59

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बदलते ऋतु की पहचान बताने वाले

आँख मिचौली

कोहरा-धूप खेले

सिगड़ी जली

–निवेदिताश्री

पृष्ठ-57

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माघ की धूप

संदूक में जा छिपे

ऊनी कपड़े

–आरती पारीख

पृष्ठ-500

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बादल लाये

बारात द्वार पर

ढोल बजाते

–अंजुलिका चावला

पृष्ठ-444

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वाले हाइकु के संग अनेक मुद्दे समाहित हैं। बहुत कुछ, बहुत-बहुत-बहुत कुछ है...।

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हाइकु कोश से अध्येता-शोधार्थी को हाइकु लेखन समझना आसान होगा तो उन्हें मिलेगा अनेक हाइकु–संग्रह की सूची हाइकुकार/सम्पादक के नाम के संग तो

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हाइकु-संकलन, हाइकु–केन्द्रित समीक्षा एवं शोध-पुस्तकों की सूची तथा पत्र-पत्रिकाओं के नाम सम्पादक.. वर्ष-माह-अंक के साथ..

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यह पुस्तक हमें कल मिली है... लेख्य-मंजूषा पुस्तकालय में रखी जायेगी... अध्येताओं के लिए लाभकारी पुस्तक के लिए डॉ जगदीश व्योम जी को अशेष शुभकामनाओं और हार्दिक आभार के संग साधुवाद

हाइकु जुनून माँगता है


Saturday, 19 March 2022

क्रान्ति


"शिउली नीम पालक चुकुन्दर से रंग तैयार किया गया और यह क्या तुम पहले से अपने चेहरे पर लगा रखा है?" श्यामा की सास ने पूछा।

"बहू! उलटे तावे के रंग सा जिसके चेहरे का रंग हो उसके चेहरे पर काला रंग ही शोभ सकता है न! रुधिरपान करने वाली ‘ढुण्ढा' राक्षसी सी लग रही है तुम्हारी बहू..," श्यामा की दादी सास ने कहा।

"दादी! श्यामा के चेहरे का रंग काल के संग नहीं बदलेगा और जब मुझे श्यामा के पति को श्यामा के रंग से कोई फर्क नहीं पड़ता तो अन्य किसी को कटाक्ष नहीं करना चाहिए।"श्याम ने श्यामा को लाल अबीर लगाते हुए कहा।

"देखिए माँ जी! मेरी बहू ‘ढुण्ढा' राक्षसी के भय से परित्राण दिलाने वाली ‘होलिके' (रक्षादेवि) लग रही है।"श्यामा की सास ने कहा।

"मेरे परिहास को...," दादी की बात पूरी होने के पहले सब ठहाका लगा रहे थे।

Friday, 18 March 2022

पसन्द अपनी-अपनी

आपके जीवन में सब रंग मिले..

मित्र के हाथ

उपहारों से भरे

अबीर झोली


रिश्तों में दरार डालता कौन है

हद में स्याही जज्बे से पौन है

बौर का कहीं और ठिकाना

क्यों कोयल कहीं और मौन है

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लेखन और तस्वीर खींचना जुनून है

 

Saturday, 12 March 2022

'उऋण'


"तुझे चूहा कुतर देता तो दीमक तुम्हारे पन्ने को भुरभुरा कर देता। मेरी तीखी आँच तुम सह नहीं पाती। फिर ऐसा क्या है जो तुम पुनः-पुनः सज जाती रही?" वक्त ने पुस्तक से पूछा।

"इसका उत्तर तो सुल्तान जैनुल आबिदीन से लेकर योगराज प्रभाकर जैसे सिरफिरे दे सकते हैं। अरे! तू तो सब बातों का गवाह रहा है!'

"अच्छा ये बता तू किस-किस किस्से के दर्ज होने से खुश हुई?"

"–चीन के अलादीन के चिराग का भारत के नयी पीढ़ी से तुलना कर देने वाली कथाओं..,

–हार की जीत' से। बाबा भारती कुछ देर तक चुप रहे और कुछ समय पश्चात् कुछ निश्चय करके पूरे बल से चिल्लाकर बोले, "ज़रा ठहर जाओ।" खड़गसिंह ने यह आवाज़ सुनकर घोड़ा रोक लिया और उसकी गरदन पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, "बाबाजी, यह घोड़ा अब न दूँगा"

–मुलक्करम' तो मर गया परन्तु ब्रेस्ट टैक्स ऑन दी साइज ऑफ दी ब्रेस्ट के चक्कर का अन्त करने के लिए जो 'नंगेली' शहीद हुई। उसके साथ चिरुकनन्दन के इकलौता सती होने का किस्सा जब दर्ज हुआ।"

 –राजा जाम दिग्विजयसिंह जाडेजा द्वारा पोलेंड के 500 शरणार्थी पोलिश महिलाओं और 200 बच्चों से भरे जहाज को शरण देना। तुम तो जानते हो उनके संविधान के अनुसार जाम दिग्विजयसिंह उनके लिए ईश्वर के समान है..,"

"इसलिए यूक्रेन से निकले भारत के लोगों को बिना बीजा पौलेंड शरण दे रहा है...! अगले सौ-दो सौ साल तक यह किस्से दोहराए जाते रहेंगे और बार-बार दोहराता मैं और तुम इसका गवाही देते रहेंगे।"

Monday, 7 March 2022

मोर का पैर

"एक तरफ आपका शहर स्मार्ट सिटी के होड़ में है दूसरी तरफ आप उदाहरण बनती जा रही हैं।"
"अरे! मेरे समझ में नहीं आ रहा है आप कहना क्या चाह रही हैं?"
"घर-घर तक पानी-गैस पाइप चला गया, बिजली की चकाचौंध है, अनेक मॉल, ब्रांडेड पोशाकों के बड़े-बड़े दुकान खुल गए, थमे अपार्टमेंट पूरे हो गए.. फुट ब्रिज-ओवरब्रिज के जाल बिछ गए, शराब बन्दी हो गए.."
"सरकारी कार्यालयों में रिक्तियों में बहाली नहीं, चिकित्सा में उन्नति नहीं, शिक्षा ठप्प होने के कगार पर, कुछ वर्षों के बाद प्रत्येक घर वृद्धाश्रम बन जायेगा।  बिन ब्याही माँ बनी चौदह-पन्द्रह साल की बच्चियों का आश्रयस्थल, शेल्टर होम की कहानी इसी शहर के किसी कोने में है,शराब बन्दी की खूब कही: दस करोड़ की उगाही माफिया-पुलिस-नेताओं के जेब में आज भी जा रही। अध्यापक-अध्यापिकाओं को आदेश मिला है शराबियों को पकड़ने का.. जैसे पिटाये खुले में शौच करने वालों को पकड़ने में, कर लें शिकार बड़े-बड़े मगरमच्छ, शार्क ह्वेल, एक बार औचके में राज्याध्यक्ष के घर का..."
"तुम न बड़ी वाली मक्खी हो जो बिगड़े घाव पर...,"
"जैसे बिगड़े घाव से ही तो राज्य की पहचान है., वैसे ही आर्थिक परतंत्रता देकर नारी सशक्तिकरण है!"

Saturday, 5 March 2022

कुटिल बचन साधू सहै...

प्रिय अरुण

शुभाशीष

आशा है तुमलोग कुशल होंगे। तुम गाँव आये थे तो कह गए कि जो पैदावार होता है उससे आप कमरे सबका देखभाल भी करें और आपलोगों के रहने के लिए कमरा खोल जाता हूँ। जब कभी हमलोग गाँव आयेंगे तो हमें रहना भी अच्छा लगेगा।

पुराना घर होने के कारण कमरे की स्थिति बिगड़ रही थी। जिसको थोड़ा ठीक करवा दिया गया है। दो बार का फसल मुझे मिला। उसके बाद मुझे फसल मिलना बन्द हो गया। किसान से पूछा तो उसने कहा कि तुम्हारा छोटा भाई राजू खेत को मनी पर लगा दिया है जिसकी राशि उसे भेज दी जाती है। 

तुम्हारे कमरे को आगे मरम्मत करवाने में लगभग दो-ढ़ाई लाख का खर्च है।

कैसे क्या करना है पत्र पाते सूचित करना। बहू को सस्नेहाशीष बोल देना।

तुम्हारा चाचा

अखिलेश्वर


"क्या सोचा? गाँव के घर के मरम्मत करवाने के बारे में।" पत्र पढ़ने के बाद अरुण की पत्नी ने पूछा।

"पुरखों की निशानी बची रहे। मरम्मत तो करवाना ही होगा।"

"उससे हमलोगों को क्या लाभ होगा? आपको सेवा निवृत्त हुए पाँच वर्ष हो गए। गाँव जाना तो दूर की बात कभी चर्चा भी नहीं करते हैं।"

"सब कुछ स्वयं के लाभ के लिए ही नहीं किया जाता है। कुछ दायित्व समाज के लिए भी पूरा किया जाता है।"

"सहमत हूँ। इस बार की होली में गाँव चलते हैं और सब ठीक-ठाक करवाकर विद्यालय-पुस्तकालय शुरू करते हैं।"

"तुम अपने दिमागी-घोड़ों को तबेला में बाँध कर रखो। यह मेरे घर का मामला है। हम सब भाई जैसा चाहेंगे वैसा होगा।"

"आपके घर का मामला..?तो मैं इस घर में चालीस साल से क्या कर रही हूँ...!"

बेलौस वाई गुणसूत्र


रात को जब सास-ससुर और बच्चों का खाना निपट गया, तो पतीश्वर के आने की आहट सुनते ही वह हुलसकर दरवाजा खोलने गयी, "आज कुछ ज्यादा काम था ? " ....थोड़े सहमे स्वर में पूछ लिया।

बच्चों की पढ़ाई-परवरिश की कोई चिन्ता नहीं। वृद्ध माता-पिता की सेवा हो रही। रिश्तेदारों-अतिथियों का स्वागत में कोई कसर नहीं रह रहा। पच्चीस साल से मिली एक सुघड़ सेविका पत्नी के होने का परम् आनन्द है पतीश्वर महोदय को। रात का वह पल आया जब पतीश्वर का नाखून पत्नी के उस-उस घाव पर भी गया जो सूख ही नहीं पा रहा था।

एक आह के साथ उसने विरोध का स्वर मुखर करना चाहा लेकिन पंजा में दबा..। दबी-दबी सी फफक रही थी पर पतीश्वर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। विरोध ज्यादा देर तक नहीं चल पाया क्योंकि बिलकुल साथ वाला कमरा सास-ससुर का था । पतीश्वर के करवट बदलते वह आँगन में आकर बैठ गयी। थोड़ी देर में उसके सामने एक लिफाफा लहराने लगा। 

"तुम ध्यान से पुनः पढ़ लेना.." झटके से पलट कर देखी तो उसकी सास ने कहा।

वह पढ़ने लगी :- सरकार : अनुज्ञा पत्र

प्रिय महोदय/महोदया

आपको वाहन चलाने के लिए अधिकृत अनुज्ञा पत्र प्राप्त होने पर बधाई !

एक जिम्मेदार चालक के रूप में यह आपका दायित्व है कि "आप परिवहन नियमों से भिज्ञ रहें तथा वाहन को गति-सीमा के भीतर रहते हुए सुरक्षित रूप से चलायें ।

'आपका जीवन बेहद मूल्यवान है।'

पथ पर एक सीमित गति से वाहन चलाएंगे, 'पथ पर उग्र प्रतिस्पर्धा' में नहीं पड़ेंगे तो यह अनुज्ञा पत्र आपको गति और प्रगति दोनों का हकदार बना देगा।

हमारी शुभकामनाएँ सदैव आपके साथ रहेंगी।

शुभेच्छु

परिवहन विभाग

"तुम्हारी जीवन-गाड़ी कैसे चले यह तुम्हें ही तय करने का पूरा अधिकार है।" सास ने कहा

Thursday, 3 March 2022

'का से कहूँ'

 प्रश्न :– पुस्तकें पढ़ना क्यों अच्छा लगता है?

उत्तर :– 
बस अपना ही ग़म देखा है
हमने कितना कम देखा है।
खुली आँखों से काले कोट पहने कोर्ट में बहस करते हुए स्वयं को सपने में देखना शुरू किया। जब से होश सम्भाला पुस्तकों के बीच में ही मेरा रहना हुआ। मुझसे तीन बड़े और एक छोटा भाई था। उनके पास जो पुस्तकें क्रमानुसार नन्दन, चम्पक, बाल भारती, धर्मयुग, सारिका, गुलशन नन्दा, रानू, राजहंस, शिवानी, प्रेमचन्द इत्यादि आतीं, कक्षा की पुस्तकों के संग उन्हें पढ़ती रही। बी.एड –वकालत की पढ़ाई पूर्ण करते-बढ़ते उम्र के साथ मनोरमा, वनिता, गृहशोभा, सरिता, कल्याण, कादम्बनी, पढ़ना शुरू किया। अल्पायु में मेरे मझले भाई और मेरी माँ का साथ छूट जाने के बाद मैं अपने को पुस्तकों में डुबो दी। पुस्तकें मेरी सखी बनीं। तन्हा नहीं थी लेकिन तन्हाई थी...। नारी सुलभ समस्याओं का हल, आदर्श बेटी, आदर्श बहन, आदर्श पत्नी, आदर्श बहू की समझ पुस्तकों से ही मिली। वरना किससे पूछती! कभी खुशी मिलती, लिख लेती। जब कभी दुखी होती, लिख लेती। आस-पास सुनने वाली कोई नहीं थी।
लेलिन-मार्क्स को पढ़ना शुरू किया। सिवाय गायत्री मंत्र– ॐ नमः शिवाय –वो भी कभी-कभी, जब बेहद विचलित होती रही.. रात्रि में सोते समय जप लेती हूँ। 'वोल्गा से गंगा' पढ़ने के बाद पूजन का अर्थ इतना ही समझ में आ सका।
समय कालान्तर में बहन-बेटी-सखी विहीन मैं, मेरे लिए पुस्तकें नींद लाने में सहायक हुईं। विधा में लेखन शुरू किया तो अध्ययन अत्यन्त आवश्यक हो गया। 
छन्दमुक्त कविता, मुक्तक, हाइकु दोहा लघुकथा को समझने में सहायक।
उदाहरण के रूप में देखें:-©रवि कुमार 'रवि'
वह उसकी आँखों की गहराईयों में डूब गया
यह पंक्ति बिल्कुल सपाट है और यह कविता की आदर्श पंक्ति नहीं हो सकती | अगर इसी पंक्ति को हम इस प्रकार लिखें:-
गहरा बहुत है उसकी आँखों का समंदर
एकबार डूबा कि डूबता गया वह
उपरोक्त दोनों पंक्तियों के भाव एक जैसे हैं परंतु कहन और शिल्प बिल्कुल जुदा | हमें इसतरह अपने शिल्प और शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान देना होगा |

 सन् 2015 में डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी से भेंट हुई तो उनसे जाना कि सौ पृष्ठ पढ़ लो तो एक पृष्ठ का लेखन करो। किसी ग़ज़लकार ने भी कहा कि हजार शेर पढ़ लो तो ग़ज़ल लिखना शुरू करो

  कथानक, वाक्य विन्यास, शैली, शिल्प, मुहावरे, शब्दों के चयन और अलंकार आदि पढ़ने से ही समझ में आने लगे।

बस! पाठक का पाथेय होना इतना ही...

Tuesday, 1 March 2022

रत्नाकर-सागर

हर-हर महादेव : ॐ नमः शिवाय
महात्रिरात्रि
विप्लपत्र में घिरी
मीन की भीड़

 शिव=अत्रि
 महात्रिरात्री=महाशिवरात्रि
एक की खुशी
दूसरे के लिए
परेशानी का कारण
नहीं होना चाहिए

"मैंने सभी प्रकार के मुख्य शल्य क्रिया का शुल्क एक कर देने का निर्णय लिया है। इससे समाज में यह सन्देश जायेगा कि हमारे अस्पताल में प्रसव से धन उगाही के उद्देश्य से शल्य क्रिया नहीं की जाती। मेरे इस निर्णय से आपलोग भी सहमत होंगे,  ऐसी उम्मीद करता हूँ।" अस्पताल के प्रबंधक ने अपनी मंडली के सम्मुख कहा।

"महोदय आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? गरीबों से आप और आपकी स्त्री रोग विशेषज्ञ पत्नी द्वारा की गई शल्य- क्रिया की कोई राशि नहीं ली जाती है। आप पहले से ही ‘सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्यूनिटी हेल्थ’ ट्रस्ट की स्थापना कर अपनी सारी कमाई दान कर रहे हैं। आपके पास आने वाले रोगी खुशी से राशि खर्च कर सकते हैं। उन्हें आपलोगों पर पूरा विश्वास होता है।"

"आपलोग तो ऐसा कह रहे हैं मानों मैं महादेव हूँ और गणेश के कटे सर को जोड़ सकता हूँ..!"

तपस्वी

 तेरा वो वाला घर सवा - डेढ़ करोड़ में बेचा जा सकता है। चालीस - पैतालीस लाख में अन्य कोई फ्लैट खरीदकर उनमें उनलोगों को व्यवस्थित कर सकते हो औ...