Saturday, 25 June 2022

बकैती


 उसने बताया

ठंढ़ा-ठंढ़ा – कूल-कूल

तेल गमकऊआ/गमकौआ

दर्द निवारक बाम

चेहरा चमकऊआ (फेसपाउडर)

में पिपरमिंट का रस मिला होता है

जो उगा लिया जाता है

गेंहूँ के फसल के कटने और

धान के बीज रोपने के अंतराल में

उस रस के बेचने से मिला धन

शौक को सुगन्धित करता है


उसने बताया

चाहे शाखाएँ जिस ओर फैली हों

जड़ पूर्वजों के जमीन पर होनी चाहिए

किसी छुट्टी में जाकर वह दीवाल खड़ी करेगा

पिता जाकर छत बनवा देंगे

छत होने से 

किसी काज प्रयोजन में जुटने से

उसके भाइयों को अधिक दो चार दिन

गाँव में विचरण करने में संकोच ना होगा


उसने बताया

आकलन करता है

टमाटर आलू प्याज

इतने लाया था इतने दिन पहले

समाप्ति के पहले ले आना है

धरनी की झुंझलाहट का ख्याल रखना है

उसे मज़ा आता है

इन छोटी-छोटी उलझनों को

सुलझाते हुए गुंजारना है

उसने बताया

ना ना उसने जताया

कार्यालय में अति व्यस्तता के बीच

दो चार पल चुरा लेता है

और अपनों को फोन करता है

सबकी खबर रखता है

कुशलमंगल पूछता है

खासकर जो मुझ जैसे बुजुर्ग हैं


बेटे को माँ के स्नेह की तड़प है तो

 माँ को बेटे के कन्धे का सहारा

दूर बैठे के ख्यालों में ख्याल जो है

बिना राजनीतिक बातों को शामिल किए

भाई ने बताया

नेता अपनी पार्टी के प्रति ही वफादार नहीं होते

और हम उन पर भरोसा करके

उनके हाथों में देश और राज्य दे देते।

अब क्या कहें

राजनीत वाले केवल

अपने तोंद के प्रति वफादार होते हैं

वायरल हुए वीडियो तो

खोदो पहाड़ मरल चुहिया भी नहीं निकलती



Sunday, 19 June 2022

स्वस्तिक पर खून के छींटे

 





"कल बिहार बन्द था।"

"कल भारत बन्द है और हमारी वापसी है, न जाने कैसे हालात होंगे..।"

"हालात जो होने चाहिए उसके पसङ्गा भर नहीं हो पा रहा।"

"क्या आपके द्वारा, तोड़-फोड़, आगजनी और देश के सम्पत्ति नष्ट करने को समर्थन देते हुए उचित ठहराया जाना समझ लूँ?"

"आपको क्या लगता है, कथा-कहानी, गीत-कविता लिखने से स्थिति बदल जाने वाली है? लिखते रहिए, कुछ नहीं होने वाला। पचासी साल के बुजुर्ग वकील से डर लगता है...,"

"क्या आपका कहना न्यायसंगत है कि कलम से जंग नहीं लड़ी जा सकती?"

"जरूर लड़ी जा सकती है। लड़ी भी जाती रही है। लेकिन वर्त्तमान काल क्या दुबककर रहने का चल रहा है...!

Wednesday, 15 June 2022

विषाक्तता

 


सिंदूरी सन्ध्या श्यामली निशा को अपना अधिकार सौंप देने ही वाली थी... घरों से निकले अनेकानेक गन्ध-सुगन्ध भुवन में फैल रहे थे। एक तरफ उन घरों में वामाएँ प्रतीक्षारत थीं तो दूसरी तरफ सजी सँवरी अनारकली पोशाक में , झीना घूँघट डाले, पैरों को हिलाते हुए घँघुरओं के स्वर से उतावलापन फैला रही थी। 

"बकरी की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?" सारंगी ने तबले से कहा।

"मनाएगी न ! मनाएगी, बकरी की अम्मा खैर मनाएगी। शहर के धन्नाराम, नए-नए मूँछ वाले बोली में बढ़त लगाते जा रहे हैं.. । बकरे का सौदा जो ऊँची नाक के दिखावे में बदल गया।" तबले ने कहा।

दूर कहीं बज रहा था

न हीरा है न मोती है न चाँदी है न सोना है

नहीं क़ीमत कोई दिल की ये मिट्टी का खिलौना है

Tuesday, 7 June 2022

धर्म : विभा रानीश्री

"हम पशुपतिनाथ मन्दिर जा रहे हैं। क्या आप भी चलेंगे?" अख़्तर से रवि ने पूछा।

नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में भारत से आये प्रतिभागी नेपाल दर्शन को निकले थे।

"मन्दिर के प्रवेश द्वार पर 'गैर हिन्दू का प्रवेश वर्जित' है का बोर्ड लगा हुआ है!" प्रदीप ने कहा

"रमज़ान माह होने के कारण अख़्तर भाई रोजा में हैं... वैसे भी मन्दिर में देवता का स्पर्श हिन्दू को ही कहाँ मिल रहा?" रवि ने तल्खी से कहा।

तभी प्रदीप का फोन टुनटुनाने लगता है और फोन पर बातकर वो बेहद परेशान नजर आता है.. 

"क्या बात है प्रदीप जी आप बेहद घबराए हुए लग रहे हैं...?" अख़्तर ने पूछा।

"मेरी पत्नी को गहरी चोट लग गयी है। अस्पताल में भर्ती करवा दी गयी है। लेकिन उसको खून देना है और अस्पताल में खून मिल नहीं रहा है.."

"किस ग्रुप का खून है ?" अख़्तर ने पूछा

"बी-नेगेटिव," प्रदीप ने कहा।

"ना तो चिन्ता कीजिये और ना चलने में देरी। मेरा भी खून बी-नेगेटिव है..," अख़्तर ने कहा।

"आप गैर हिन्दू भी हैं और रोजा में भी। आप?" रवि ने कहा।

"आप मुझे शर्मिंदा क्यों कर रहे हैं रवि जी..," प्रदीप जी, अख़्तर के पंजों को कसते हुए कहा।

Thursday, 2 June 2022

कोंपल के रक्षक

"क्या इस घर के मालिक को बच्चे पसन्द नहीं थे कि इकलौता बेटा हुआ और उस इकलौते बेटे ने औलाद ही नहीं किया?"अभी फँख फैले नहीं थे लाल-लाल गलफड़ वाले दुधमुँहे चूजे ने माँ चिड़ी से पूछा।

"अरे नहीं रे! मालिक को बच्चे बहुत पसन्द थे। मेरी दादी बताया करती थीं कि ये अपनी ही शादी में आए छोटे-छोटे बच्चों को कप-प्लेट, लैंप-लालटेन के शीशे को फोड़ने पर क्रमानुसार चवन्नी-अठन्नी-रुपया-दो रुपया दिया करते थे।  च च चनाक, ट्टुन ट्टुन टनाक बिखरे किरचों के ढ़ेर पर माँ, बुआ, मामी, चाची, मौसी से डाँट खाने से बेहद प्रफ्फुलित होते।" माँ चिड़ी किस्सा सुना रही थी।

"संयुक्त परिवार के सुख को भोगा पिता-पुत्र अपने पुश्तैनी घर को बाल गृह बना रखा है।"

"मालिक के बेटे के अनुशासन में हमें निश्चिंतता की जिन्दगी मिल जाती है। है न माँ!"

तपस्वी

 तेरा वो वाला घर सवा - डेढ़ करोड़ में बेचा जा सकता है। चालीस - पैतालीस लाख में अन्य कोई फ्लैट खरीदकर उनमें उनलोगों को व्यवस्थित कर सकते हो औ...