Tuesday 7 June 2022

धर्म : विभा रानीश्री

"हम पशुपतिनाथ मन्दिर जा रहे हैं। क्या आप भी चलेंगे?" अख़्तर से रवि ने पूछा।

नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में भारत से आये प्रतिभागी नेपाल दर्शन को निकले थे।

"मन्दिर के प्रवेश द्वार पर 'गैर हिन्दू का प्रवेश वर्जित' है का बोर्ड लगा हुआ है!" प्रदीप ने कहा

"रमज़ान माह होने के कारण अख़्तर भाई रोजा में हैं... वैसे भी मन्दिर में देवता का स्पर्श हिन्दू को ही कहाँ मिल रहा?" रवि ने तल्खी से कहा।

तभी प्रदीप का फोन टुनटुनाने लगता है और फोन पर बातकर वो बेहद परेशान नजर आता है.. 

"क्या बात है प्रदीप जी आप बेहद घबराए हुए लग रहे हैं...?" अख़्तर ने पूछा।

"मेरी पत्नी को गहरी चोट लग गयी है। अस्पताल में भर्ती करवा दी गयी है। लेकिन उसको खून देना है और अस्पताल में खून मिल नहीं रहा है.."

"किस ग्रुप का खून है ?" अख़्तर ने पूछा

"बी-नेगेटिव," प्रदीप ने कहा।

"ना तो चिन्ता कीजिये और ना चलने में देरी। मेरा भी खून बी-नेगेटिव है..," अख़्तर ने कहा।

"आप गैर हिन्दू भी हैं और रोजा में भी। आप?" रवि ने कहा।

"आप मुझे शर्मिंदा क्यों कर रहे हैं रवि जी..," प्रदीप जी, अख़्तर के पंजों को कसते हुए कहा।

12 comments:

  1. रिश्ते और अपनेपन का बोध कराती बहुत अच्छी
    लघुकथा

    ReplyDelete
  2. भगवान तो सबके लिए एक से । धर्म तो बाद में आया इंसान पहले ।।
    संदेशपरक लघुकथा ।

    ReplyDelete
  3. इंसानियत देखते हैं कब तक खैर मनाती है

    ReplyDelete
  4. इंसानियत सब धर्मों से पर और श्रेष्ठ है..हिन्दू गैर हिन्दू सियासी ढोंग हैं.. एकता एवं भाईचारे का संदेश देती बहुत सुन्दर लघुकथा।

    ReplyDelete
  5. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 8 जून 2022 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
    >>>>>>><<<<<<<
    पुन: भेंट होगी...

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार आपका... जल्द ही भेंट होगी

      Delete
  6. हिंदू-मुसलमान फितूर के सिवा कुछ नहीं, सौहार्द्र की जड़ों में डाली गयी विष से सींची गयी शाखाएँ हैं परंतु इंसानियत के पेड़ अब भी बहुत सारे बचे हैं जिसके फूल की खुशबू ये सारे सारे भ्रम मिटा सकती है।
    संस्मरणात्मक ,संदेशात्मक लघुकथा दी।
    प्रणाम
    सादर।

    ReplyDelete
    Replies
    1. असीम शुभकामनाओं के संग सस्नेहाशीष छुटकी

      Delete
  7. एक ही रक्त-मज्जा अभी निर्मित हुये हैं सभी मानव।धर्म और राजनीति ने लोगों को अलग-अलग बाँट एक दूसरे से दूर कर दिया है।बहुत ही प्रेरक लघुकथा प्रिय दीदी । यही सभ्य और शिक्षित समाज की पहचान है कि हम तुच्छ बातों से ऊपर उठकर सच्चा मानवतावादी होने का परिचय दें।हार्दिक बधाई और आभार आपका 🙏🙏🌺🌺♥️♥️

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर। ऐसे भी जिस मंदिर में ग़ैर हिंदू का प्रवेश वर्जित है, उस ग़ैर हिंदू मंदिर में ग़लती से देवता भी हिंदू बना दिए गए हैं। अन्यथा भगवान का भी भला कोई मज़हब होता है! हमारे भगवान तो सबके हैं और सबके भगवान हमारे हैं।

    ReplyDelete
  9. सुंदर लघु कथा ,धर्म से बढ़ कर कर्म है।

    ReplyDelete
  10. मंदिर मस्जिद गिरिजाघर में बाँट दिया इंसान को
    धरती बाँटी सागर बाँटा मत बाँटो इंसान को।
    अत्यंत प्रेरक लघुकथा।

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

मानी पत्थर

 “दो-चार दिनों में अपार्टमेंट निर्माता से मिलने जाना है। वो बता देगा कि कब फ्लैट हमारे हाथों में सौंपेगा! आपलोग फ्लैट देख भी लीजिएगा और वहीं...