आपके जीवन में सब रंग मिले..
मित्र के हाथ
उपहारों से भरे
अबीर झोली
रिश्तों में दरार डालता कौन है
हद में स्याही जज्बे से पौन है
बौर का कहीं और ठिकाना
क्यों कोयल कहीं और मौन है
°°
लेखन और तस्वीर खींचना जुनून है
तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग मेघ गर्जन— माँ की सिखलायी धुन में नाचे मृण शिल्प में बोसा जुड़ रहा...
होली शुभ हो।
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