Thursday, 26 September 2019

बुरी बेटियाँ


*"चिंतन"*

तुलसी, तुलसी रहती है
चाहे प्रेम गणेश से करे
चाहे ब्याही जाए शालिग्राम से
बेटी बेटी नहीं रह जाती है
चाहे ब्याही जाए अमर या अकबर के साथ

बुरी होती हैं ?
बुरी होती है बेटियाँ
ब्याह के आते
चाहिए बँटवारा।
एकछत्र साम्राज्य
मांगें सारा का सारा।
खूंटे की मजबूती तौलती
आत्महत्या की धमकी।
प्रभुत्व/रूप से नशा पाती
वंश खत्म करती सनकी
समझती घर को फटकी।
(फटकी=वह झाबा जिसमें बहेलिया पकड़ी हुई चिड़ियाँ रखते हैं)

बहुत बुरी!
हाँ! हाँ, बहुत बुरी
होती है वो बेटियाँ
मूक गऊ सी बंध जाती हैं
सहती जाती हैं,
सहती जाती हैं
लेकिन कभी बोल कर बताना,
दूसरों को कि बोलना जरूरी है,
समय से आवाज उठाओ..
स्त्रियों तुम भी इंसान हो...
दोष नहीं है केवल बेटियों का..
हम अभिभावक उन्हें संतुलित रहने की

  1. सीख देने में असफल हो जाते हैं।

6 comments:

  1. सच कहा दी.....बहुत अच्छी संदेश देती पंक्तियाँ
    कौन सुने फरियाद ख़ुद में मगन जमाना
    माँ तुम ही बिटिया को उसका सामर्थ्य बताना

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (28-09-2019) को " आज जन्मदिन पर भगत के " (चर्चा अंक- 3472) पर भी होगी।


    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  3. बहुत सुंदर संदेश देती रचना ,सादर नमस्कार दी

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  4. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 01 जनवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. सुंदर संदेश देती रचना

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आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

अभिविन्यास

 "अद्धभुत, अप्रतिम रचना। नपे तुले शब्दों में सामयिक लाजवाब रचना। दशकों पहले लिखी यह आज भी प्रासंगिक है। परिस्थितियाँ आज भी ऐसी ही हैं। ...