Tuesday, 30 October 2012

आउल बेदे आई ना


जब ढ़ाई साल का था तब खड़ा नहीं होता था ......
जब पाँच साल का था तब शब्द बोलता नहीं था ..... 
प्रत्येक वस्तु के लिए उसका अपना शब्द होता था ....
जैसे ~ ~ ~ ~ ~
सब्जी के लिए पच्ची -----
चप्पल के लिए पच्चल -----
गंजी और कंघी के लिए चांदी -----
जब कभी उसे सही बोलने के लिए बोला जाता ....
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
तो वो चुप रहता ....
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
सही शब्द सिखलाने वाला मुर्ख है ,
साफ-साफ उसके चेहरे पर लिखा होता
या ~ ~ ~ ~ ~ ~
बड़े आत्मविश्वास के साथ बोलता ----
आउल बेदे आई ना ( राहुल को बोलने नहीं आता ) ..... !!!!
लेकिन आज हिंदी-अंग्रेजी में भाषण दे लेता है ..... !!!!
उसकी छोटी सी भी उपलब्धि मुझे बहुत ख़ुशी देता है ..... !!!!
आउल बेदे आई ना सपना सा लगता है ..... !!!!

Tuesday, 16 October 2012

एक बार फिर साबित हुई , I am Emotional fool .......... :D

 
एक बार फिर साबित हुई ,
I am Emotional fool .......... :Dgrin
हम जानवर से थोड़े से अलग
अपने दिमाग की वजह से समझे जातें हैं ....
तो दिमाग थोड़ा ज्यादा नहीं लगा लेते .....
जो जैसा है वैसा ही नहीं समझ ...
थोडा वैसा ज्यादा ही समझने की समझदारी दिखा .....
थोड़ा ज्यादा ही समझदार खुद को समझ ,खुदा समझ बैठते हैं  
 
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कब से थी हर्षित ,
हर्ष ,कहीं सुला दी ....

किसी ने दिये दहसत ,
हदस , कहीं छिपा दी ....

क्यूँ बन गया दर्दनाक ,
दर्द ,कहीं दिखा दी ....
 
कई जल गये जज़्बात ,
जज्बे, कहीं जला दी ....

क्यों नहीं लड़ सकी ख्यालातों ,
ख्यालें , कहीं दबा दी ....

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“नगर के कोलाहल से दूर-बहुत दूर आकर, आपको कैसा लग रहा है?” “उन्नत पहाड़, चहुँओर फैली हरियाली, स्वच्छ हवा, उदासी, ऊब को छीजने के प्रयास में है...