Tuesday, 22 October 2013

एक प्रयास सेदोका का






*तांका [५७५७७]*

शशि बताना
किस धर्म का मानू
दूज चौथ को
ख़ुशी उजास देते
हो इन्सान बनाते

~~

सेदोका [५७७५७७]

निशा श्रृंगार
चंदा प्यार छलके
सतीसत्व  महके
शशि मुखरा
बदली घेर गया
भार्या दिल दहके

~~

चोका [५७५७५७५७५७५७ ...५७७ ].

राहगीर था
राह बढ़ता गया
कुआँ में झाँका
था मनोरोगी सोचा
सुधांशु डूबा
डाले रस्सी में फंसा
चट्टान भारी
जोरा-जोरी में गिरा
नजरें उठा
 सिर चोट मिटाया
शशांक मिला
नभ में चमकता
नज़र आया
चिल्लाया बचा लिया
ख़ुशी से झूमा नाचा

~~


20 comments:


  1. निशा श्रृंगार
    चंदा प्यार छलके
    सतीसत्व महके
    शशि मुखरा
    बदली घेर गया
    भार्या दिल दहके---------

    बहुत सुंदर प्रकृति को समेटकर लिखा तांका
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    सादर

    आग्रह है---
    करवा चौथ का चाँद ------

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (24-10-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 155" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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    Replies
    1. मेरी कोशिश आपको पसंद आई
      शुक्रिया
      आभार कि आप उसे यहाँ तक ले कर आये
      हार्दिक शुभकामनायें

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  3. सतीसत्व महके
    शशि मुखरा
    बदली घेर गया
    बहुत सुंदर

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  4. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-24/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -33 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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    Replies
    1. मेरी कोशिश आपको पसंद आई
      शुक्रिया
      आभार कि आप उसे यहाँ तक ले कर आये
      हार्दिक शुभकामनायें

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  5. सादर प्रणाम |
    बहुत खूब |
    मन आनंदित हों उठा |

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  6. वाह ! बहुत खूबसूरत , लाजवाब !

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  7. सर्व गुण संपन्न हो रही आप :))

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  8. बहुत खूब ... प्रेम को अनेक तरीकों की विधा में बाँध लिया ...

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  9. शशि बताना
    किस धर्म का मानू
    दूज चौथ को
    ख़ुशी उजास देते
    हो इन्सान बनाते
    ....लाज़वाब....सभी प्रस्तुतियां बहुत सुन्दर...

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  10. बहुत सुंदर और अच्छा चित्रण के भाव .....

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  11. दूज चौथ को
    ख़ुशी उजास देते
    हो इन्सान बनाते
    ......सभी बहुत सुन्दर...

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