
चलो वादा रहा
आँचल सामने है
उतारो देखें
कितना भर
सकता है
थक ना जाना
थकना मना होता
शीत युद्ध शौक है ना।
~~
चलो आजमा लो
कौन टूट कर
बिखरता है
बिखरने वाला ही
जीतता है क्यूँ कि
उस हद तक
वही लड़ सकता है
~~
चलो झांको अंतःकरण
परीक्षा देने वाला
रम जाता है
उत्तर ढूंढ़ ने में
कहाँ फुर्सत होती
सोचने में समय गवां दे
क्या गलत किया
क्या सही किया
बदला ना लेने वाला
बहादुर होता है
~~
चलो सोचा जाए
क्या खोये ,क्या पाए
कौन किसके पीछे
कैसा समय गंवा दिया
सत्ता ना मानने वाला
अपने कर्म पर ध्यान दिया
अपने पर अपने पर
छोटी-छोटी बातों पर
उसने अपनी
प्रसन्नता के खजाना
लुटने नहीं दिया
~~
बहुत ही बहुमूल्य बातें ....बहुत सुंदर रचना .....!!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर .
ReplyDeleteनई पोस्ट : उत्सवधर्मिता और हमारा समाज
sundar man se nikle sundar vichaar
ReplyDeleteहौसला देते भाव
ReplyDeleteबहुत सुन्दर..उत्साह बढ़ाती रचना
ReplyDeleteSAADAR PRANAAM
ReplyDeleteBAHUT hi sundar panktiyaa.....
laajwab lekhan ....
बहुत उम्दा अभिव्यक्ति ,,,!
ReplyDeleteRECENT POST -: हमने कितना प्यार किया था.
कितने अच्छे विचार पिरोये हैं आपने।
ReplyDeleteअच्छी प्रस्तुति ! चरिवेती ! चरिवेती! ! चरिवेती! !
ReplyDelete....उत्साह बढ़ाती रचना
ReplyDeletenice lines and nice blog...
ReplyDeleteyour most welcome to my blog..
http://iwillrocknow.blogspot.in/
बेहतरीन और लाजवाब |
ReplyDeleteसुंदर रचना
ReplyDelete