Friday 28 August 2015

यशोधरा

दहेज का दोष दूँ या माँ बाप के मनोरोग का या लड़की के जुझारू ना होने का
मेरे एक परिचित की दूसरी शादी अपने से दस साल छोटी खूबसूरत लड़की से होती है ...... शादी का तौहफा अपने तीन छोटे छोटे बच्चे देता है जो उसकी पहली पत्नी के सन्तान होते हैं ..... एक दो साल सब ठीक ठाक रहा ; ऐसा मुझे अनुमान है , हम एक मकान में ही रहते थे तब ..... दूसरी शादी के दो तीन साल के बाद एक दिन अचानक वो मर्द नामक जीव गायब हो गया .......
 तीन बच्चों की परवरिश करती वो स्त्री आज भी अपने पति का इंतजार कर रही है 23 साल से

क्या वो यशोधरा है 
बच्चें कैसे पूछें

कहती है चेटी
तू नानी की बेटी

~~~~~
~~~~~~~ किसी ने कहा
जिस घर में बेटी दी जाती है ; उसके भरण पोषण का खर्चा , पूरी जिंदगी वो घर उठाता है तो दहेज स्वाभाविक चीज है
_____________________ भरण पोषण घर तो पहले भी नहीं उठाता था ...... आँख खुलने से लेकर आँख बन्द होने तक मुफ़्त की नौकरानी धोबिन नर्स मिलती थी ...... अब तो पकाने से लेकर कमाने वाली भी मिलती है
~~~~~~~ किसी ने कहा
हम अपने लिए कुछ थोड़े ना मांग रहे जो दे रहे अपनी बेटी को ख़ुशी खुशी दे रहे हैं
___________________ कुछ बेटियाँ अपवाद होती हैं जो मांग मांग कर जबरदस्ती अपना दहेज तैयार करवाती हैं ....
अपवाद को छोड़ दें तो दहेज देने में कितने माँ बाप खुश होते हैं
_______ दहेज को बेटी को दिया तोहफा का नाम मत दीजिये
~~~~~~~ किसी ने कहा
पिता के अर्जित धन में से जो दहेज मिल जाता है ; वही तो बेटी को मिल पाता है , सब तो बेटों को ही तो मिलता है
___________ पिता के अर्जित धन में से बेटियों को भी मिले ये तो कानून में भी है ..... पिता की जिम्मेदारियों को बेटियाँ भी उठाये ये भी कानून हैं ...... कितने ससुराल वाले सहयोग करते कि बेटियाँ आजादी से वो जिम्मेदारी पूरा कर सके
__________ तब तो केवल बेटों की ओर समाज देखता और बहुओं को जिम्मेदारियों को याद दिलाया जाता है ..... क्यों नहीं बेटियाँ आकर भाभियों को राहत का पल देती हैं
__________ अपवाद नहीं देखना मुझे

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