Friday, 5 June 2026

अन्त की साँसें

कमलजीत ने अपने बख्तरबन्द सूट का हेलमेट उतारकर जहरीली हवा का सूचकांक देखा। रीडिंग लाल निशान से भी ऊपर थी। लगभग अट्ठाइस-तीस वर्ष पहले यह जगह ‘सपनों का शहर’ कहलाती थी—चौड़ी सड़कें, दोनों ओर अमलतास -गुलमोहर के वृक्ष और बीच से बहती एक शान्त नदी। वहीं आज यहाँ केवल कंक्रीट के काले कंकाल खड़े थे। नदी एसिड से भरे नाले में बदल चुकी थी और हवा में बारूद की गन्ध स्थायी रूप से घुल गई थी।

“सर, यहाँ हमें कुछ नहीं मिलेगा। यह पूरा इलाका ‘डेड ज़ोन’ घोषित हो चुका है,” युवा सैनिक कबीर ने सूखी धरती पर कदम रखते हुए कहा। उसके पैरों के नीचे मिट्टी राख बनकर उड़ने लगी। कमलजीत एक टूटे हुए फ्लाईओवर के नीचे बैठ गया। उसकी आँखों के सामने अतीत का वह भयावह दृश्य तैर उठा। दो महाशक्तियों के अहंकार ने जब युद्ध का रूप लिया, तब केवल इंसान ही नहीं मरे थे, प्रकृति भी लहूलुहान हो गई।रासायनिक हमलों और परमाणु विस्फोटों ने महीनों तक आसमान को काले धुएँ से ढके रखा। सूरज की रोशनी धरती तक न पहुँच सकी। जंगल, बाग-बगीचे और खेत कुछ ही दिनों में राख हो गए। पेड़ समाप्त हुए तो वर्षा रूठ गई, जलस्रोत सूख गए और जीवन का चक्र टूट गया। युद्ध ने कुछ महीनों में वह सब नष्ट कर दिया, जिसे प्रकृति ने करोड़ों वर्षों में सँवारा था।

“हम समझते रहे कि हम शहर क्या देश बचाने के लिए लड़ रहे हैं,” कमलजीत की आवाज़ भर्रा गई, “लेकिन हम यह भूल गए कि शहर इमारतों से नहीं, उसकी साँसों से बनता है। जब पर्यावरण ही नहीं बचा, तो शहर भी मर गया।”

कबीर की नज़र अचानक फ्लाईओवर की एक दरार पर पड़ी। मलबे और जहरीली मिट्टी के बीच एक नन्हा-सा हरा अंकुर सिर उठाए खड़ा था। कंक्रीट के उस मरुस्थल में वह जीवन की पहली दस्तक था।

“सर! देखिए!” कबीर उत्साह से चिल्लाया।

कमलजीत झुककर उस अंकुर को देखने लगे। उनकी आँखों में वर्षों बाद चमक लौटी। उन्होंने अपने वॉटर-पैक से कुछ बूँदें उसकी जड़ों में टपका दीं।

“इंसान के युद्ध ने शहर मिटा दिया, कबीर,” वे धीमे से बोले, “लेकिन प्रकृति हार मानना नहीं जानती। यदि हम अपनी बंदूकें हमेशा के लिए रख दें, तो यह खोया हुआ शहर फिर साँस लेना सीख सकता है।”

"हाँ! हाँ इस उजड़े हुए शहर में यही एक अकेला अंकुर है, पर इसके भीतर एक पूरे भविष्य का जंगल हरा हो रहा हैं।" अति उत्साहित कबीर सर ऊँचा कर हथेली जोड़े आकाश को आह्वान कर रहा था।

दोनों सैनिकों ने उस नन्हे पौधे को सलाम किया। 

अन्त की साँसें

कमलजीत ने अपने बख्तरबन्द सूट का हेलमेट उतारकर जहरीली हवा का सूचकांक देखा। रीडिंग लाल निशान से भी ऊपर थी। लगभग अट्ठाइस-तीस वर्ष पहले यह जगह ‘...