Thursday, 4 April 2019

सत्तामतान्ध को सुनाई नहीं देता


सड़क पर निकलो तो पता चलता है आज भी बहुत सी स्त्रियाँ किस हाल में जी रही हैं... ना कहने पर जला दी जाती हैं... नभ क्या साझा करेंगी जब कह नहीं पाती "जमीं हमारी है।"

कॉंग्रेस का मेनिफेस्टो और पाखी पत्रिका का मुख्यावरण कोहराम मचवा दिया... कितनी लेखनी उबल पड़ी , साधारण सस्ता रास्ता प्रचार का... बदनाम हुए तो क्या हुआ... "कमी हमारी है।"

मतदान जरूर करें... ऐसी पार्टी को जो आधी आबादी को पचास प्रतिशत की हिस्सेदारी सब स्थलो पर देने में चूका ना हो...


2 comments:

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17 अप्रैल -अन्तरराष्ट्रीय हाइकु दिवस

युद्धान्तहीन— पृष्ठों के युद्धपोत  बाड़ के पास ## ख़िंज़ाँ की शाम— ग्रहण में ही रहा आह या वाह ## तुम और मैं ना/क्यों ‘हम' नहीं रहे— ख़िज...