Saturday, 31 August 2019

"शमा"


"जब आने वाले पूछते थे - तबीयत खराब है क्या? आप कहते- नहीं। दरख्त अब बीज बन रहा है। एक कविता भी लिखी आपने- कल तक जो एक दरख्त था, महक, फूल और फलों वाला, आज का एक जिक्र है वह, जिंदा जिक्र है, दरख्त जब बीज बन गया है, हवा के साथ उड़ गया है, किस तरफ अब पता नहीं। उसका अहसास है मेरे साथ।
  आज फिर वो दरख्त अब बीज बन रहा है। मुझे भी उस एहसास को संजोते रहना है..., 'वन ट्रैक माइंड' वाले इंसान...," अवसर था अमृता प्रीतम के जन्मशताब्दी समारोह का एकांत दिल की बातें कहने का अवसर दे डाला।
        इमरोज को हद से ज्यादा चाहने लगी थी रौशनी.. रौशनी को लगा कि अभी उसका दायित्व है इमरोज के साथ रहना और अपना कर्तव्य निभाना... इमरोज इसकी अनुमति दे नहीं रहे थे..।
"पागल मत बनो... सरहद रक्षार्थ दिल में लगी गोली सा होता है इश्क...,"

3 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (01-09-2019) को " जी डी पी और पी पी पी में कितने पी बस गिने " (चर्चा अंक- 3445) पर भी होगी।


    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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    1. सस्नेहाशीष संग हार्दिक आभार बहना

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  2. पागल मत बनो... सरहद रक्षार्थ दिल में लगी गोली सा होता है इश्क...,
    बहुत सही कहा था इमरोज ने इसीलिए जीवन होम दिया एक गैर परम्परागत इश्ह्क के लिए | सादर प्रणाम और शुभकामनाएं आदरणीय दीदी |

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