माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग
मेघ गर्जन—
माँ की सिखलायी
धुन में नाचे
मृण शिल्प में
बोसा जुड़ रहा है—
मातृ दिवस
पहला तारा
माँ सिखला रही है
गाँठ खोलना
आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!
तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग मेघ गर्जन— माँ की सिखलायी धुन में नाचे मृण शिल्प में बोसा जुड़ रहा...
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आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!