Saturday, 9 May 2026

मातृ दिवस : आस की गूँज



तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग

माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग

 मेघ गर्जन—

माँ की सिखलायी

धुन में नाचे

मृण शिल्प में

बोसा जुड़ रहा है—

मातृ दिवस


पहला तारा

माँ सिखला रही है

गाँठ खोलना

6 comments:

  1. क्या बात है दीदी! थोड़े शब्द पर ममता का असीम आकाश खुला है उनमें!
    माँ और संतति का नाता अटूट है! हम सब मांओं को ढेरों बधाई हमारे नाम के अतुल्य दिवस के लिए 🙏🙏

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  2. चित्र और रचना दोनों ही हृदय-विजयी हैं।

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  3. बहुत खूब,,,,, मां से ही सारा घर संसार है

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  4. सुंदर सृजन

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ग़ज़ल

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