Wednesday, 11 June 2014

आओ ना ..... आओ ना मॉनसून ....










आओ ना ..... आओ ना मॉनसून ....

वसंत के मोहक
वातावरण में ,
धरती हंसती ,
खेलती जवान होती ,
ग्रीष्म की आहट के
साथ-साथ धरा का
यौवन तपना शुरू हुआ ,
जेठ का महीना
जलाता-तड़पाता
उर्वर एवं
उपजाऊ बना जाता ,
बादल आषाढ़ का
उमड़ता - घुमड़ता
प्यार जता जाता ,
प्रकृति के सारे
बंधनों को तोड़ता ,
पृथ्वी को सुहागन
बना जाता ....
नए - नए
कोपलों का
इन्तजार होता ....
मॉनसून जब
धरा का 
आलिंगन
करने आता ....
आओ ना मॉनसून 
======






11 comments:

  1. सच में अब तो मानसून को आपका कहना मानना ही चाहिए...बहुत परेशान कर दिया गर्मी ने...

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-06-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1641 में दिया गया है
    आभार

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  3. उम्मीद है आपकी पुकार जल्दी ही सुनाई दे.

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  5. nhi sun raha abhi bhi mansoon

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  6. अब तो मानसून को आना ही होगा..नहीं तो खैर नही.. और साथ ही साथ बहुत ही बधाई

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  7. सुन्दर चित्रण...

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  8. अति सुन्दर..... बधाई आपको

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  9. वाह ! बेहद सुंदर अभिव्यक्ति !

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आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
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