Friday, 13 June 2014
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सन्ध्या का आलोक
दिन अपनी अन्तिम देहरी पर ठिठका खड़ा था। पार्क में पुराने नीम के नीचे बैठे लगभग पचहत्तर-सतहत्तर वर्षीय वृद्ध अपने घुटने सहला रहे थे। हर शाम उ...
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Interesting and Amazing World thank U .... मुझसे बेहतर मुझे , कौन जान सका है …। मेरे बारे कौन , क्या कहता है क्या फर्...
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(1) पीली चुनर ओढ़े हठी धरणी मधुऋतु में ************* (2) षट रागिनी कुहू लगे मन पे कुसुमागम ************* (3) किंशुक छाया वशीभूत अचल...



बहुत अच्छा लगा.
ReplyDeleteबहुत खूब !!
ReplyDeleteब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन फादर्स डे मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चित्र और भाव ....
ReplyDeleteसुन्दर भावो के साथ सुन्दर चित्र..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर दी और आपका चित्र तो बहुत ही बढ़िया लगा |
ReplyDeleteबहुत सुन्दर ...........नमस्ते दी
ReplyDeleteबहुत सुन्दर भाव और चित्र के साथ अभिव्यक्ति .... !!
ReplyDeletesach me apke shabdo me jaadu hai....
ReplyDeleteसुंदर ।
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