Friday, 13 June 2014
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२१ मई -चाय दिवस
सन्धान उधड़ रहे थे रिश्ते धीरे-धीरे, जैसे पुरानी रज़ाई का कोना, बातों के धागे टूट चुके थे, और मौन ने घर भर में शुरू कर दिया अँधेरा बोना! त...
सन्धान उधड़ रहे थे रिश्ते धीरे-धीरे, जैसे पुरानी रज़ाई का कोना, बातों के धागे टूट चुके थे, और मौन ने घर भर में शुरू कर दिया अँधेरा बोना! त...
बहुत अच्छा लगा.
ReplyDeleteबहुत खूब !!
ReplyDeleteब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन फादर्स डे मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चित्र और भाव ....
ReplyDeleteसुन्दर भावो के साथ सुन्दर चित्र..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर दी और आपका चित्र तो बहुत ही बढ़िया लगा |
ReplyDeleteबहुत सुन्दर ...........नमस्ते दी
ReplyDeleteबहुत सुन्दर भाव और चित्र के साथ अभिव्यक्ति .... !!
ReplyDeletesach me apke shabdo me jaadu hai....
ReplyDeleteसुंदर ।
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