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२६-०६-२०२६ : शून्योपरान्त या लंतरानी?
छोड़ चुकी हूँ समस्याओं पर विचार रखना। हर गाँठ को खोलने की ज़िद में उँगलियाँ ही लहूलुहान होती थीं। अब जो नहीं बदल सकता, उसे समय के हवाले कर द...
छोड़ चुकी हूँ समस्याओं पर विचार रखना। हर गाँठ को खोलने की ज़िद में उँगलियाँ ही लहूलुहान होती थीं। अब जो नहीं बदल सकता, उसे समय के हवाले कर द...
शुभकामनाएं
ReplyDeleteसुंदर पोस्ट।
ReplyDeleteसुन्दर पोस्ट...
ReplyDeleteआप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)
बहुत सुन्दर
ReplyDeleteइस रचना के लिए हमारा नमन स्वीकार करें
ReplyDeleteएक बार हमारे ब्लॉग पुरानीबस्ती पर भी आकर हमें कृतार्थ करें _/\_
http://puraneebastee.blogspot.in/2015/03/pedo-ki-jaat.html