शाम को टहलते हुए आसानी होती है , दूध व सब्ज़ी ले कर लौटना ... यूँ तो अक्सर दूध बूथ से ही लेती हूँ ... लेकिन कभी कभी किराने की दुकान से भी दूध ले लेती हूँ .... सब्ज़ी का दुकान और किराने का दुकान एक दूसरे के आस पास है .... सब्ज़ी ले कर किराने के दुकान से ही दूध लेना आसान था ..... किराने की दुकान गयी तो दुकान में मालिक युवा था ..... चालीस रुपया दी ; दूध था ३९ का , युवा दूध दे मोबाइल में व्यस्त हो गया । मेरे टोकने पर वो बुदबुदाता(चिल्लर चाहिए) टॉफी का डिब्बा खोलने लगा .... मैं मना की कि नहीं मुझे टॉफी नहीं चाहिए ... बाद में हिसाब कर लेंगे ... तो बेहद उखड़े आवाज में बोला कि मैं हमेशा नहीं बैठता दुकान में ,याद कौन रखेगा , चेंज ले कर आना चाहिए ; मेरे पास एक रुपया नहीं है ,दो का सिक्का है .... युवा वर्ग को तैश गलत बात पर ही ज्यादा आता है ..... सब्जी वाले से मैं एक का सिक्का ली ,किराने के दुकान से दो का सिक्का बदली ,सब्जी वाले को दो का सिक्का देकर चलती बनी
Sunday, 29 January 2017
सीख
शाम को टहलते हुए आसानी होती है , दूध व सब्ज़ी ले कर लौटना ... यूँ तो अक्सर दूध बूथ से ही लेती हूँ ... लेकिन कभी कभी किराने की दुकान से भी दूध ले लेती हूँ .... सब्ज़ी का दुकान और किराने का दुकान एक दूसरे के आस पास है .... सब्ज़ी ले कर किराने के दुकान से ही दूध लेना आसान था ..... किराने की दुकान गयी तो दुकान में मालिक युवा था ..... चालीस रुपया दी ; दूध था ३९ का , युवा दूध दे मोबाइल में व्यस्त हो गया । मेरे टोकने पर वो बुदबुदाता(चिल्लर चाहिए) टॉफी का डिब्बा खोलने लगा .... मैं मना की कि नहीं मुझे टॉफी नहीं चाहिए ... बाद में हिसाब कर लेंगे ... तो बेहद उखड़े आवाज में बोला कि मैं हमेशा नहीं बैठता दुकान में ,याद कौन रखेगा , चेंज ले कर आना चाहिए ; मेरे पास एक रुपया नहीं है ,दो का सिक्का है .... युवा वर्ग को तैश गलत बात पर ही ज्यादा आता है ..... सब्जी वाले से मैं एक का सिक्का ली ,किराने के दुकान से दो का सिक्का बदली ,सब्जी वाले को दो का सिक्का देकर चलती बनी
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आभारी हूँ छोटी बहना
ReplyDeleteठीक किया :)
ReplyDeleteइतने कम शब्दों में ज़माने को आइना दिखाती सीख विभा दीदी की उस मानवीय सोच की स्थापना है जो उद्दंड युवा धनाड्य को कमज़ोरी का फायदा नहीं उठाने देती बल्कि ज़रूरतमंद की परिस्थितिजन्य सहायता को प्रधानता देती है. प्रेरक रचना.
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