Saturday, 7 September 2019

जय हिन्द-सलाम भारत के वीरों

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 2 लोग, स्क्रीन
ग्यारह रुपये जब मिलते थे
जाते हुए अतिथि की दबी मुट्ठी से
आई किसी भउजी के खोइछा से
कई मनसूबे तैयार होते थे
हमारे ज़माने में
छोटी खुशियों की कीमत
बड़ी होती थी

चन्द्रयान के सफर में लगा
ग्यारह साल सुन-पढ़
कुछ वैसा ही कौतूहल जगा
इस ग्यारह साल में कितने
सपने बुने उलझे टूटे होंगे
फिर दूने जोश से
उठ खड़े हुए होंगे


वैसे जमाना बहुत पहले जैसा रहा नहीं...
मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन
–जा ये चंदा ले आवs खबरिया
–चंदा मामा दूर के, पुए पकाए गुड़ के

6 comments:


  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (08-09-2019) को " महत्व प्रयास का भी है" (चर्चा अंक- 3452) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    ReplyDelete
    Replies
    1. सस्नेहाशीष संग शुक्रिया बहना

      Delete

  2. जय मां हाटेशवरी.......
    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    08/09/2019 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में......
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर प्रस्तूति।

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

अभिविन्यास

 "अद्धभुत, अप्रतिम रचना। नपे तुले शब्दों में सामयिक लाजवाब रचना। दशकों पहले लिखी यह आज भी प्रासंगिक है। परिस्थितियाँ आज भी ऐसी ही हैं। ...